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युवाओं में तेजी से बढ़ रहा हाइपरटेंशन, रीजेंसी हेल्थ ने जारी की हेल्थ एडवाइजरी

 

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे के अवसर पर रीजेंसी हेल्थ ने एक पब्लिक हेल्थ एडवाइज़री जारी की है। रीजेंसी हेल्थ मरीज़ों को शिक्षित करने वाली पहलों के ज़रिए निवारक स्वास्थ्य सेवा और जन जागरूकता पर अपना ध्यान लगातार बढ़ा रहा है। इन पहलों का उद्देश्य बीमारियों का जल्द पता लगाना, स्वस्थ लाइफ़स्टाइल अपनाना और लंबे समय तक हृदय संबंधी स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखना है।

हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने यह नोटिस किया कि 20 और 30 की उम्र के आखिर में हाई ब्लड प्रेशर के मरीज़ों की संख्या बढ़ रही है। ऐसा ज़्यादातर क्रोनिक तनाव, खराब नींद, अस्वस्थ खाने की आदतों, मोटापे, आलसभरी लाइफस्टाइल, धूम्रपान, शराब पीने और लंबे समय तक स्क्रीन का उपयोग करने से होता है।

हॉस्पिटल ने नियमित ब्लड प्रेशर जांच और लाइफस्टाइल में शुरुआती बदलाव के बारे में ज़्यादा जागरूकता फैलाने की अपील की है। साथ ही चेतावनी दी है कि हाइपरटेंशन का अक्सर तब तक पता नहीं चलता जब तक कि गंभीर समस्याएं हृदय, किडनी, मस्तिष्क या खून की नसों पर असर न डालने लगें। चिकित्सा विशेषज्ञों ने ज़ोर देकर कहा कि समय पर निदान, नियमित जांच और रोज़ाना की स्वस्थ आदतें युवा आबादी में कार्डियोवैस्कुलर बीमारी के लंबे समय के बोझ को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

हाइपरटेंशन को आम तौर पर “साइलेंट किलर” कहा जाता है। क्योंकि इसमें शुरुआती स्टेज में कोई ख़ास लक्षण नज़र नहीं आता है और शरीर कई सालों तक चुपचाप नुकसान झेलता रहता है। चिकित्सकों के मुताबिक वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन (WHO) के मुताबिक, WHO साउथ-ईस्ट एशिया क्षेत्र में 294 मिलियन से ज़्यादा लोग अभी हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं, यही कारण है कि यह बीमारी पूरी दुनिया में समय से पहले होने वाली मौतों के मुख्य कारणों में से एक बन गई है। भारत में NFHS-5 के परिणामों के अनुसार, लगभग चार में से एक वयस्क का ब्लड प्रेशर का स्तर बढ़ा हुआ रहता है, और लाइफस्टाइल से जुड़े जोखिम कारक कम उम्र के लोगों को भी इस बीमारी से तेज़ी से प्रभावित कर रहे हैं।

रीजेंसी हेल्थ लखनऊ के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ हर्षित गुप्ता ने कहा, “हाइपरटेंशन अब सिर्फ बुढ़ापे में होने वाली समस्या नहीं रह गई है। हम युवाओं में भी इसका निदान कर रहे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि युवा लोग लगातार तनाव व चिंता, अनियमित नींद, ख़राब खाने पीने की आदतें और कम शारीरिक गतिविधि के आदी हो चुके हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि इस बीमारी से ग्रसित होने के बाद भी लोगों को पता नहीं होता है कि उन्हें यह बीमारी है। लक्षण जब दिखने शुरू होते हैं तो काफी देर हो चुकी होती है। शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों में नुकसान होना शुरू हो चुका होता है। एक साधारण सी ब्लड प्रेशर जांच से बीमारी के खतरे को जल्दी भांपा जा सकता है और हृदय बीमारियों, स्ट्रोक या किडनी की समस्याओं से बचा जा सकता है।”

रीजेंसी हेल्थ के चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी लाइफस्टाइल की वजह से युवा आबादी में हाइपरटेंशन का बोझ बढ़ रहा है। लंबे समय तक काम करना, प्रोसेस्ड और हाई-सोडियम फूड्स का ज़्यादा सेवन, एक्सरसाइज न करने, नींद पूरी न होने और डिजिटल उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता इस बीमारी के मुख्य कारण हैं। डॉक्टर यह भी चेतावनी देते हैं कि बार-बार सिरदर्द, चक्कर आना, थकान, घबराहट, एंग्जायटी या नींद में खलल जैसे लक्षणों को अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है या उन्हें रोजमर्रा का तनाव समझ लिया जाता है, जिससे समय पर निदान और इलाज में देरी होती है।

हॉस्पिटल 30 वर्ष से ज्यादा आयु के व्यक्तियों, साथ ही मोटापे, डायबिटीज, परिवार में हाई ब्लड प्रेशर वाले, धूम्रपान की आदतें या सुस्त लाइफस्टाइल वाले युवा वयस्कों को नियमित रूप से अपने ब्लड प्रेशर की निगरानी करने की सलाह देता है। विशेषज्ञ इसके अलावा लाइफस्टाइल से जुड़े रोकथाम उपाय अपनाने की भी सलाह देते हैं। इन उपायों में संतुलित और कम नमक वाला खानपान, नियमित शारीरिक गतिविधि, तनाव का बेहतर प्रबंधन, पर्याप्त नींद तथा तंबाकू और अत्यधिक शराब पीने से परहेज़ करना शामिल हैं।