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यूपी में डीरेगुलेशन 2.0 तेज, मंजूरियों में तेजी और अनुपालन बोझ घटाने पर जोर

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। उत्तर प्रदेश ने डीरेगुलेशन 2.0 के तहत सुधारों की प्रक्रिया तेज कर दी है। इन्वेस्ट यूपी में केंद्र सरकार के उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान व्यवसायों और नागरिकों के लिए अनुपालन संबंधी बोझ कम करने, नियमों को सरल बनाने और मंजूरी प्रक्रियाओं में तेजी लाने के लिए प्राथमिक सुधारों की पहचान की गई।

भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय के विशेष सचिव के.के. पाठक की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में कैबिनेट सचिवालय के अतिरिक्त सचिव राहुल शर्मा के साथ केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में खाद्य व्यवसायों के लिए एफएसएसएआई लाइसेंसिंग, श्रम कानूनों में सुधार, जीएसटी प्रक्रियाएं, फायर लाइसेंसिंग, नेशनल बिल्डिंग कोड स्टैंडर्ड्स 2026 के अनुरूप अग्नि सुरक्षा मानक, यूपीबीबीएल के तहत भवन स्वीकृति, एमएसएमई सहायता तथा यूपीपीसीएल के बिजली कनेक्शन संबंधी प्रक्रियाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।

उत्तर प्रदेश ने अनुपालन में कमी और नियामकीय सुधारों के पहले चरण में मंजूरी संबंधी बाधाओं को दूर करने और प्रक्रियाओं को सरल बनाने के मामले में सभी राज्यों में पहला स्थान हासिल किया था। डीरेगुलेशन 2.0 इसी सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

के.के. पाठक ने कहा कि नियमों का उद्देश्य पूरा होना चाहिए, लेकिन वे अनावश्यक बाधाएं नहीं बनने चाहिए। अग्नि सुरक्षा के संदर्भ में उन्होंने कहा कि प्राथमिक लक्ष्य लोगों के जीवन की सुरक्षा होना चाहिए, न कि अनुपालन को केवल अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया तक सीमित रखना चाहिए।

बैठक में नगर नियोजन और आवास संबंधी नियमों को और सरल बनाने, एफएआर में अधिक लचीलापन देने तथा नए विद्यालयों की स्थापना को सुगम बनाने के लिए नियामकीय प्रावधानों की समीक्षा पर भी चर्चा हुई। राजस्व से संबंधित कुछ प्रक्रियाओं में सरलीकरण और शिथिलीकरण के सुझावों पर भी विचार किया गया।

बैठक में इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विजय किरण आनंद, माध्यमिक शिक्षा विभाग की सचिव किंजल सिंह, राजस्व विभाग की सचिव दिव्या मित्तल, इन्वेस्ट यूपी की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रेरणा शर्मा तथा संबंधित विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

अनुपालन बोझ कम करने और मंजूरी प्रक्रियाओं को तेज करने की यह पहल उत्तर प्रदेश के निवेश और उद्यमिता वातावरण को और मजबूत कर सकती है। इससे उद्योग, एमएसएमई, शिक्षा, आवास और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में परियोजनाओं के क्रियान्वयन को गति मिलने तथा निवेशकों और नागरिकों के लिए प्रक्रियाएं अधिक सरल होने की उम्मीद है।

डीरेगुलेशन और प्रक्रियागत सुधारों पर केंद्रित यह प्रयास उत्तर प्रदेश के व्यापक विकास एजेंडे से जुड़ा है। राज्य निवेश, औद्योगिक विस्तार और रोजगार सृजन के साथ प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनाकर विकास की अपनी रफ्तार को आगे बढ़ा रहा है।