लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। लोक संस्कृति शोध संस्थान द्वारा आयोजित ऑनलाइन वैश्विक होली बैठकी में देश-विदेश के अप्रवासी भारतीयों ने आभासी मंच पर जुड़कर होली की खुशियां साझा कीं। अमेरिका, पुणे, बैंगलोर सहित विभिन्न शहरों से जुड़े प्रतिभागियों ने पारंपरिक फाग और गीत प्रस्तुत कर एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ अमेरिका से जुड़ीं दृश्या और नेत्रा ने गणेश वंदना से किया। सुप्रसिद्ध साहित्यकार अमृतलाल नागर की पौत्री डॉ. दीक्षा नागर ने होली की शुभकामनाएं दीं। शाखा वन्द्योपाध्याय ने नागर जी की ड्योढ़ी की होली परंपराओं का उल्लेख करते हुए बोली-बानी और संस्कृति से जुड़े रहने की आवश्यकता बताई। नरेंद्र वर्मा ने चकल्लस पत्रिका और चौक के होली कवि सम्मेलन की चर्चा की।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में दृश्या ने राजा दशरथ द्वार मची होरी, मथु माथुर ने बृज में धूम मची सब होली खेलत मिल आय, मधु श्रीवास्तव ने मत मारो दृगन की चोट रसिया होरी में, अर्चना गुप्ता ने फगुनवा में रंग रसे रसे बरसे, भवतारिणी सुन्दरम अय्यर ने आओ खेलें कान्हा संग होरी, पल्लवी निगम ने सपने में मोपे रंग डालो नंदलाल सुनाया।प्रो. उषा बाजपेयी ने कविता पाठ किया।
बैठकी में निवेदिता भट्टाचार्य, सीमा, डा.एस.के.गोपाल सहित अन्य मौजूद रहे। संचालन अर्चना गुप्ता ने किया।संस्थान की सचिव डॉ. सुधा द्विवेदी ने बताया कि पांच मार्च को गोमती नगर के विराम खंड स्थित लिटिल चैंप्स स्कूल परिसर में होली बैठकी होगी।
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