गाज़ियाबाद (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। गाज़ियाबाद के युवा ईस्पोर्ट्स खिलाड़ी आरुष “हाइड्रो” शर्मा, क्राफ्टन इंडिया के प्रतिष्ठित राइजिंग स्टार प्रोग्राम में चयनित होने के बाद भारत के सबसे प्रतिभाशाली और उभरते हुए बीजीएमआई खिलाड़ियों में अपनी पहचान तेजी से बना रहे हैं। यह पहल देश की अगली पीढ़ी के ईस्पोर्ट्स स्टार्स को खोजने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए शुरू की गई है।
वर्तमान में टीम एपेक्स गेमिंग का प्रतिनिधित्व कर रहे हाइड्रो अपने लगातार शानदार प्रदर्शन, बेहतरीन गेमप्ले और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के अनुभव के दम पर भारतीय बीजीएमआई ईस्पोर्ट्स जगत में एक अलग पहचान बना चुके हैं।
गाज़ियाबाद के एक महत्वाकांक्षी खिलाड़ी से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने तक का उनका सफर आज उत्तर प्रदेश के अनेक युवा गेमर्स को प्रेरित कर रहा है। हाइड्रो की गेम में रुचि तब जगी जब उन्होंने एक स्ट्रीमर को पबजी का ग्लोबल पीसी वर्जन खेलते हुए देखा। खुद भी इस गेम का अनुभव लेने की उत्सुकता में उन्होंने इसका मोबाइल वर्जन खोजा और वहीं से उनके प्रतिस्पर्धी गेमिंग सफर की शुरुआत हुई।
हालांकि, सफलता तक पहुंचने का उनका रास्ता बिल्कुल आसान नहीं था। हाइड्रो के करियर का सबसे कठिन दौर तब आया, जब गेम खेलने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला उनका एंड्रॉयड डिवाइस खराब हो गया। आर्थिक तंगी के कारण वे उसे तुरंत ठीक नहीं करवा सके और उन्हें लगभग छह महीने तक गेम से दूर रहना पड़ा।
हाइड्रो ने बताया, “मेरे करियर का सबसे मुश्किल समय वह था, जब मेरा डिवाइस खराब हो गया था और उसे ठीक कराने के लिए मेरे पास पर्याप्त पैसे नहीं थे। इसकी वजह से मुझे छह महीने तक गेम खेलना छोड़ना पड़ा। बाद में किसी तरह पैसे जुटाकर मैंने उसे रिपेयर कराया और फिर दोबारा खेलना शुरू किया।”
कई कठिनाइयों और चुनौतियों के बावजूद हाइड्रो ने हार नहीं मानी। उनकी मेहनत और दृढ़ संकल्प का फल उन्हें तब मिला, जब वे ट्रू रिपर्स टीम से जुड़े। यहीं से उनके करियर ने नई ऊंचाइयों को छूना शुरू किया।

टीम के साथ अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने बीजीएमएस, बीजीआईएस, बीएमएसडी और बीएमआईसी जैसे प्रमुख बीजीएमआई टूर्नामेंट्स में लगातार शानदार प्रदर्शन किया और टीम को शीर्ष स्थानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बीएमआईसी में टीम उपविजेता रही, जिसके बाद उन्हें दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित ईस्पोर्ट्स टूर्नामेंट्स में से एक पीएमजीसी के लिए क्वालिफाई करने का अवसर मिला।
अपने सफर को याद करते हुए हाइड्रो ने कहा, “इंटरनेशनल टूर्नामेंट्स में खेलने के अनुभव ने मेरी सोच पूरी तरह बदल दी। मुझे एहसास हुआ कि यह गेम केवल स्किल आधारित नहीं है, बल्कि आपकी मानसिकता पर भी काफी हद तक निर्भर करता है। वैश्विक प्रतियोगिताओं ने हमें रणनीतिक तरीके से खेलना और मानसिक रूप से मजबूत बने रहने का महत्व सिखाया।”
राइजिंग स्टार प्रोग्राम में चयनित होने पर अपनी खुशी व्यक्त करते हुए हाइड्रो ने कहा, “मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। यह मंच मुझे सही मार्गदर्शन देगा और एक खिलाड़ी के साथ-साथ एक कंटेंट क्रिएटर के रूप में भी आगे बढ़ने में मदद करेगा।”
महज 18 वर्ष की उम्र में हाइड्रो का मानना है कि राइजिंग स्टार प्रोग्राम उन्हें पेशेवर ईस्पोर्ट्स में सफलता के साथ बढ़ते फैनबेस और मीडिया की बढ़ती रुचि को बेहतर ढंग से संभालने में मदद करेगा। आरुष “हाइड्रो” शर्मा का गाज़ियाबाद से अंतरराष्ट्रीय ईस्पोर्ट्स मंच तक का सफर इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा, दृढ़ता और अथक मेहनत के दम पर गेमिंग के सपनों को भी हकीकत में बदला जा सकता है।
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