लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। ईरान-अमेरिका युद्ध और उससे उत्पन्न वैश्विक अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रहित में संयम, त्याग और आत्मनिर्भरता के आह्वान को देश के नागरिकों का समर्थन मिल रहा है। इसी क्रम में कानपुर निवासी आशुतोष यादव ने प्रधानमंत्री को संबोधित पत्र लिखकर अपने परिवार और रिश्तेदारों की ओर से राष्ट्रधर्म के इस अभियान में पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण के साथ सहभागी होने का विश्वास व्यक्त किया है।
पत्र में कहा गया है कि जब-जब राष्ट्र कठिन दौर से गुजरा है, तब-तब भारत ने अपने जनमानस की शक्ति से हर संकट का सामना किया है। वर्तमान में ईरान-अमेरिका युद्ध और उससे उत्पन्न परिस्थितियों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति तथा सप्लाई चेन को प्रभावित किया है, जिससे भारत भी पूरी तरह अछूता नहीं रह सकता।
आशुतोष यादव ने बताया कि उनके परिवार ने यह संकल्प लिया है कि जिन वस्तुओं का उपयोग अत्यावश्यक नहीं है। उनका अनावश्यक उपभोग नहीं किया जाएगा, ताकि देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर किसी प्रकार का अनावश्यक भार न पड़े। उन्होंने कहा कि “राष्ट्र पहले है” की भावना उनके परिवार के प्रत्येक सदस्य में विद्यमान है।

हालांकि पत्र में प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है। आशुतोष यादव ने समाचारों के हवाले से उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था और काफिले (कन्वॉय) के आकार को सीमित किया है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री की सादगी और त्याग की भावना का परिचायक बताते हुए कहा कि देश के करोड़ों नागरिक उनकी सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं कर सकते।
पत्र में कहा गया है कि प्रधानमंत्री केवल एक जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आशा, विश्वास और प्रेरणा के प्रतीक हैं। आशुतोष यादव ने आग्रह किया कि उनकी सुरक्षा व्यवस्था को पुनः पूर्ववत किया जाए, क्योंकि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में राष्ट्र को उनके नेतृत्व की आवश्यकता पहले से अधिक है।
आशुतोष यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो देशवासी अभाव और कठिनाइयों का सामना करने के लिए तैयार हैं। लेकिन भारत के स्वाभिमान, अस्मिता और संप्रभुता पर किसी प्रकार की आंच नहीं आने देंगे।

पत्र में कोविड-19 महामारी के दौरान प्रधानमंत्री के नेतृत्व की भी सराहना की गई है। आशुतोष यादव ने कहा कि महामारी के कठिन समय में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राष्ट्र को संभाला गया, करोड़ों लोगों को आशा मिली और जीवन में विश्वास लौटा। साथ ही, उनके नेतृत्व में भारत द्वारा विश्व पटल पर अर्जित उपलब्धियों को भी गौरव का विषय बताया गया।
पत्र के अंत में आशुतोष यादव ने विश्वास जताया कि वर्तमान वैश्विक संकट की घड़ी में भी भारत प्रधानमंत्री के नेतृत्व में और अधिक सशक्त होकर उभरेगा तथा विश्व समुदाय के समक्ष पुनः एक आदर्श राष्ट्र के रूप में स्थापित होगा। उन्होंने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लक्ष्य को साकार करने की आशा व्यक्त की।
पत्र में आशुतोष यादव ने अपनी पूज्य दादी कृष्णा देवी, माता-पिता श्याम सिंह एवं पुष्पा यादव की ओर से प्रधानमंत्री को शुभकामनाएं और नमस्कार प्रेषित किए हैं। साथ ही अपने दिवंगत अनुज स्वर्गीय अभिषेक यादव की स्मृति का भी उल्लेख किया है, जो प्रधानमंत्री को अपना प्रेरणास्रोत मानते थे। पत्र के समापन पर प्रधानमंत्री के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं निरंतर राष्ट्रसेवा के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गई है।
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