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बदलती तस्वीर और फैजुल्लागंज की नई उम्मीदें

(डॉ. एस.के. गोपाल)

एक दशक पहले का फैजुल्लागंज और आज का फैजुल्लागंज एक जैसा नहीं है। कभी कच्ची सड़कों, बांस-बल्लियों पर झूलते बिजली के तारों, बरसात में जलभराव और सीमित नागरिक सुविधाओं से जूझता यह क्षेत्र अब अपनी पुरानी तस्वीर से आगे बढ़ रहा है। चार वार्डों में फैले फैजुल्लागंज में सड़क, जलनिकासी, बिजली, आवागमन, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी कई जरूरी सुविधाएं विकसित हुई हैं। पिछले दो बार से विधायक डा. नीरज बोरा ने क्षेत्र की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए शासन और प्रशासन के स्तर पर लगातार प्रयास किए जिसके परिणामस्वरूप कई महत्वपूर्ण विकास कार्य संभव हुए हैं। इन प्रयासों के साथ फैजुल्लागंज में विकास के कई जरूरी काम आगे बढ़े हैं और क्षेत्र की पुरानी समस्याओं का दायरा धीरे-धीरे कम हुआ है।

फैजुल्लागंज की पुरानी समस्याओं में जलनिकासी प्रमुख रही है। आबादी बढ़ने के साथ बरसात में जलभराव की समस्या भी सामने आती रही। करीब पैंतालीस करोड़ रुपये की लागत से लगभग नौ किलोमीटर लंबे आरसीसी नाले का निर्माण इस दिशा में बड़ा काम है। इसके साथ क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में सड़क और नाली के काम भी हुए हैं। इससे बरसात के पानी की निकासी बेहतर हुई है और जलभराव की पुरानी समस्या से राहत की स्थिति बनी है। हालांकि गोमती का जलस्तर बढ़ने से सामने आने वाली बाढ़ की चुनौती अलग है और इसके लिए स्थायी सुरक्षा की जरूरत बनी हुई है।

आवागमन के क्षेत्र में पक्के पुल का निर्माण फैजुल्लागंज के लिए महत्वपूर्ण बदलाव है। लंबे समय तक लोगों की आवाजाही का माध्यम रहा पीपा पुल अब स्थायी पुल का रूप ले चुका है। पक्का पुल बनकर तैयार है और शीघ्र शुरू होने वाला है। इसके शुरू होने से फैजुल्लागंज का आसपास के क्षेत्रों से संपर्क अधिक सुगम होगा। सड़क निर्माण और सुधार के कामों ने भी स्थानीय आवागमन को बेहतर किया है। इसी क्रम में दाऊदनगर में विद्युत उपकेन्द्र बनने और बिजली के ढांचे के विस्तार से विद्युत व्यवस्था मजबूत हुई है। बांस-बल्ली वाले क्षेत्र में विद्युत पोल लगने से बिजली सुविधा का विस्तार हुआ है।

स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी जरूरतों के अनुरूप काम आगे बढ़े हैं। पचास बेड का अस्पताल बनकर तैयार है और इसके संचालन की प्रक्रिया चल रही है। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के निर्माण के लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और अब निर्माण की दिशा में काम आगे बढ़ना है। कल्याण मंडप जैसी सामुदायिक सुविधा भी क्षेत्र में उपलब्ध हुई है। बढ़ती आबादी के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और सामुदायिक सुविधाओं का स्थानीय स्तर पर विकसित होना क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम है।

अब फैजुल्लागंज में विकास का अगला चरण आधुनिक नागरिक सुविधाओं से जुड़ा है। अमृत योजना के तहत चारों वार्डों में पाइपलाइन से पेयजल पहुंचाने, सीवर लाइन बिछाने और एसटीपी के निर्माण की योजनाएं हैं। विधायक डा. नीरज बोरा ने इन विषयों को विधानसभा में उठाने के साथ शासन स्तर पर भी लगातार प्रयास किए हैं। मुख्यमंत्री के समक्ष उन्होंने फैजुल्लागंज की पेयजल और सीवर परियोजनाओं को शीघ्र मंजूरी देने का विषय रखा है। इन योजनाओं के पूरा होने पर चारों वार्डों में पेयजल और सीवर जैसी जरूरी नागरिक सुविधाओं की व्यवस्था और बेहतर हो सकेगी।

फैजुल्लागंज के भविष्य के विकास में बाढ़ से स्थायी सुरक्षा का सवाल भी महत्वपूर्ण है। आईआईएम रोड से हार्डिंग ब्रिज यानी पक्के पुल तक गोमती के बाएं तट पर करीब एक सौ बयासी करोड़ रुपये की लागत से तटबंध बनाने की परियोजना प्रस्तावित है। इस विषय को डा. नीरज बोरा ने मुख्यमंत्री के समक्ष रखा है। तटबंध का महत्व केवल मौजूदा आबादी की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। यह क्षेत्र में होने वाले भविष्य के नियोजित विकास के लिए भी जरूरी आधार तैयार करेगा।

इसी क्षेत्र में प्रस्तावित प्रबन्ध नगर फैजुल्लागंज के भविष्य के विस्तार से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। यहां बड़े पैमाने पर आवासीय विकास होना है। ऐसे में इस क्षेत्र का सुरक्षित और टिकाऊ विकास स्थायी बाढ़ सुरक्षा से सीधे जुड़ जाता है। प्रस्तावित तटबंध इसलिए भविष्य के प्रबंध नगर के लिए भी आधारभूत आवश्यकता बन जाता है। इसके साथ पेयजल, सीवर, जलनिकासी, बिजली और सड़क जैसी सुविधाओं को शुरुआत से ही समग्र योजना का हिस्सा बनाना होगा ताकि नया विकास आगे चलकर नई नागरिक समस्याओं का कारण न बने।

फैजुल्लागंज अब उस दौर से आगे बढ़ चुका है जहां केवल बुनियादी सुविधाओं की मांग थी। पिछले एक दशक में हुए कामों ने विकास की एक आधारभूमि तैयार की है। अब जरूरत ऐसे विकास की है जो पेयजल, सीवर, जलनिकासी, आवागमन और बाढ़ सुरक्षा को एक साथ लेकर चले। प्रस्तावित योजनाओं का समन्वित क्रियान्वयन इस क्षेत्र को आने वाले वर्षों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित आधार दे सकता है। यही पिछले एक दशक में हुए बदलावों की अगली स्वाभाविक कड़ी होगी।

(लेखक डॉ. एस.के. गोपाल स्वतंत्र पत्रकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं)