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IMA लखनऊ की मांग : दवाओं पर ‘एक दवा, एक मूल्य’ नीति लागू हो

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर IMA में डिप्रेशन, नशे और आत्महत्या की रोकथाम पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने समय पर पहचान, उपचार और पारिवारिक सहयोग के साथ दवाओं की कीमत एवं गुणवत्ता में पारदर्शिता पर जोर दिया। वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. शाश्वत सक्सेना ने बताया कि डिप्रेशन और नशे की समस्याओं का उपचार संभव है। लगातार उदासी, निराशा, नींद में बदलाव और सामाजिक दूरी को अनदेखा न करें। मोबाइल का समस्याग्रस्त उपयोग भी मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। आत्महत्या के विचारों पर संवेदनशील संवाद और विशेषज्ञ सहायता महत्वपूर्ण हैं। दवाएँ चिकित्सकीय निगरानी में ही बंद की जाएँ। 

मानद सचिव डॉ. श्वेता श्रीवास्तव ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए सहायता लेने से जुड़ा संकोच दूर करना आवश्यक है। खुशमिजाज दिखने वाला व्यक्ति भी डिप्रेशन से जूझ सकता है। उन्होंने युवाओं को नशे से बचाने और महिलाओं की स्वास्थ्य देखभाल में मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई। अध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार अस्थाना ने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की समग्र देखभाल पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि डिप्रेशन का उचित उपचार डायबिटीज और रक्तचाप के बेहतर प्रबंधन में सहायक हो सकता है। 

उन्होंने कहा कि “मानसिक परेशानी से गुजर रहे व्यक्ति को परिवार और समाज का सहयोग मिले। मरीजों के हित के साथ ईमानदार चिकित्सकों की गरिमा भी सुरक्षित रहे।” दवा मूल्य पर IMA ने तुलनीय दवाओं के लिए “एक दवा, एक मूल्य” और कुल व्यापारिक मार्जिन की अधिकतम सीमा 30 प्रतिशत रखने की माँग की।

दवा सस्ती मिलने के पीछे प्रतिस्पर्धा, खरीद की मात्रा, छूट, अलग बैच या शेष उपयोग अवधि जैसे कारण हो सकते हैं। केवल कम कीमत से दवा को नकली और अधिक कीमत से गुणवत्तापूर्ण नहीं माना जा सकता। नकली, अधोमानक, एक्सपायर्ड या अनुचित परिस्थितियों में रखी दवाओं की पहचान के लिए औषधि प्रशासन नियमित नमूना परीक्षण, बैच सत्यापन और आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी करे। IMA ने मेडिकल स्टोरों पर आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता के बिना निदान, उपचार तय करने और जहाँ आवश्यक हो वहाँ वैध पर्चे के बिना दवा देने पर रोक की माँग की। पंजीकृत फार्मासिस्ट की वैधानिक भूमिका का सम्मान करते हुए अनधिकृत चिकित्सा रोकी जाए, ताकि मरीजों को सुरक्षित उपचार मिले।