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पुस्तकों के संसार में ‘उड़ती स्त्री’ से ‘तेरा राज नहीं आयेगा रे’ तक

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। बलरामपुर गार्डन अशोक मार्ग में चल रहे राष्ट्रीय पुस्तक मेले में शुक्रवार सुबह से ही युवाओं का उमड़ना शुरू हो गया था। वंदे मातरम् की थीम को समर्पित मेले में नयी किताबें खूब हैं। प्रभात के स्टाल पर नयी किताबों में कानून व्यवस्था पर चर्चित पुलिस अधिकारी प्रकाश सिंह की संघर्ष, राम बहादुर राय पर हेमंत शर्मा के संपादन में निकली अस्सी के रात साहब, माओवाद के अनकहे अनजाने पक्षों पर राजीव रंजन रचना नायडू की तेरा राज नहीं आयेगा रे, डा. सरवन सिंह बघेल श्रवण की चरैवेति के अलावा इकिगाई की भारतीय चेतना और साक्षात्कार मार्गदर्शन पर आधारित पूर्व आइएएस अरविंद कुमार सिंह की साक्षात्कार दर्पण पसंद की जा रही हैं। 

राजपाल के यहां आदिवासी नरसंहार पर आधारित हरिराम मीणा का उपन्यास धूणी तपे तीर, 1857 क्रांति के नरसंहार पर भगवंत अनमोल की बावनी इमली, देवदत्त पटनायक की भारतीय धार्मिक सांस्कृतिक परम्पराओं में कमल महत्वपूर्ण हैं। राजकमल के स्टाल पर कथेतर साहित्य में नारी मुक्ति पर मृणाल पाण्डे की उड़ती स्त्री, यात्रा वृत्तांतों पर मनीषा कुलश्रेष्ठ की मेघदूत की राह के पथिक और शांत्वना दूबे तिवारी की मेरी न्यूयार्क डायरी और नेहा दीक्षित अनुवादित कोई एक सईदा पसंद की जा रही हैं।

सुबह अनंत अनुनाद के काव्य समारोह से पहले आर्थर्स अड्डा के संयोजन में अदिति कुमार, उषा कुमार, विनीत के. त्रिपाठी और विजय पाल सिंह ने अपनी किताबों पर चर्चा की। रेखा अग्रवाल ने भजन सुनाए। दोपहर बाद शैलेन्द्र जसराज की दो किताबों ‘कहानी फिर कभी’ और ‘कोई गीत सुबह के गाता है’ पर फ्लाईड्रीम्स की ओर से लेखक और अन्य विद्वानों ने बात रखी। 

उत्कर्ष की काव्य गोष्ठी से पहले सुम्बुल सिद्दीकी की अंग्रेजी किताबों इकोज आफ रेजिलियंस और अनब्रोकेन ग्लो पर बात की गयी। दूसरे मंच पर साहित्य सभा की परिचर्चा में संजय जायसवाल, सर्वेश अस्थाना आदि ने अपने वक्तव्य रखे। पुस्तक प्रेमियों ने रचनाएं सुनायीं। 

3 अक्टूबर के कार्यक्रम

  • सुबह 11:00 बजे पुस्तक विमोचन- रश्मि श्रीवास्तव 
  • अपराह्न 2: 00 बजे लेखक से संवाद 
  • अपराह्न 3: 00 बजे सम्मान समारोह- युवा रचनाकार मंच
  • शाम 4: 00 बजे विमोचन समारोह- साहित्य संसद
  • शाम 6: 00 बजे पुस्तक विमोचन एवं परिचर्चा- संतोष वाल्मीकि