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‘नारी अस्मिता’ पर हुई परिचर्चा, साहित्य और सिनेमा के नजरिये से उठे सवाल

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। बलरामपुर गार्डन में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेले में अपराजिता जज़्बा जीत का नेशनल वेलफेयर ट्रस्ट और उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के संयुक्त तत्वावधान में ‘नारी अस्मिता : साहित्य और सिनेमा के झरोखे से’ विषय पर विशेष परिचर्चा आयोजित की गई। इसमें साहित्य और सिनेमा के माध्यम से महिलाओं की पहचान, सम्मान और सामाजिक भूमिका जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों, प्रबुद्धजनों और संस्था से जुड़ी अपराजिताओं ने अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम का शुभारंभ पूजा श्रीवास्तव की वंदना और आशा श्रीवास्तव की संस्कृत में प्रस्तुत वाणी वंदना से हुआ। संस्था की अध्यक्ष प्रोफेसर सीमा सरकार और संस्थापक डॉ. अनुपमा श्रीवास्तव ने अतिथियों का स्वागत किया। परिचर्चा में अतिथि के रूप में प्रोफेसर निधि बाला श्रीवास्तव, डॉ. महेंद्र भीष्म, मुकुल महान, सर्वेश अस्थाना और संध्या सिंह शामिल हुए।

परिचर्चा के दौरान आरना श्रीवास्तव, श्वेता श्रीवास्तव, दिव्या श्रीवास्तव, डॉ. रीमा छाबड़ा, डॉ. सुकन्या तिवारी, कल्पना मिश्रा, पूजा श्रीवास्तव और किरण श्रीवास्तव ने नारी अस्मिता के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने साहित्य और सिनेमा में महिलाओं के चित्रण तथा समाज में उनकी पहचान और सम्मान से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।

इस अवसर पर 29 सितंबर 2026 को आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता के पक्ष वर्ग में डॉ. वत्सला शर्मा को प्रथम, कल्पना मिश्रा को द्वितीय तथा संदीप कौर और गीताबाली श्रीवास्तव को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। विपक्ष वर्ग में दिव्या श्रीवास्तव को प्रथम, डॉ. सुकन्या तिवारी और पूजा सैनी को द्वितीय तथा रश्मि शरद को तृतीय पुरस्कार दिया गया। इसके अतिरिक्त क्रिटिक पुरस्कार से निधि सक्सेना, अपर्णा सक्सेना, अर्चना श्रीवास्तव, किरण श्रीवास्तव और रश्मि सिंह को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का संचालन संस्था की उपसचिव शिखा श्रीवास्तव और साहित्य विधा प्रमुख डॉ. रश्मि सिन्हा ने किया। अंत में अध्यक्ष प्रोफेसर सीमा सरकार ने अतिथियों, प्रतिभागियों और उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।