Sunday , September 27 2026

गोमती का जलस्तर बढ़ने से फैजुल्लागंज जलमग्न, विधायक डा. नीरज बोरा ने लिया जायजा

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। पिछले दो दिनों से हो रही लगातार बारिश के चलते गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से फैजुल्लागंज के दाऊदनगर, नई बस्ती, मामा कॉलोनी सहित नदी से सटे क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। रविवार को लखनऊ उत्तर के विधायक डॉ. नीरज बोरा ने प्रशासनिक अधिकारियों एवं एसडीआरएफ की टीम के साथ प्रभावित क्षेत्रों का मौके पर पहुंचकर जायजा लिया और राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की।

इस दौरान नगर आयुक्त गौरव कुमार, एसडीएम सदर साहिल कुमार, अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्ता, अधिशासी अभियंता नजमी मुजफ्फर सहित एसडीआरएफ की टीम मौजूद रही। अधिकारियों ने क्षेत्र में जलभराव की स्थिति तथा जलनिकासी एवं राहत-बचाव के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी विधायक को दी।

विधायक डॉ. नीरज बोरा ने प्रभावित परिवारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, भोजन एवं ठहरने की व्यवस्था करने तथा स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा। जलभराव की समस्या के त्वरित समाधान के लिए आवश्यक पंप एवं अन्य संसाधन तत्काल लगाने पर भी जोर दिया गया।

विधायक डॉ. नीरज बोरा ने कहा कि जनसुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। जलभराव प्रभावित नागरिकों को राहत पहुंचाने के लिए प्रशासन, नगर निगम और एसडीआरएफ की टीम के साथ समन्वय बनाकर आवश्यक सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

ज़ोनल अधिकारी अजीत राय ने बताया कि जलभराव से प्रभावित लोगों के लिए बचाव हेतु तीन स्थानों पर रैन बसेरों में व्यवस्था की जा रही है। इनमें इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहा, पलटन छावनी और उमराव हाता एवं दाउदनगर के ट्रांजिट हॉस्टल शामिल हैं। इसके अलावा हाल ही में बनाए गए पक्के नाले पर भी अस्थायी रैन बसेरा बनाए जाने की कवायद की जा रही है। ताकि आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया जा सके।

उन्होंने बताया कि जलभराव प्रभावित क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट लगाने का कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराया जा रहा है। इसके साथ ही कीटनाशक दवाओं का छिड़काव और मच्छरों से बचाव के लिए फॉगिंग भी कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि ओवरब्रिज के निकट पंप लगाकर जलभराव के पानी की निकासी की जा रही है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में जलस्तर को कम किया जा सके।