मुंबई (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। सेट पर लंबे समय तक साथ काम करना अक्सर को-एक्टर्स को परिवार जैसा बना देता है। साझा दिनचर्या, मज़ेदार किस्से और छोटी-छोटी आदतें धीरे-धीरे रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन जाती हैं। सोनी सब के कलाकार सृष्टि सिंह, इक़बाल खान, दीक्षा जोशी और नितिन बाबू ने हाल ही में बताया कि उन्होंने अपने साथ काम करने वाले कलाकारों से कौन-सी दिलचस्प आदतें और खूबियाँ अपनाई हैं। दबाव में शांत रहना, अनुशासन बनाए रखना और सेट पर पॉज़िटिव माहौल बनाना, इन छोटी-छोटी बातों ने उन्हें व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों स्तरों पर प्रभावित किया है।
सृष्टि सिंह ने साझा किया, “मेरे को-स्टार्स से, खासकर गुलकी से, मैंने एक आदत ज़रूर सीखी है सबसे व्यस्त शूटिंग दिनों में भी शांत रहना। पहले मैं बहुत ही जल्दी तनाव में आ जाती थी यदि चीज़ें बहुत तेज़ी से हो रही हों, लेकिन अब मैंने समझ लिया है कि शांत रहना और प्रोसेस को एंजॉय करना कितना ज़रूरी है। जिन लोगों को दबाव में भी सहज रहते देखो, उनकी आदतें आप पर भी असर डालती हैं।”
इक़बाल खान ने साझा किया, “यंग कास्ट से मैंने एक चीज़ ज़रूर सीखी है, उनकी हल्की-फुल्की एनर्जी और वह मज़ेदार अंदाज़, जिसमें वे लगातार एक-दूसरे को रोस्ट करते रहते हैं, लेकिन कभी भी इसे सीरियसली नहीं लेते। अब मैंने भी उनके साथ वैसा ही करना शुरू कर दिया है। मुझे सच में जो बात सबसे ज़्यादा पसंद आती है, वह यह है कि उनमें से कोई भी शिकायत नहीं करता, जबकि अक्सर जेन जेड के बारे में ऐसी बातें सुनने को मिलती हैं। इसके उलट, ये सब हमेशा पॉज़िटिव रहते हैं, एनर्जेटिक रहते हैं और मज़े करते रहते हैं। सच कहूँ तो, ये ऐसी चीज़ है जिससे वाकई सीखने लायक है।”
दीक्षा जोशी ने साझा किया, “करूणा मैम से मैंने सच में डांसिंग का शौक अपनाया है। जब भी सेट पर म्यूज़िक बजता है, उनकी एनर्जी इतनी इंफेक्शियस होती है कि वे सबको उसमें शामिल कर लेती हैं। उन्हें इतना सहज होकर डांस करते देख मुझे भी मज़ा आने लगा। अब जब भी शॉट्स के बीच म्यूज़िक बजता है, मैं सिर्फ देखने के बजाए खुद भी डांस करने लगती हूँ।”
नितिन बाबू ने साझा किया, “पहले मैं चुपचाप अपनी वैनिटी में अकेले लंच कर लिया करता था, क्योंकि मुझे वही आरामदायक लगता था। लेकिन, सेट पर सबके साथ ज़्यादा समय बिताने के बाद मैंने धीरे-धीरे टीम के साथ मिलकर खाने की आदत अपना ली। अब लंच ब्रेक सच में दिन का सबसे मज़ेदार हिस्सा बन गया है, जहाँ सब बातें करते हैं, मज़ाक करते हैं और रिलैक्स होते हैं। इससे पूरे दिन की एनर्जी ही बदल जाती है।”
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