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हीरे-मोती मिलने तक सुरंग खोदने की कहानी, शोभिनव के जुनून का नानी ने खोला राज

मंजिल करीब हो तो हारना नहीं’, नानी को सुनाई कहानी और सच कर दिखाया सपना

लखनऊ (शम्भू शरण वर्मा / टेलीस्कोप टुडे)। बहुचर्चित फिल्म हनुमान अंश में बाबा नीम करौली महाराज की भूमिका निभाने वाले अभिनेता अभिनव श्रीवास्तव उर्फ शोभिनव सत्या के परिजनों को कायस्थ परिवार की ओर से सम्मानित किया गया। इस मौके पर शोभिनव की नानी कुसुम श्रीवास्तव ने उनके बचपन से लेकर अभिनय के क्षेत्र में पहचान बनाने तक के सफर से जुड़े कई रोचक और भावुक प्रसंग साझा किए। उन्होंने बताया कि शोभिनव उन्हें प्यार से ‘बड़ी मां’ कहते हैं।

कुसुम श्रीवास्तव ने बताया कि शोभिनव बचपन से ही सामान्य बच्चों से कुछ अलग थे। उनके डीएवी कॉलेज में अंग्रेजी के लेक्चरर रहे एक शिक्षक ने बचपन में शोभिनव को देखकर कहा था कि यह बच्चा विलक्षण बुद्धि का है और बड़ा होकर कुछ अलग करेगा। उस समय परिवार ने इस बात को सहजता से लिया, लेकिन धीरे-धीरे शोभिनव के व्यवहार और रुचियों से यह बात सही साबित होती दिखाई दी।

उन्होंने बताया कि स्कूल के दिनों में शोभिनव पढ़ाई के साथ सांस्कृतिक और अन्य गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। स्कूल में जब भी कोई नाटक, प्रस्तुति या अन्य कार्यक्रम होता, वह उसमें भाग लेने के लिए आगे रहते थे। उनकी इसी सक्रियता से परिवार को महसूस होने लगा था कि उनके भीतर कुछ अलग करने की क्षमता है।

कुसुम श्रीवास्तव ने कहा कि एक समय परिवार में शोभिनव के भविष्य को लेकर चिंता भी रहती थी। परिवार के कई बच्चे अपने-अपने क्षेत्र में आगे बढ़ चुके थे, लेकिन शोभिनव के करियर को लेकर स्पष्टता नहीं थी। उन्हें लगता था कि आखिर वह आगे क्या करेंगे और उनका भविष्य किस दिशा में जाएगा। ऐसे समय में शोभिनव के नाना हमेशा परिवार को भरोसा दिलाते थे कि वह भी जरूर कुछ अच्छा करेंगे और उनके भविष्य को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष शोभिनव के चाचा के निधन के बाद वह मुंबई से घर आए थे। उस समय परिवार ने उनसे नौकरी के बारे में सोचने और किसी स्थायी काम से जुड़ने की सलाह दी। कुसुम श्रीवास्तव ने कहा कि उन्होंने भी शोभिनव से कहा कि कोई नौकरी कर लो, उसके बाद अपने सपनों के बारे में सोचना। इस पर शोभिनव ने उन्हें प्यार से ‘बड़ी मां’ कहकर समझाया कि वह चिंता न करें।

नानी के मुताबिक, शोभिनव ने उन्हें उस समय एक प्रेरक कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि कुछ लोग सुरंग खोद रहे थे और उन्हें बताया गया था कि आगे जाकर उन्हें हीरे-मोती मिलेंगे। वे कई दिनों तक सुरंग खोदते रहे। जब मंजिल महज कुछ मीटर दूर रह गई तो वे थककर काम छोड़कर चले गए। शोभिनव ने कहा कि वह ऐसा नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि वह तब तक प्रयास करते रहेंगे, जब तक उन्हें अपने हिस्से के ‘हीरे-मोती’ नहीं मिल जाते।

कुसुम श्रीवास्तव ने कहा कि शोभिनव का यही विश्वास और लगातार प्रयास आज उन्हें इस मुकाम तक लेकर आया है। फिल्म में बाबा नीम करौली महाराज की भूमिका निभाकर उन्होंने न केवल अपनी अलग पहचान बनाई, बल्कि परिवार का नाम भी रोशन किया।

भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि आज शोभिनव की वजह से उन्हें भी लोगों के बीच सम्मान मिल रहा है। उन्होंने कहा, “हमारे लिए इससे बड़ा गर्व क्या होगा कि हमारा नाती अपने काम से परिवार का नाम ऊंचा कर रहा है। आज उसकी वजह से हम आप लोगों के सामने सम्मान के साथ खड़े हैं। हमें अपने नाती पर बहुत गर्व है।”

उन्होंने कहा कि परिवार को विश्वास है कि शोभिनव आने वाले वर्षों में भी अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर नई उपलब्धियां हासिल करेंगे। उनके बचपन में दिखी प्रतिभा और कुछ अलग करने की चाह आज उनके अभिनय के रूप में सामने आ रही है।