बहराइच (शम्भू शरण वर्मा/टेलीस्कोप टुडे)। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में बिजली की अनियमित आपूर्ति छोटे कारोबारियों के लिए लंबे समय से बड़ी चुनौती रही है। बार-बार बिजली कटौती, लो वोल्टेज और अचानक बिजली गुल होने से जहां मशीनों का संचालन प्रभावित होता है, वहीं ग्राहकों को भी इंतजार करना पड़ता है। लेकिन टाटा पॉवर की सराहनीय पहल से बहराइच के ग्रामीण कारोबार अब सौर ऊर्जा की रोशनी में रफ्तार पकड़ रहे हैं। नियमित बिजली आपूर्ति मिलने से कारोबारियों को राहत मिल रही है।
जैतापुर बाजार और सोनारी चौराहा में सोलर माइक्रोग्रिड व बायोगैस आधारित ऊर्जा समाधानों ने न केवल घरों को रोशन किया है, बल्कि आइसक्रीम फैक्ट्री, आटा चक्की, फर्नीचर और मेटल कारोबार जैसे छोटे उद्यमों को भी भरोसेमंद बिजली देकर आत्मनिर्भरता की नई राह दिखाई है।

टाटा पावर कंपनी लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी टीपी रिन्यूएबल माइक्रोग्रिड (TPRMG) की ओर से संचालित इस पहल के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में भरोसेमंद और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इससे ग्रामीण उद्यमियों को बिजली संकट से राहत मिलने के साथ अपने व्यवसाय को अधिक समय तक और बेहतर तरीके से संचालित करने का अवसर मिल रहा है।
सोनारी चौराहा बाजार में आटा चक्की और फर्नीचर कारोबार से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि बिजली की बेहतर उपलब्धता से कामकाज में आसानी के साथ समय और लागत दोनों की बचत हो रही है।
सोनारी चौराहा बाजार में सुजीत आटा चक्की के संचालक सुजीत कुमार ने बताया कि उनकी आटा चक्की पिछले करीब तीन वर्षों से टाटा पावर की बिजली से संचालित हो रही है। उन्होंने बताया कि चक्की चलाने में हर महीने करीब 10 से 12 हजार रुपये का बिजली खर्च आता है, लेकिन नियमित बिजली आपूर्ति का सीधा फायदा कारोबार को मिल रहा है।

सुजीत कुमार के मुताबिक, सरकारी बिजली कनेक्शन के दौरान सबसे बड़ी समस्या नियमित आपूर्ति की थी। बिजली न मिलने पर ग्राहक वापस लौट जाते थे और दोबारा आने में रुचि नहीं लेते थे। अब नियमित बिजली मिलने से चक्की सुचारु रूप से चलती है। इससे न केवल ग्राहक संतुष्ट हैं, बल्कि कारोबार में भी सुधार हुआ है।
उन्होंने बताया कि नियमित बिजली आपूर्ति के कारण लो वोल्टेज की समस्या भी नहीं रहती। बिजली जाने की चिंता न होने से मशीनें लगातार चलती हैं और काम समय पर पूरा हो जाता है। इसका लाभ ग्राहकों को भी दिया जा रहा है। आटा चक्की पर गेहूं की पिसाई के लिए महज 1.50 रुपये प्रति किलो शुल्क लिया जाता है। सरसों की पेराई के दौरान ग्राहक यदि खली छोड़ देता है तो उससे कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता, जबकि खली वापस ले जाने पर करीब सात रुपये प्रति किलो की दर से शुल्क लिया जाता है।
जनरेटर का खर्च बचा, कारोबार में बढ़ी बचत
सोनारी चौराहे पर स्थित शुऐब फर्नीचर के संचालक शुऐब खान ने बताया कि वह करीब छह वर्षों से टाटा पावर की बिजली का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे पहले उन्हें फर्नीचर की मशीनें चलाने के लिए जनरेटर पर निर्भर रहना पड़ता था। जनरेटर के डीजल के साथ-साथ उसकी सर्विसिंग का खर्च भी अलग से आता था।

उन्होंने बताया कि शुरुआत में छोटे कनेक्शन से काम शुरू किया गया। बाद में जरूरत बढ़ने पर दो किलोवाट का कनेक्शन लिया गया, जिससे फर्नीचर की मशीनें नियमित रूप से चलने लगीं। इसके बाद जनरेटर की जरूरत पूरी तरह खत्म हो गई। शुऐब खान के मुताबिक, जनरेटर चलाने में डीजल पर करीब छह हजार रुपये प्रतिमाह तक खर्च हो जाता था। इसके अलावा सर्विसिंग का खर्च भी आता था। बिजली कनेक्शन लेने के बाद यह खर्च काफी कम हो गया और कारोबार में करीब 50 प्रतिशत तक बचत होने लगी।
उन्होंने बताया कि पहले किसी ग्राहक का काम आने पर जनरेटर चालू करने में समय लगता था। मशीन चलाने के लिए पहले जनरेटर स्टार्ट करना पड़ता था, जिससे काम में देरी होती थी। अब बिजली उपलब्ध रहने से मशीनें जरूरत के अनुसार तत्काल चलाई जा सकती हैं। इससे समय की बचत होने के साथ कर्मचारियों के लिए भी काम करना आसान हुआ है।
शुऐब खान ने बताया कि नियमित बिजली आपूर्ति का असर केवल उनके कारोबार तक सीमित नहीं है। सोनारी चौराहे से लेकर आसपास के बाजार क्षेत्र में कई छोटे कारखाने और दुकानें बिजली पर निर्भर हैं। उनके अनुसार, यहां करीब सात से अधिक लोग कारपेंटरी और फर्नीचर से जुड़े काम कर रहे हैं और कई कारोबारियों ने बिजली की नियमित आपूर्ति के लिए इसी तरह के कनेक्शन का विकल्प अपनाया है।
घटा बिजली खर्च, जैतापुर के छोटे उद्यमों को भी मिल रही राहत
बिजली की बढ़ती लागत और बार-बार होने वाली कटौती से परेशान ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे कारोबारियों के लिए सौर ऊर्जा राहत का नया माध्यम बन रही है। जिले के जैतापुर बाजार में आइसक्रीम फैक्ट्री और मेटल स्टोर संचालित करने वाले कारोबारियों का कहना है कि सौर ऊर्जा आधारित बिजली व्यवस्था अपनाने के बाद उनके खर्च में उल्लेखनीय कमी आई है। इससे न केवल कारोबार चलाना आसान हुआ है, बल्कि बचत भी बढ़ी है।

जैतापुर बाजार में करीब सात वर्षों से खुशबू आइसक्रीम फैक्ट्री संचालित कर रहे पुत्तन ने बताया कि पहले फैक्ट्री के संचालन में बिजली का खर्च काफी अधिक आता था। रोजाना करीब 1,500 रुपये तक का खर्च बिजली पर हो जाता था। करीब तीन वर्षों से वह टाटा पावर की सौर ऊर्जा व्यवस्था का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके बाद बिजली से जुड़ा दैनिक खर्च घटकर करीब 600 रुपये रह गया है। इससे कारोबार में बचत बढ़ी है और फैक्ट्री के संचालन में भी सुविधा हुई है।
पुत्तन के मुताबिक, कम बिजली खर्च होने से कारोबार को आगे बढ़ाने की संभावना भी बढ़ी है। उन्होंने बताया कि फैक्ट्री में फिलहाल करीब चार लोग काम करते हैं और मांग बढ़ने के साथ कारोबार का विस्तार करने की योजना है। सौर ऊर्जा व्यवस्था ने छोटे स्तर के इस व्यवसाय को लगातार चलाने में मदद की है।

इसी तरह जैतापुर बाजार में पंकज मेटल स्टोर के संचालक पंकज कुमार भी सौर ऊर्जा को कारोबार के लिए फायदेमंद मानते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी दुकान करीब 16-17 वर्षों से संचालित हो रही है। पिछले छह-सात वर्षों से वह टाटा सोलर पैनल का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका कहना है कि पहले बिजली का खर्च करीब 1,200 रुपये तक आता था, जबकि अब यह खर्च घटकर लगभग 500 से 600 रुपये के आसपास रह गया है।
पंकज कुमार ने बताया कि सौर ऊर्जा अपनाने से बिजली के खर्च में कमी आई है और कारोबार में इसका सीधा लाभ दिखाई देता है। बिजली कटौती के दौरान भी सोलर व्यवस्था से कामकाज प्रभावित नहीं होता। उन्होंने आसपास के अन्य दुकानदारों को भी सौर पैनल अपनाने के लिए प्रेरित करने की बात कही।
ग्रामीण बाजारों में छोटे कारोबारियों के लिए बिजली की उपलब्धता और उसकी लागत हमेशा बड़ी चुनौती रही है। ऐसे में सौर ऊर्जा आधारित समाधान न केवल बिजली खर्च कम करने में मदद कर रहे हैं, बल्कि आइसक्रीम फैक्ट्री, मेटल स्टोर, आटा चक्की, फर्नीचर और अन्य छोटे व्यवसायों को निर्बाध रूप से संचालित करने का विकल्प भी दे रहे हैं।
जैतापुर बाजार और सोनारी चौराहा बाजार के कारोबारियों के अनुभव बताते हैं कि नियमित और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति से छोटे उद्यमों की उत्पादकता बढ़ने के साथ संचालन लागत में भी कमी आ सकती है। इसका सीधा असर कारोबारियों की बचत और ग्राहकों को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ रहा है।
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