लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। फिक्की फ्लो लखनऊ ने शुक्रवार को दिलचस्प सेशन, “डिटेक्टिव डायरीज़ – जासूसी के पीछे का कानून” का आयोजन किया। जिसमें महिला जासूस तान्या पुरी मुख्य वक्ता थीं। फ्लो लखनऊ की चेयरपर्सन सिमरन साहनी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में जासूसी के कुछ फिल्मी मामलों, महिलाओं के अधिकारों और भारत में जासूसी की कानूनी वैधता पर एक दिलचस्प चर्चा हुई।
तान्या पुरी भारत की सबसे कम उम्र की महिला जासूस हैं, और ‘लेडी डिटेक्टिव्स इंडिया’ की सीईओ हैं। शादी से पहले और बाद की जांच में माहिर तान्या, देश के इस मुख्य रूप से पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्र में गिनी-चुनी महिला जासूसों में से एक हैं। वह अपने कुछ सबसे दिलचस्प मामलों के बारे में अपने इंस्टाग्राम हैंडल @ladydetectivesindia पर जानकारी साझा करती हैं। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता फ्लो की कानूनी सलाहकार समिति ने की, जिसका नेतृत्व स्मिता माथुर और दीपिका अग्रवाल ने किया।

इस ज्ञानवर्धक सेशन ने फिक्की फ्लो लखनऊ की उस प्रतिबद्धता को दर्शाया, जिसके तहत वह महिलाओं को जानकारी देने, उन्हें सशक्त बनाने और प्रेरित करने वाली सार्थक चर्चाओं का आयोजन करता है। कार्यक्रम की मॉडरेटर सीमू घई ने तान्या पुरी से कई तीखे सवाल पूछे। जवाब में तान्या पुरी ने अपनी असल ज़िंदगी के कुछ ऐसे किस्से (बिना किसी का नाम बताए) साझा किए, जो किसी बॉलीवुड फिल्म की कहानी जैसे लग रहे थे। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि महिलाएं अपने रिश्तों में अपने अधिकारों को पाने के लिए जासूसी एजेंसियों की मदद कैसे ले सकती हैं।

इस चर्चा में जासूसी की कानूनी वैधता पर भी बात हुई – कि क्या चीज़ें कानून की स्वीकार्य सीमाओं के भीतर आती हैं और क्या कानूनी सीमाओं का उल्लंघन करती हैं। साथ ही, डिजिटल संचार के इस दौर में निजता (privacy) से जुड़ी चिंताओं को भी उजागर किया गया।
इस कार्यक्रम में पूर्व चेयरपर्सन अंजू नारायण, विभा अग्रवाल सहित फ्लो लखनऊ के सदस्यों ने हिस्सा लिया। जिनमें कार्यकारी समिति की सदस्य देवांशी सेठ, निवेदिता सिंह, प्रज्ञा अग्रवाल, मिताली ओसवाल और वसुधा जैन भी शामिल थीं।
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