लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (ईडीआईआई), अहमदाबाद की ओर से सेज पब्लिकेशन्स द्वारा प्रकाशित पीयर-रिव्यूड जर्नल ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप (जेओई) एक प्रतिष्ठित त्रैमासिक शोध पत्रिका है। जर्नल ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान स्थापित की है और उद्यमिता अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय शैक्षणिक प्रभाव कायम रखा है।
ईडीआईआई के महानिदेशक डॉ. सुनील शुक्ला के संपादन में प्रकाशित यह शोध पत्रिका स्कोपस, वेब ऑफ साइंस के इमर्जिंग सोर्सेज सिटेशन इंडेक्स (ईएससीआई), एबीडीसी जर्नल क्वालिटी लिस्ट, इकॉनलिट (इकोनॉमिक्स लिटरेचर इंडेक्स), प्रोक्वेस्ट, एब्स्को (ईबीएससीओ – एल्टन बी. स्टीफेंस कंपनी) तथा एएनवीयूआर (इटैलियन नेशनल एजेंसी फॉर द इवैल्यूएशन ऑफ यूनिवर्सिटीज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट्स) सहित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय इंडेक्सिंग प्लेटफॉर्म्स में सूचीबद्ध है। इस शोध पत्रिका का एच-इंडेक्स 37 है तथा इसका जर्नल इम्पैक्ट फैक्टर 2.5 है।
वर्ष 1992 में स्थापित जर्नल ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप (जेओई) उद्यमिता से जुड़े उभरते मुद्दों पर विचार-विमर्श और शोध को बढ़ावा देने के लिए दुनिया भर के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, शिक्षकों और व्यावहारिक क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान करता है। यह शोध पत्रिका विशेष रूप से उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के संदर्भ में उद्यमिता संबंधी अनुसंधान, सिद्धांतों और व्यवहार को आगे बढ़ाने के लिए एक बहुविषयक मंच के रूप में कार्य करती है।
यह शोध पत्रिका मौलिक शोध लेख, वैचारिक शोध-पत्र, दृष्टिकोण आधारित लेख, केस स्टडी तथा विश्लेषणात्मक टिप्पणियां प्रकाशित करती है। इनमें उद्यमिता सिद्धांत, उद्यमी व्यवहार, उद्यमिता रणनीति, उद्यम स्थापना एवं विकास, पारिवारिक व्यवसाय, सामाजिक उद्यमिता, अंतरराष्ट्रीय उद्यमिता, नेतृत्व, नवाचार तथा उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र जैसे विविध विषय शामिल हैं। यह पत्रिका अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, मानवशास्त्र, इतिहास और प्रबंधन सहित विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों एवं शोधकर्ताओं से शोध योगदान आमंत्रित करती है।
विभिन्न देशों और सांस्कृतिक संदर्भों पर आधारित अध्ययनों का भी स्वागत किया जाता है। यह बहुविषयक दृष्टिकोण शोधकर्ताओं को विभिन्न विश्लेषणात्मक परिप्रेक्ष्यों से उद्यमिता का अध्ययन करने का अवसर प्रदान करता है, जिससे ऐसे निष्कर्ष सामने आते हैं जो अकादमिक जगत और व्यवहारिक क्षेत्र—दोनों के लिए समान रूप से उपयोगी और प्रासंगिक होते हैं।
जर्नल ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप की अब तक की यात्रा और उद्यमिता के क्षेत्र में उसके योगदान पर प्रकाश डालते हुए, जर्नल ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप के संपादक डॉ. सुनील शुक्ला ने कहा, “पिछले तीन दशकों से जर्नल ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप उद्यमिता संबंधी ज्ञान को समृद्ध करने के लिए एक विश्वसनीय मंच उपलब्ध कराने का प्रयास करता रहा है। बीता एक वर्ष विशेष रूप से हमारे लिए महत्वपूर्ण रहा है, क्योंकि इस अवधि में शोध पत्रिका का एच-इंडेक्स 34 से बढ़कर 37 हो गया है और इसका इम्पैक्ट फैक्टर 1.9 से बढ़कर 2.5 हो गया है। ऐसे समय में, जब भारत का शोध वैश्विक स्तर पर लगातार अधिक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली बनता जा रहा है, जर्नल ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप की ये उपलब्धियां उद्यमिता अनुसंधान के बढ़ते महत्व और आर्थिक विकास तथा स्थिरता में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाती हैं।”
आज जब वैश्विक अर्थव्यवस्था और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में उद्यमिता की भूमिका लगातार बढ़ रही है, तब यह शोध पत्रिका ऐसे महत्वपूर्ण दृष्टिकोण और शोध-आधारित जानकारियां उपलब्ध कराती है, जो नीति-निर्माताओं और शिक्षाविदों—दोनों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होती हैं।
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