मुंबई (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। कुछ लोगों के लिए मानसून गरम चाय और परिवार के साथ बिताए पलों की यादें लेकर आता है, तो कुछ के लिए यह स्कूल की छुट्टियों, हरी-भरी वादियों या बस मौसम का आनंद लेने का समय होता है। लेकिन, मुंबई आने के बाद कई कलाकारों को इस मौसम का एक बिल्कुल अलग रूप देखने को मिलता है, जो मज़बूती, तेज़ रफ्तार वाले शहर की ज़िंदगी और कभी न रुकने वाली स्पिरिट से जुड़ा है। इस मानसून में सोनी सब के कलाकार इक़बाल खान, देविश आहूजा, ख्याति व्यास, मुस्कान बामने और मनीष वाधवा ने मुंबई की बारिश और अपने होमटाउन की बारिश के अनुभव साझा किए और बताया कि मानसून उनके दिल में क्यों खास जगह रखता है।
इक़बाल खान (जो ‘यादें’ में डॉ. देव मेहता का किरदार निभा रहे हैं( ने साझा किया, “मैं कश्मीर में बड़ा हुआ हूँ और वहाँ का मानसून मुंबई से बिल्कुल अलग है। घर पर बारिश हल्की और लगभग शायराना लगती है, पहाड़ और भी खूबसूरत दिखते हैं और मौसम सुहाना हो जाता है। दूसरी ओर, मुंबई की बारिश का अपना ही व्यक्तित्व है- नाटकीय, अनिश्चित और फिर भी शहर कभी रुकता नहीं है। मुझे दोनों अलग-अलग वजहों से पसंद हैं, लेकिन मुंबई का मानसून मुझे अराजकता को अपनाना सिखाता है, जबकि कश्मीर हमेशा मेरे लिए सुकून देने वाली जगह रहेगा।”
देविश आहूजा (जो यादें में डॉ. रौनक भाटिया का किरदार निभा रहे हैं) ने साझा किया, “मैं लगभग 15 या 16 साल की उम्र में मुंबई आया, इसलिए उससे पहले की मेरी मानसून की यादें बिल्कुल अलग हैं। सूरत में सबसे बड़ी खुशी यही होती थी कि भारी बारिश का मतलब अक्सर स्कूल की छुट्टी होता था। हम बालकनी में बैठकर चाय, गरम पकौड़े और दादी के स्वादिष्ट पराठे खाते हुए मौसम का आनंद लेते थे। मुंबई ने यह नज़रिया पूरी तरह बदल दिया। यहाँ चाहे जितनी भी बारिश हो, ज़िंदगी चलती रहती है। मुझे अब भी याद है कि कॉलेज में वॉटरलॉगिंग की वजह से फँस गया था, लेकिन सबने किसी न किसी तरह आगे बढ़ने का रास्ता ढूँढ लिया। यही इस शहर की सबसे बड़ी खूबी है, यह सिखाता है कि बारिश हो या धूप, चलते रहो।”
मुस्कान बामने (जो पुष्पा इम्पॉसिबल में शनाया का किरदार निभा रही हैं) ने साझा किया, “मैं इटारसी में बड़ी हुई हूँ, जहाँ मानसून का मतलब होता था परिवार के साथ बाहर निकलकर बारिश का आनंद लेना, भीगी मिट्टी की खुशबू और घर पर गरम स्नैक्स से भरी शामें। मुंबई आने के बाद मुझे एहसास हुआ कि यहाँ बारिश का अपना अलग ही रिद्म है। आप जल्दी ही सीख जाते हैं कि हर जगह छाता लेकर चलना है और अपने दिन की योजना मौसम के हिसाब से बनानी है। भले ही कभी-कभी मुझे अपने होमटाउन की धीमी और आरामदायक बारिश की याद आती है, लेकिन मुंबई को बारिश के बावजूद चलते हुए देखना अपने आप में जादुई है। दोनों जगहों ने मुझे अपनी-अपनी तरह से खूबसूरत यादें दी हैं।”
मनीष वाधवा (जो हस्तिनापुर के वीर में भीष्म पितामह का किरदार निभा रहे हैं) ने साझा किया, “मैं अंबाला, हरियाणा में बड़ा हुआ हूँ, जहाँ मानसून हमेशा सुकून और ताज़गी लेकर आता था। पहली बारिश से मौसम ठंडा हो जाता था, मिट्टी की खुशबू हवा में फैल जाती थी और यह परिवार के साथ गरम चाय और पकौड़े खाने का परफेक्ट बहाना होता था। वे यादें हमेशा मेरे दिल में रहेंगी। मुंबई का मानसून, हालाँकि, बिल्कुल अलग है। यहाँ बारिश कहीं ज़्यादा तेज़ होती है और हर साल मुझे यह देखकर हैरानी होती है कि शहर उसी जज़्बे के साथ चलता रहता है। मुंबई की बारिश में चाय और कांदा भजिया खाने का मज़ा ही अलग है। व्यक्तिगत रूप से, मुझे अंबाला की बारिश की शांति पसंद है, लेकिन इतने साल मुंबई में बिताने के बाद मैंने इस शहर की बारिश की मज़बूती और स्पिरिट को सराहना सीख लिया है।”
ख्याति व्यास (जो यादें में डॉ. अनन्या का किरदार निभा रही हैं) ने साझा किया, “मैंने अपनी ज़िंदगी अपने पिता की सरकारी नौकरी की वजह से एक शहर से दूसरे शहर में घूमते हुए बिताई है, इसलिए मैंने अलग-अलग तरीकों से मानसून का अनुभव किया है। असम में भारी बारिश और नमी होती थी, जो मुंबई से बहुत मिलती-जुलती है। गुजरात की बारिश कहीं ज़्यादा हल्की होती थी, जबकि राजस्थान में तो मुश्किल से बारिश होती थी। हर जगह की अपनी खूबसूरती होती है और मुझे लगता है कि यही मैंने सालों में सीखा है कि जहाँ भी रहो, उसकी कद्र करो। इस समय मुझे मुंबई का मानसून सचमुच अच्छा लगता है और जब मैं अपने होमटाउन जोधपुर जाती हूँ, तो वहाँ की बारिश भी उतनी ही प्यारी लगती है, क्योंकि हर जगह का अपना अलग आकर्षण होता है।”
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