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बाल निकुंज : गरीबी के बीच पढ़ाई, मेहनत से मुकाम, आकाश को मिली ग्लोबल इंजीनियर की जिम्मेदारी

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। आर्थिक चुनौतियों के बीच मेहनत, लगन और शिक्षा के दम पर आगे बढ़ने वाले बाल निकुंज इंग्लिश स्कूल, पलटन छावनी के पूर्व छात्र आकाश राजपूत ने अपने परिवार और विद्यालय का नाम रोशन किया है।इंटरमीडिएट-2017 बैच के मेधावी छात्र आकाश को 5 अक्टूबर 2026 को आर्बिट एंड स्काईलाइन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में ‘ग्लोबल फील्ड सर्विस इंजीनियर’ के पद पर नियुक्ति मिली। 

सफलता के बाद 8 अक्टूबर को वह अलीगंज स्थित अपने आवास पहुंचे और माता-पिता व परिवारीजनों का आशीर्वाद लिया। इसके बाद बाल निकुंज इंग्लिश स्कूल पहुंचकर अपने गुरुजनों का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया। विद्यालय पहुंचने पर प्रधानाचार्या रश्मि शुक्ला ने आकाश को बधाई दी और फूलमाला व पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान आकाश ने वरिष्ठ कक्षाओं के छात्र-छात्राओं से संवाद किया और अपनी सफलता के सफर को साझा करते हुए उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। उन्होंने विद्यार्थियों को मेहनत, निरंतर प्रयास और लक्ष्य के प्रति समर्पण का महत्व बताया।

आकाश की प्रारंभिक शिक्षा बाल निकुंज इंग्लिश स्कूल से ही हुई। उन्होंने वर्ष 2015 में हाईस्कूल परीक्षा 86 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की, जबकि वर्ष 2017 में इंटरमीडिएट में 76 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद उन्होंने पॉलिटेक्निक डिप्लोमा किया और कानपुर से बीटेक की पढ़ाई पूरी की। शिक्षा पूरी करने के बाद उनका चयन दिल्ली मेट्रो कॉर्पोरेशन में हुआ, जहां उन्होंने दो वर्ष दो माह तक कार्य किया। इसके बाद सात्विक सोलर इंडस्ट्री प्राइवेट लिमिटेड में एक वर्ष का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में अवादा इलेक्ट्रिक हाइड्रो सोलर लिमिटेड में कार्यरत रहते हुए उन्होंने ग्लोबल फील्ड सर्विस इंजीनियर के पद पर नई उपलब्धि हासिल की।

आकाश की सफलता के पीछे उनके परिवार के संघर्ष की कहानी भी प्रेरणादायी है। उनके पिता महेंद्र कुमार राजपूत इंजीनियरिंग कॉलेज, जानकीपुरम में संविदा पर कार्य करते रहे और सीमित आर्थिक संसाधनों में अपने दो पुत्रों व एक पुत्री का पालन-पोषण करते हुए उन्हें शिक्षा दिलाई। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने बच्चों की पढ़ाई जारी रखी। बाल निकुंज स्कूल्स एंड कॉलेज के संस्थापक स्व. शिव सहाय जायसवाल के सहयोग से फीस में छूट मिलने से भी परिवार को बच्चों की शिक्षा जारी रखने में मदद मिली।

आकाश की उपलब्धि पर उनके पिता की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने विद्यालय के शिक्षकों की ओर इशारा करते हुए कहा कि “ये गुरु हैं, भगवान हैं, जो चाह लें तो मिट्टी को सोना बना दें।” बेटे की सफलता को उन्होंने परिवार के वर्षों के संघर्ष और शिक्षकों के मार्गदर्शन का परिणाम बताया। इस अवसर पर आकाश के माता-पिता व परिवारीजनों के अलावा प्रधानाचार्या रश्मि शुक्ला, अंग्रेजी प्रवक्ता अरविंद दीक्षित, अनूप शुक्ला, गणित प्रवक्ता अनिल तिवारी, सीनियर इंचार्ज दिनेश तिवारी सहित शिक्षकगण मौजूद रहे।