लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। ग्रीनप्लाई इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड ने ‘किसान साथी’ लॉन्च किया है। यह किसानों के साथ जुड़ने का एक व्यवस्थित प्रोग्राम है, जिसे इसलिए बनाया गया है। ताकि जिन समुदायों के साथ कंपनी काम करती है, उन्हें सीधे विशेषज्ञों की जानकारी मिल सके। किसान साथी’ के ज़रिए, ग्रीनप्लाई की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के आस-पास के किसानों को कौन से क्लोन और प्रजातियां लगानी हैं, खाद और मिट्टी का मैनेजमेंट कैसे करना है और एफएससी/एफएम सर्टिफ़िकेशन की ज़रूरतें क्या हैं — इन सबके बारे में प्रैक्टिकल गाइडेंस मिलती है। यह जानकारी ग्रीनप्लाई के अपने फ़ील्ड एक्सपर्ट्स और स्पेशलिस्ट थर्ड-पार्टी संस्थानों द्वारा मिलकर दी जाती है।
यह प्रोग्राम ग्रीनप्लाई के Tizit (नागालैंड), वडोदरा और राजकोट (गुजरात), संडीला (उत्तर प्रदेश) और कृपारामपुर (पश्चिम बंगाल) में मौजूद प्लांट्स के आस-पास चल रहा है। इसे आने वाले समय में सेमिलीगुडा (ओडिशा) फ़ैसिलिटी तक भी बढ़ाया जाएगा। ‘किसान साथी’ सिर्फ़ ट्रेनिंग से कहीं ज़्यादा है: ग्रीनप्लाई कई उपयुक्त प्रजातियों का अच्छी क्वालिटी वाला प्लांटिंग मटीरियल (जैसे ज़्यादा पैदावार देने वाले क्लोन) उपलब्ध कराता है।

साथ ही, यह किसानों को स्थानीय स्तर पर अपनाई जाने वाली मौसमी फ़सलों के साथ इंटरक्रॉपिंग (एक साथ दूसरी फ़सल उगाना) करने के बारे में भी गाइड करता है। ताकि प्लांटेशन साइकल के दौरान अतिरिक्त आमदनी हो सके। समय-समय पर किसानों की मीटिंग्स और बड़े किसान एक्सपो में भागीदारी से यह पार्टनरशिप पूरे साल बनी रहती है। इससे एक बार की मदद एक लंबे समय तक चलने वाले रिश्ते और आपसी भरोसे में बदल जाती है, जो सफलता की कुंजी है।
ग्रीनप्लाई इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर सानिध्य मित्तल ने कहा, “Kisan Saathi हमारी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के आस-पास के किसानों के साथ सच्ची पार्टनरशिप को दिखाता है। 90 मिलियन पेड़ों का आंकड़ा पार करना और 100 मिलियन के लक्ष्य के करीब पहुँचना, उनके साथ हमारे बने भरोसे को दर्शाता है। हम आने वाले सालों में इस सहयोग को और मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
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