लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। बिज़नेस मैनेजमेंट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका और संगठन के मुख्य कार्यों में इसके बढ़ते प्रभाव को देखते हुए, जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट ने अपने लखनऊ परिसर में ‘बिज़नेस मैनेजमेंट कॉन्क्लेव 2026’ का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में उद्योग जगत के लीडरों अकादमिकज्ञों, फैकल्टी के सदस्यों एवं छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
‘’द एआई इम्परेटिव- बिल्डिंग फ्यूचर-रैडी ऑर्गेनाइज़ेशन्स’’ विषय पर आधारित सम्मेलन में इस बात पर चर्चा की गई कि किस तरह एआई बिज़नेस के सभी मुख्य कामों जैसे मार्केटिंग, फाइनेंस, ह्यूमन रिसोर्स, ऑपरेशन्स और बिज़नेस एनालिटिक्स आदि में शामिल हो रहा है। साथ ही कस्टमर एनालिटिक्स, पर्सनलाइज़्ड एंगेजमेंट, एआई-असिस्टेड रिक्रूटमेंट, फाइनेंशियल फोरकास्टिंग, रिस्क मैनेजमेंट, प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस, डिमांड फोरकास्टिंग और डेटा-आधारित निर्णय लेने जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। एआई को ज़िम्मेदार तरीके से अपनाने, संगठन की संस्कृति, नैतिकता, प्रशासन और पॉलिसी पर भी चर्चा हुई। क्योंकि आज के दौर में संगठन अपने बिज़नेस के कामों में एआई को तेज़ी से शामिल कर रहे हैं।
उद्घाटन सत्र में जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट, लखनऊ की डायरेक्टर डॉ. सुषमा विश्नानी, अतिथि एवं जियोब्लैकरॉक म्यूचुअल फंड के हेड ऑफ़ प्रोडक्ट्स बिराजा प्रसाद त्रिपाठी और मुख्य अतिथि एवं पीडब्ल्यूसी इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर – जीसीसी डॉ. योगेश शेटे उपस्थित रहे। सत्र के दौरान जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट के डीन एकेडमिक्स डॉ. हेमेंद्र गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट, लखनऊ की डायरेक्टर डॉ. सुषमा विश्नानी ने कहा, ‘बिज़नेस का भविष्य उन संस्थाओं से तय होगा जो इंसानी समझ के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की बदलावकारी क्षमता का भी सदुपयोग करती हैं। जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट, लखनऊ में हमारा मानना है कि भविष्य के मैनेजर तैयार करने के लिए सिर्फ़ टेक्नोलॉजी की जानकारी काफ़ी नहीं है। इसके लिए रणनीतिक सोच, नैतिक नेतृत्व और एआई का सही तरीके से इस्तेमाल करने की क्षमता भी ज़रूरी होती है। बिज़नेस मैनेजमेंट कॉन्क्लेव का उद्देश्य छात्रों, फैकल्टी और उद्योग जगत के लीडर्स को एक मंच पर लाना और इस विज़न को साकार रूप देना है।‘
AI के साथ काम करने की क्षमता ही भविष्य की सफलता की कुंजी : डॉ. योगेश शेटे
मुख्य अतिथि पीडब्ल्यूसी इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर-जीसीसी डॉ. योगेश शेटे ने कहा कि आने वाले समय में सफलता केवल एआई के इस्तेमाल से नहीं, बल्कि उसे प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने की क्षमता से तय होगी। उन्होंने कहा कि एआई को लेकर यह सोचने के बजाय कि यह इंसानों की जगह ले लेगा, यह समझना जरूरी है कि जो लोग एआई का बेहतर उपयोग करना जानते हैं, वे उन लोगों से आगे निकलेंगे जो इसका इस्तेमाल नहीं करते।

उन्होंने ‘फ्रीस्टाइल चेस’ का उदाहरण देते हुए कहा कि इसमें इंसान और मशीन मिलकर दूसरे इंसान और मशीन के खिलाफ खेलते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि श्रेष्ठ परिणाम केवल सबसे बुद्धिमान इंसान या सबसे शक्तिशाली मशीन से नहीं, बल्कि इंसान और मशीन की प्रभावी साझेदारी से हासिल किए जा सकते हैं। प्रबंधन के विद्यार्थियों के लिए इसका संदेश है कि औसत क्षमता रखने वाला व्यक्ति भी सही तकनीक का इस्तेमाल कर असाधारण परिणाम हासिल कर सकता है।
डॉ. शेटे ने कोडक और डिजिटल कैमरे का उदाहरण देते हुए कहा कि तकनीकी बदलाव को समय रहते समझना और उसके अनुरूप स्वयं को बदलना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि केवल वर्तमान व्यवसाय मॉडल की सफलता पर निर्भर रहना भविष्य की चुनौतियों के सामने संगठन को कमजोर कर सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि एआई से प्राप्त जानकारी को सीधे समाधान मानने के बजाय उसके पीछे मौजूद कारोबारी समस्या को समझना और अपने स्वतंत्र विचार एवं अंतर्दृष्टि का इस्तेमाल करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि एआई का उद्देश्य केवल किसी व्यक्ति को अधिक बुद्धिमान दिखाना नहीं, बल्कि वास्तविक व्यावसायिक मूल्य पैदा करना होना चाहिए।
डॉ. शेटे ने कहा कि आज की पीढ़ी इतिहास की सबसे विशेष पीढ़ियों में से एक है, क्योंकि वह नौकरी की शुरुआत से ही मशीनों और एआई के साथ काम करेगी। भविष्य में कर्मचारियों को ऐसे एआई सिस्टम के साथ काम करना होगा, जिनकी कार्यक्षमता का मूल्यांकन और प्रबंधन भी उन्हें ही करना होगा। इसलिए एआई को प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि सहयोगी के रूप में समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हर पीढ़ी के सामने अलग-अलग चुनौतियां रही हैं। आज की पीढ़ी की सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह मशीन की क्षमताओं का प्रभावी इस्तेमाल करते हुए मानवीय सोच, रचनात्मकता और निर्णय क्षमता को कैसे बनाए रखे। यही क्षमता भविष्य के संगठनों और नेतृत्व को नई दिशा देगी।
सम्मेलन के दौरान लोगों, ग्राहकों, आर्थिक फ़ैसलों और उद्यमों के संचालन पर एआई के प्रभाव का मूल्यांकन भी किया गया। अमोघ मेहरोत्रा (वाईस प्रेज़ीडेन्ट- मर्जर एंड एक्विज़िशन, जेपी मोर्गन चेस), करण राना, (जैन एआई मार्केटिंग लीड, स्विगी), हर्ष वर्धन (चीफ़ डिजिटल ट्रांसफोर्मेशन लीडर, अपोलो टायर्स), वीरा रेड्डी (चीफ़ पीपल ऑफिसर, एकियन लैब्स), विवेक श्रीवास्तव (मैनेजिंग डायरेक्टर- बिज़नेस ट्रांसफोर्मेशन, पीडब्ल्यूसी इंडिया), विवेक सौंदरापांडियन (डायरेक्टर, बीआई एंड विज़ुअलाइज़ेशन, लेटेंट व्यू एनालिटिक्स) और योगेश वर्मा (डायरेक्टर- जनरेटिव एआई, नोवारटिस) ने फाइनेंशियल सर्विस, मार्केटिंग, पीपल मैनेजमेंट, बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन और एनालिटिक्स के क्षेत्रों से अपने विचार साझा किए।
क्लाउड काउंसलेज प्राइवेट लिमिटेड की सह-संस्थापक एवं सीएचआरओ सुभी शिल्धंकर के नेतृत्व में “लेवरेजिंग एआई फॉर बिज़नेस सक्सेस” विषय पर एक विशेषज्ञ सत्र का आयोजन किया गया। जहां आज के दौर में बिज़नेस की चुनौतियों से निपटने के लिए एआई के इस्तेमाल पर उद्योग जगत का दृष्टिकोण पेश किया गया। साथ ही एआई के अडॉप्शन को भावी मैनेजरों एवं बिज़नेस लीडरों की ज़रूरतों से भी जोड़ा गया। जिसमें एआई को ज़िम्मेदारी से अपनाना, संगठन की संस्कृतिक, नैतिकता, प्रशासन एवं पॉलिसी जैसे विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया।
कार्यक्रम के दौरान छात्रों के लिए क्विज़, इंस्टा रील प्रतियोगिता और पोस्टर प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता आयोजि की गईं और साथ ही विजेताओं की घोषणा भी हुई। कार्यक्रम के अंत में हुए नेटवर्किंग सत्र में प्रवक्तओं, उद्योग जगत के लीडरों, फैकल्टी के सदस्यों, पूर्व छात्रों और मौजूदा छात्रों ने हिस्सा लिया। इसके बाद जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नीलेश कुमार तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।
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