लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। मार्स, इंकॉरपोरेटेड (एक वैश्विक पेट केयर, स्नैकिंग और फ़ूड कंपनी) की परोपकारी संस्था, मार्स इम्पैक्ट फंडके प्रतिनिधियों ने शुक्रवार को लखनऊ में ‘ह्यूमन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया के एनिमल्स बर्थ कंट्रोल केंद्र का दौरा किया। इस दौरे का उद्देश्य शहर के एकीकृत, मानवीय तरीके से आवारा कुत्तों के प्रबंधन और सामुदायिक जुड़ाव कार्यक्रम को देखना था। इस दौरे से यह पता चला कि कैसे कुत्तों की नसबंदी और रेबीज़-रोधी टीकाकरण की पहलें मज़बूत सामुदायिक जुड़ाव के ज़रिए सफल हो सकती हैं।
यह सामुदायिक जुड़ाव ही लखनऊ को एक ‘मॉडल शहर’ के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाता है, जहाँ मानवीय तरीके से आवारा कुत्तों की आबादी का प्रबंधन किया जाता है, इंसानों और कुत्तों के बीच टकराव कम किया जाता है, और भारत में दोनों के बीच सह-अस्तित्व को बढ़ावा दिया जाता है।
भारत में, लाखों आवारा कुत्ते इंसानों के आस-पास ही रहते हैं, जिससे शहरों में एक जटिल चुनौती खड़ी हो सकती है। लखनऊ से सामने आया एक प्रोग्राम मॉडल यह दिखाता है कि जब विज्ञान-आधारित रणनीतिक समाधानों को करुणा और सामुदायिक भागीदारी के साथ जोड़ा जाता है, तो उन शहरों के लिए एक ऐसा रास्ता तैयार होता है। जो इंसानों और कुत्तों के बीच होने वाले टकराव का प्रभावी, स्थायी और मानवीय समाधान चाहते हैं।

इस तरीके की सबसे खास बात यह है कि यह समुदायों और आवारा कुत्तों की देखभाल करने वालों पर ज़ोर देता है। उन्हें समाधान में सिर्फ़ फ़ायदा पाने वाले नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदार मानता है। समुदाय के स्वयं-सेवक, निवासी, रेजिडेंट वेलफ़ेयर एसोसिएशन और समुदाय के कुत्तों की देखभाल करने वाले लोग इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। आवारा कुत्तों पर नज़र रखने से लेकर, उनके लिए तय की गई खाने की जगहों को संभालने तक और फ़ील्ड टीमों के साथ मिलकर उन कुत्तों की पहचान करने तक जिनका अभी तक नसबंदी नहीं हुई है।
पूरे शहर में 475 से ज़्यादा ‘अभय संकल्प’ समितियाँ—स्थानीय निवासियों के ऐसे समूह सक्रिय हैं, जो आवारा कुत्तों के साथ इंसानी तरीके से रहने और उनके सही प्रबंधन में मदद के लिए बनाए गए हैं। इनमें 15,000 से ज़्यादा समुदाय के सदस्य शामिल हैं।
‘ह्यूमन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स’ कार्यक्रम को ‘मार्स इम्पैक्ट फंड’ का सहयोग प्राप्त है। जो शहरी भारत में पालतू जानवरों के कल्याण के लिए समुदाय-आधारित प्रयासों को मज़बूत बनाने में मदद कर रहा है। अपनी शुरुआत से अब तक, इस कार्यक्रम के तहत एक लाख से ज़्यादा आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया जा चुका है, जिससे शहर में 80% से ज़्यादा नसबंदी कवरेज का लक्ष्य हासिल किया गया है। खास बात यह है कि इन प्रयासों में से 25% समुदाय की भागीदारी से संभव हो पाए हैं, जो आवारा कुत्तों की आबादी को मानवीय और टिकाऊ तरीके से प्रबंधित करने की दिशा में साझा ज़िम्मेदारी की बढ़ती भावना को दर्शाता है।
अपनी यात्रा के दौरान, मार्स टीम के सदस्यों ने कार्यक्रम में सीधे तौर पर शामिल समुदाय के सदस्यों और स्वयं-सेवकों के साथ बातचीत भी की। जिससे उन्हें यह समझने में मदद मिली कि स्थानीय भागीदारी किस तरह परिणामों को आकार दे रही है। इस यात्रा में बच्चों के साथ कुत्तों के व्यवहार के प्रति जागरूकता पर एक वर्कशॉप भी शामिल थी। जिससे यह झलक मिली कि शुरुआती शिक्षा किस तरह कुत्तों के व्यवहार को समझने, डर के कारण होने वाली प्रतिक्रियाओं को कम करने, टकराव को रोकने और लोगों व जानवरों के बीच सहानुभूति व सुरक्षित मेल-जोल को बढ़ावा देने में मदद करती है।

मार्स इम्पैक्ट फंड की कार्यकारी निदेशक, मिशेल ग्रॉग ने कहा, “लखनऊ कार्यक्रम को अपनी आँखों से देखना इस बात की एक ज़बरदस्त याद दिलाता है कि जब विज्ञान, करुणा और समुदाय एक साथ आते हैं, तो क्या-fक्या संभव हो सकता है। यह ठीक वैसा ही टिकाऊ और बड़े पैमाने पर असर डालने वाला काम है, जिसे हम मार्स इम्पैक्ट फंड के ज़रिए बढ़ावा देना चाहते हैं। ‘ह्यूमन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स’ ने एक ऐसा मॉडल तैयार किया है जिसे दूसरी जगहों पर भी दोहराया जा सकता है। यह मॉडल न सिर्फ़ सड़कों पर रहने वाले कुत्तों की भलाई करता है, बल्कि इंसानों और पालतू जानवरों के बीच के रिश्ते को भी मज़बूत बनाता है। Mars में, हमारा मानना है कि हमें पालतू जानवरों के लिए एक बेहतर दुनिया बनानी चाहिए। यह कार्यक्रम इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण है कि हम अपने स्थानीय साथियों को सशक्त बनाकर, ज़मीनी स्तर से ही सार्थक बदलाव लाकर इस लक्ष्य को कैसे हासिल कर सकते हैं।”
ह्यूमन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया की सीनियर डायरेक्टर, कंपेनियन एनिमल्स एंड एंगेजमेंट, केरेन नाज़रेथ ने कहा, “सड़क पर रहने वाले कुत्तों के लिए स्थायी बदलाव लाना, जितना कुत्तों के बारे में है, उतना ही लोगों के बारे में भी है। जहाँ नसबंदी और टीकाकरण जैसे उपाय बहुत ज़रूरी हैं। वहीं जब समुदाय के लोगों को जानकारी दी जाती है, उन्हें शामिल किया जाता है और उनका सहयोग किया जाता है, तो वे साथ मिलकर रहने के सबसे मज़बूत माध्यम और वाहक बन जाते हैं। मार्स इम्पैक्ट फंड के सहयोग से हम ज़मीनी स्तर पर इस जुड़ाव को और गहरा कर पाते हैं, और ऐसे समाधान तैयार कर पाते हैं जो मानवीय और टिकाऊ हों।”
ह्यूमन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया ने लखनऊ नगर निगम के सहयोग से, वर्ष 2019 में ABC कार्यक्रम शुरू किया।अब तक एक लाख से ज़्यादा कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। इस कार्यक्रम के तहत नसबंदी किया गया 1,00,000वां सामुदायिक कुत्ता, ‘चिट्टी’, एक स्थानीय स्वयंसेवक को सड़क पर घायल अवस्था में मिला था, जिसे वह लखनऊ स्थित केंद्र में ले आया।

हर हफ़्ते, 250-300 कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया जाता है, और फिर उन्हें वापस उनकी मूल जगहों पर छोड़ दिया जाता है। इस पहल को 30 से ज़्यादा प्रशिक्षित कर्मचारियों की एक टीम, छह वाहनों और सामुदायिक स्वयं-सेवकों के एक मज़बूत नेटवर्क का सहयोग प्राप्त है।
दिसंबर 2024 में किए गए एक निगरानी सर्वेक्षण में पाया गया कि लखनऊ के 84.3% आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया जा चुका है। आवारा कुत्तों से जुड़ी 31,000 से अधिक जन-चिंताओं का समाधान, नसबंदी, टीकाकरण और सामुदायिक जागरूकता जैसे मानवीय उपायों के माध्यम से प्रभावी ढंग से किया गया।
मार्स इम्पैक्ट फंड को 2026 में $85 मिलियन के एक वैश्विक फंड के तौर पर लॉन्च किया गया था। इसका मकसद कंपनी के मौजूदा सस्टेनेबिलिटी और परोपकारी प्रयासों को लंबे समय के लिए की गई रणनीतिक निवेशों से और मज़बूत करना है। ये निवेश समुदायों को सशक्त बनाते हैं, वैज्ञानिक अवसरों को बढ़ावा देते हैं और पालतू जानवरों की भलाई में सुधार लाते हैं। यह फंड ‘ह्यूमन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स’ के साथ मार्स की लंबे समय से चली आ रही वैश्विक साझेदारी पर आधारित है, और भारत में इस संगठन के कार्यक्रमों के लिए इसका समर्थन 2020 में शुरू हुआ था।
ह्यूमन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स भारत और दुनिया भर में सड़कों पर रहने वाले, सामुदायिक और पालतू कुत्तों और बिल्लियों की भलाई के लिए काम करता है। सड़कों पर रहने वाले जानवरों की आबादी को कम करने के लिए मानवीय और टिकाऊ तरीकों को बढ़ावा देते हैं और लोगों के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का समर्थन करते हैं।
2013 से, ह्यूमन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स के कार्यक्रमों के ज़रिए भारत में 400,000 से ज़्यादा सड़कों पर रहने वाले कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया जा चुका है। इस चैरिटी के सड़कों पर रहने वाले कुत्तों से जुड़े कार्यक्रम लोगों को अपने जानवरों की देखभाल करने में मदद करते हैं और उनके साथ होने वाली क्रूरता और उन्हें बेसहारा छोड़ने से रोकते हैं। ये कार्यक्रम उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, मेक्सिको, भारत, चिली, कोस्टा रिका, रोमानिया और बोलीविया में चलाए जा रहे हैं।
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