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वंदे मातरम् थीम पर सजेगा पुस्तकों का संसार, साहित्य-संस्कृति के होंगे विविध आयोजन

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। बलरामपुर गार्डन, अशोक मार्ग में 11 दिवसीय 23वां राष्ट्रीय पुस्तक मेला एक अक्टूबर से प्रारम्भ होगा। वंदे मातरम् के डेढ़ सौ वर्षों की थीम को समर्पित इस पुस्तक मेले का उद्घाटन उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक करेंगे। 

मेला संयोजक मनोज सिंह चंदेल ने बताया कि करीब ढाई दशक पहले शुरू किये हमारे समवेत प्रयासों से शहर में पुस्तक मेलों की संस्कृति अब नियमित आयोजन बन गयी है। यह केवल पुस्तक मेला नहीं, यह ज्ञान और संस्कृति का उत्सव है। हम हर प्रकार के पाठकों की रुचियों को ध्यान में रखते हुए देश भर से प्रकाशनों को एकत्र कर रहे हैं। 

राष्ट्रीय पुस्तक मेले में साहित्य से लेकर डिजिटल युग तक की किताबों का संसार

मनोज सिंह चंदेल ने कहा कि पुस्तक मेला केवल किताबों की बिक्री का मंच नहीं, बल्कि साहित्य, संस्कृति और समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने वाला आयोजन है। मेले में देश के प्रमुख प्रकाशकों के साथ कई नए प्रकाशक, सामाजिक संस्थाएं और साहित्यिक संगठन भी भाग ले रहे हैं। उनका प्रयास है कि पाठकों को एक ही स्थान पर विविध विषयों और भाषाओं की पुस्तकों की विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध हो।

उन्होंने बताया कि शिक्षा से संबंधित पुस्तकों के लिए भी अलग से आयोजनों की शुरुआत हुई है। शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित कार्यक्रमों में भी प्रकाशकों की भागीदारी रही है, लेकिन राष्ट्रीय पुस्तक मेला उनका प्रमुख और व्यापक आयोजन है। उन्होंने कहा कि इस बार मेले में देश के बड़े प्रकाशकों के साथ कई नए प्रकाशक भी पहुंचे हैं। सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय है। साहित्य की विभिन्न विधाओं और भाषाओं को मंच देने का प्रयास किया गया है। विशेष रूप से उर्दू साहित्य और पुस्तकों को भी पर्याप्त स्थान दिया गया है। गीता प्रेस, गायत्री परिवार और अन्य प्रतिष्ठित संस्थाओं की सहभागिता से मेले की विविधता और बढ़ी है।

उन्होंने कहा कि बच्चों की पुस्तकों का भी मेले में बड़ा संसार मौजूद है। डिजिटल दौर के बावजूद पुस्तकों की गुणवत्ता, छपाई, डिजाइन और प्रस्तुति में लगातार सुधार हुआ है। आधुनिक ग्राफिक डिजाइनिंग और बेहतर प्रिंटिंग तकनीक के कारण आज किताबें आकर्षक रूप में पाठकों तक पहुंच रही हैं।

साहित्यिक आयोजनों की खास पहचान

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय पुस्तक मेले की सबसे बड़ी विशेषताओं में साहित्यिक कार्यक्रम भी शामिल हैं। शहर के साथ आसपास के क्षेत्रों के साहित्य प्रेमी भी पूरे साल पुस्तक मेले का इंतजार करते हैं। मेले में प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इनमें पुस्तक लोकार्पण, लेखक परिचर्चा, साहित्यिक संवाद, सम्मेलन और अन्य रचनात्मक कार्यक्रम शामिल हैं। इसके साथ ही सांस्कृतिक संध्याओं का भी आयोजन किया जाता है।

मनोज सिंह चंदेल ने कहा कि मेले की कोशिश रहती है कि यहां आने वाले हर आयु वर्ग और हर रुचि के पाठक को उसकी पसंद की सामग्री मिले। बच्चों से लेकर युवाओं, साहित्यकारों और वरिष्ठ नागरिकों तक सभी के लिए मेले में पुस्तकें और कार्यक्रम उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वरिष्ठ साहित्यकारों और बुजुर्गों को भी अपनी बात रखने तथा पाठकों से संवाद करने का अवसर दिया जाता है।

राष्ट्रीय पुस्तक मेले में हर आयु वर्ग के पाठकों के लिए बढ़ेंगे विकल्प

मेला निदेशक आकर्ष चंदेल ने कहाकि लगभग 75 हजार वर्ग फीट में फैले पुस्तक मेले का यह भव्य आयोजन 50 से अधिक प्रतिष्ठित प्रकाशकों के 120 से अधिक स्टॉलों के साथ एक विशाल विक्रय प्रदर्शनी के रूप में आकार लेगा। मेले में हजारों पुस्तकों की विविध श्रृंखला में हिंदी, अंग्रेज़ी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में साहित्य, शैक्षणिक पुस्तकें, बाल साहित्य और दुर्लभ पुस्तकों का संग्रह उपलब्ध रहेगा। 

आकर्ष चंदेल ने बताया कि मेले में हर वर्ष नए प्रकाशकों और संस्थाओं को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। लखनऊ के पाठकों से मिलने वाले सुझावों को भी गंभीरता से लिया जाता है और अगले संस्करण में उन्हें शामिल करने का प्रयास किया जाता है, ताकि पाठकों को उनकी पसंद की अधिक से अधिक पुस्तकें एक ही मंच पर उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि मेले में छोटे बच्चों की गतिविधियों और ज्ञानवर्धक पुस्तकों से लेकर युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों की रुचि के अनुरूप किताबों को शामिल किया जा रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का प्रयास है।

आकर्ष चंदेल ने कहा कि हर वर्ष मेले में पाठकों के लिए पुस्तकों और प्रकाशकों के विकल्प बढ़ाए जा रहे हैं। उनकी कोशिश है कि राष्ट्रीय पुस्तक मेला लखनऊ के लोगों को पूरी तरह अपना आयोजन लगे और पाठकों को यहां उनकी जरूरत और रुचि के अनुरूप पुस्तकें आसानी से मिल सकें। निशुल्क प्रवेश के साथ, यह मेला हर वर्ष पुस्तक प्रेमियों के लिए नये आकर्षण का केंद्र होता है। यह पुस्तक मेला सभी आयु वर्ग के लिए साहित्यिक और सांस्कृतिक आयोजनों का केंद्र होगा। उद्घाटन दिवस रतन सिस्टर्स के दल का नृत्य कार्यक्रम होगा।

मेले में दिल्ली से प्रभात प्रकाशन, अन्बाउंड स्क्रिप्ट, सस्ता साहित्य मंडल, वाणी प्रकाशन, भारतीय ज्ञानपीठ, राजपाल एंड संस, सम्यक प्रकाशन, सामयिक प्रकाशन, वेलायत पब्लिकेशन्स, ग्रीन पाम, फ्लाईड्रीम्स, ईएचएफ लर्निंग, ऋषभ बुक्स, नय्यर बुक, भारतीय कला प्रकाशन, स्टूडेंट बुक सेंटर, यशिका एंटरप्राइजेज, आर्यन बुक, रितेश बुक, बेस्ट बुक, पदम बुक, ज्योति बुक्स व शिवांगी बुक इंटरनेशनल, त्रिदेव बुक्स, परिमल पब्लिकेशन, वर्धमान बुक्स, ऋषि पब्लिकेशन के साथ नोएडा से मंजुल पब्लिशिंग, सेतु प्रकाशन, रेख्ता पब्लिकेशन्स और गाजियाबाद से न्यू बुक और वर्मा बुक के स्टाल होंगे। अन्य शहरों के प्रकाशनों में लोकभारती प्रकाशन प्रयागराज, उपकार, प्रतियोगिता दर्पण, साहित्य सरोवर व निखिल पब्लिशर्स आगरा; दिनकर पुस्तकालय भागलपुर, ऑथर्स अड्डा, गिडियंस इंटरनेशनल, लिंक लिमिटेड और पैराडाइज बुक कंपनी रायपुर के स्टाल होंगे।

स्थानीय प्रकाशकों में उ.प्र. हिन्दी संस्थान, उ.प्र. उर्दू अकादमी, रामकृष्ण मठ, ज्ञानार्ची बुक्स, नवपल्लव बुक्स,  बोधरस प्रकाशन, आर्य प्रतिनिधि सभा, द इंटेलेक्चुअल्स, उ.प्र.साहित्य सभा, हिन्दी वांग्मय निधि, सत्य मार्ग प्रकाशन, गायत्री ज्ञान मंदिर, हेल्थ केयर सिस्टम्स व देवेंद्र बुक के स्टाल होंगे।

साहित्यिक मंच पर साहित्यकारों से संवाद, परिचर्चाओं और काव्य गोष्ठियों के संग रहीस सिंह, डा. रश्मि श्रीवास्तव, करुणा पाण्डेय, संतोष वाल्मीकि, ब्रजेश कुमार मिश्र, विवेक शुक्ला, नीलम राकेश और मनीष शुक्ला आदि की किताबों के विमोचन होंगे। बच्चों के लिये कहानी सत्र और प्रतियोगिताएँ होंगी। हमेशा की तरह स्थानीय लेखकों की पुस्तकों का एक अलग स्टाल होगा। मेले में हर पुस्तक पर कम से कम 10 प्रतिशत की छूट मिलेगी। 

पुस्तक मेले के सहयोगी संस्थान यूपी मेट्रो, रेडियोसिटी, ओरिजिंस, किरण फाउंडेशन, ज्वाइन हैंड्स फाउंडेशन, लोकआंगन, विश्वम् फाउंडेशन्स, विजय स्टूडियो, गोल्डेन ग्रास और कविता किस्से कहानियां हैं।