लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। देश की प्रमुख कंज्यूमर फाइनेंस कंपनी होम क्रेडिट इंडिया ने अपनी सालाना रिपोर्ट द ग्रेट इंडियन वॉलेट 2026 का चौथा संस्करण जारी किया, जिसकी थीम है, कर राहत से लेकर प्रत्यक्ष बदलावों तक, कैसे बदल रहा है भारत का जेब खर्च। जीआईडब्ल्यू 4.0 स्टडी में यह साफ दिखा है कि लोगों की सोच में एक बड़ा बदलाव आया है, जिसकी वजह है कर्ज तक ज्यादा पहुंच और जीएसटी सुधारों के बाद मिली आर्थिक राहत। इन दोनों वजहों से रोजमर्रा के घरेलू खर्च का बोझ कुछ कम हुआ है, लोगों का आर्थिक भरोसा मजबूत हुआ है, और अपना घर खरीदना अब भी लोगों का सबसे बड़ा लंबी अवधि का आर्थिक लक्ष्य बना हुआ है।
होम क्रेडिट इंडिया के चीफ मार्केटिंग एंड पीपल ऑफिसर आशीष तिवारी ने कहा, “जब हमने 2023 में ‘द ग्रेट इंडियन वॉलेट स्टडी’ शुरू की थी, तब हम भारत की आर्थिक सोच को समझना चाहते थे। हमने पाया कि यह एक ऐसा देश है जो मकसद के साथ चलता है और वित्तीय मामलों में अत्यंत विवेकशील है। इस साल के निष्कर्ष अत्यंत उल्लेखनीय एवं महत्वपूर्ण रुझान दर्शाते हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद, जीएसटी के बाद कीमतों में हुए बदलाव से मिली असली राहत, और साथ में सुव्यवस्थित वित्तीय साधनों का उपयोग, लोगों के लिए संपत्ति निर्माण एवं व्यावसायिक विस्तार का मार्ग आसान बना रहा है।”
होम क्रेडिट इंडिया की द ग्रेट इंडियन वॉलेट स्टडी 2026 के अनुसार, लखनऊ भारत के सबसे अधिक वित्तीय रूप से आशावादी शहरों में से एक बनकर उभरा है। यह शहर बढ़ती वित्तीय धारणा, मजबूत घरेलू बचत और भविष्य के वित्तीय कल्याण के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है। लखनऊ वित्तीय आशावादिता के मामले में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले शहरों में शामिल है। जहाँ घरेलू खर्चों में 70 प्रतिशत का योगदान देने के बावजूद 56 प्रतिशत उत्तरदाता अपने मासिक खर्चों को पूरा करने के बाद बचत करने में सक्षम हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5 प्रतिशत अंक की वृद्धि दिखाता है।
अध्ययन इस बात पर प्रकाश डालता है कि लखनऊ में उत्तरदाता 19,000 रुपये के मासिक खर्च के मुकाबले 29,000 रुपये की औसत मासिक घरेलू आय दर्ज करते हैं। पिछले वर्ष की तुलना में, शहर ने आय में 6 अंकों की वृद्धि, बचत में 17 अंकों की बढ़त और निवेश में 21 अंकों की वृद्धि दर्ज की है। जो बेहतर वित्तीय क्षमता और दीर्घकालिक वित्तीय योजना पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का संकेत देती है। उल्लेखनीय रूप से, 58% उत्तरदाताओं ने कहा कि अप्रत्याशित खर्चों को संभालना अब आसान हो गया है, जो शहर की मजबूत होती वित्तीय स्थिति को बल देता है।
घरेलू खर्च मुख्य रूप से खाद्यान्न व ग्रॉसरी (30 प्रतिशत वॉलेट शेयर) के नेतृत्व में है। इसके बाद परिवहन (16 प्रतिशत), किराया (16 प्रतिशत), बच्चों की पढ़ाई (13 प्रतिशत), मेडिकल खर्च (11 प्रतिशत), बिजली-पानी जैसे बिल (7 प्रतिशत), रसोई गैस (4 प्रतिशत) और मोबाइल बिल (2 प्रतिशत) का स्थान है।
अपनी मर्जी से किए जाने वाले खर्च में, फैशन और कपड़े (39 प्रतिशत) पसंदीदा श्रेणी बनी हुई है। इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक उपकरण (12 प्रतिशत), यात्रा (11 प्रतिशत), घरेलू उपकरण (11 प्रतिशत) और होम डेकोर (5 प्रतिशत) आते हैं। भविष्य की बात करें तो, उपभोक्ताओं की प्रमुख वित्तीय आकांक्षाओं में व्यवसाय शुरू करना (27 प्रतिशत) शामिल है, इसके ठीक बाद घर खरीदना (25 प्रतिशत), बच्चों की पढ़ाई के लिए बचत करना (15 प्रतिशत), पूर्व ऋणों का भुगतान (15 प्रतिशत), और कार खरीदना (6 प्रतिशत) है।
इन सपनों को करने के लिए, लोग आकर्षक ब्याज दरों और लचीली पुनर्भुगतान अवधि (32 प्रतिशत) पर ऋण/क्रेडिट तक पहुँच को सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय साधन मानते हैं, इसके बाद जीवन बीमा (12%), स्वास्थ्य बीमा (9 प्रतिशत), फिक्स्ड डिपॉजिट (8 प्रतिशत), म्यूचुअल फंड/एसआईपी (7%), और सोने में निवेश (5%) का स्थान है।
लखनऊ जीएसटी से जुड़े बदलावों के प्रति भी अपेक्षाकृत मजबूत जागरूकता प्रदर्शित करता है। 79% लोगों का कहना है कि जीएसटी-संबंधी बदलावों ने परिवार के कल्याण पर होने वाले खर्च में सुधार किया है। लगभग 30% और 31% उत्तरदाताओं ने क्रमशः कारों और दोपहिया वाहनों की कीमतों में कमी दर्ज की है।
जीएसटी 2.0 के बाद, उपभोक्ता भोजन की गुणवत्ता (16%) और स्वास्थ्य देखभाल (6%) पर खर्च बढ़ा रहे हैं, जो घरेलू जीवन स्तर में सुधार की ओर एक क्रमिक बदलाव को दर्शाता है। द ग्रेट इंडियन वॉलेट 4.0 स्टडी 18 से 55 साल की उम्र के कर्जदारों के बीच की गई, जो भारत के 17 बड़े शहरों और अलग-अलग आमदनी वर्ग व पेशों से जुड़े थे।
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