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ग़ज़ल, गीत और कविता से गुलजार हुई ‘दावत-ए-सुख़न’

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। किसी शायर ने कभी हर किसी की कहानी को जोड़ने वाली ये पंक्तियां ऐसी ही किसी महफ़िल के लिए कही होंगी। अदब वह रोशनी है, जो पीढ़ियों को जोड़ती है और समाज को संवेदनशील बनाती है। इसी ख़याल को ज़हन में रखते हुए गोल्डन ब्लॉसम इम्पीरियल रिसॉर्ट्स में आयोजित ‘दावत ए सुख़न’ में देश के जाने माने शायरों, कवियों और साहित्य प्रेमियों ने एक मंच पर जुटकर अदब और संस्कृति का बेजोड़ उदाहरण पेश किया।

कार्यक्रम में वरिष्ठ शायरों और कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को देर तक बांधे रखा। हास्य, व्यंग्य, ग़ज़ल, गीत और कविताओं के रंगों से सजी इस महफिल में साहित्य प्रेमियों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। कार्यक्रम ने न केवल कविता और शायरी की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने का काम किया, बल्कि समाज में आपसी मेलजोल, भाईचारे और सांस्कृतिक मूल्यों को भी मजबूत करने का संदेश दिया।

इस अवसर पर आयोजित मुशायरे और कवि सम्मेलन में नदीम फर्रूख़, हसन काज़मी, वासिफ फ़ारूक़ी, शबीना अदीब, सर्वेश अस्थाना, जौहर कानपुरी, प्रियांशु गजेंद्र, हेमंत पांडे, शंभू शिखर, सोनरूपा, राम प्रसाद बेखुद और फ़ैज़ ख़ुमार सहित कई प्रतिष्ठित रचनाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं की खूब सराहना बटोरी।

आयोजक ‘दावत ए सुख़न’ व गोल्डन ब्लॉसम के हेड सेल्स एंड मार्केटिंग, शादाब वारसी ने कहा, “दावत ए सुख़न केवल एक साहित्यिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी साझा सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का एक प्रयास है। हमारा उद्देश्य ऐसा मंच तैयार करना है, जहां शायरी, कविता और अदब के माध्यम से अलग अलग पीढ़ियां एक साथ जुड़ें। हमें खुशी है कि इस आयोजन को साहित्य प्रेमियों का भरपूर स्नेह मिला। आगे भी हम ऐसे आयोजन करते रहेंगे, जो लखनऊ की गंगा जमुनी तहजीब और साहित्यिक परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम करें।”