नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को एक संस्कृत सुभाषित साझा कर ज्ञान की मूलभूत जड़ों तथा दैनिक अनुशासन की रक्षा के निर्णायक महत्व पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने एक्स पोस्ट पर सुभाषित साझा किया- विप्रो वृक्षस्तस्य मूलं च सन्ध्या वेदाः शाखा धर्मकर्माणि पत्रम्। तस्मान्मूलं यत्नतो रक्षणीयं छिन्ने मूले नैव शाखा न पत्रम्॥इस सुभाषित का अर्थ है कि एक बुद्धिमान व्यक्ति वृक्ष के समान होता है। उस ज्ञान स्वरूपी वृक्ष की जड़ दैनिक उपासना है। वेद उसकी शाखाएं हैं और सत्कर्म उसके पत्ते हैं। अतः जड़ की सावधानीपूर्वक रक्षा की जानी चाहिए, क्योंकि यदि जड़ नष्ट हो गई तो न शाखाएँ रहेंगी और न ही पत्ते।
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