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स्वास्थ्य बीमा में प्रीमियम बनाम दावा विवाद : असल वजह क्या?

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। स्वास्थ्य बीमा पर चर्चा के दौरान अक्सर प्रीमियम सबसे ज्यादा ध्यान खींचता है। विवाद की स्थिति में आम सवाल होता है, “मैंने वर्षों तक नियमित प्रीमियम भरा है, फिर मेरे दावे पर सवाल क्यों।” बीमा विशेषज्ञों का कहना है कि इसका जवाब दस्तावेज़ और सही जानकारी देने में छिपा है।दरअसल, मूल रूप से, स्वास्थ्य बीमा सटीक जोखिम प्रोफाइलिंग पर निर्भर करता है। पॉलिसी जारी करते समय, बीमा कंपनियां उम्र, मेडिकल हिस्ट्री और घोषित बीमारियों के आधार पर प्रीमियम तय करती हैं। यदि महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए जाते हैं चाहे अनजाने में ही क्यों न हो तो यह संबंधित बीमारियों के कवरेज की वैधता को प्रभावित कर सकता है।

बीमा विश्लेषकों के अनुसार अधिकांश दावे बिना किसी विवाद के निपटाए जाते हैं। लेकिन अगर अस्पताल के रिकॉर्ड से यह संकेत मिलता है कि बीमारी पॉलिसी लेने से पहले की है, तो बीमा कंपनी यह जांचने के लिए बाध्य होती है कि वेटिंग पीरियड या एक्सक्लूजन लागू होते हैं या नहीं। एक निजी बीमा कंपनी के पूर्व अंडरराइटिंग प्रमुख कहते हैं, “यह सहायता से इनकार करने का मामला नहीं है, बल्कि सभी पर एक समान नियम लागू करने का विषय है।”

स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के सीओओ अमिताभ जैन ने इस कार्यप्रणाली पर जोर देते हुए कहा, “प्रीमियम का भुगतान करना, पॉलिसी जारी करते समय सहमत नियमों और शर्तों के अनुसार सुरक्षा की गारंटी देता है। बीमा एक स्पष्ट रूप से निर्धारित ढांचे के तहत काम करता है। प्रस्ताव चरण में पूरी और ईमानदार जानकारी देना और दावा चरण में दस्तावेज़ी मेडिकल साक्ष्यों के आधार पर आकलन करना।”

उन्होंने बताया कि स्थापना से अब तक स्टार हेल्थ ने 7.5 करोड़ से अधिक पॉलिसियां जारी की हैं और ₹62,000 करोड़ से ज्यादा के दावों का भुगतान किया है, जिससे लाखों परिवारों को चिकित्सा जरूरत के समय सहयोग मिला है। जब खुलासा और दस्तावेज पूरे होते हैं, तो सुरक्षा व्यवस्था अपने उद्देश्य के अनुसार काम करती है।”उपभोक्ताओं के लिए संदेश स्पष्ट है।

पॉलिसी खरीदते समय सटीक जानकारी देना और मेडिकल दस्तावेजों को व्यवस्थित रखना बेहद महत्वपूर्ण है। वहीं, बीमा कंपनियों के लिए भी संवाद ही सफलता की कुंजी है। जैसे-जैसे भारत में स्वास्थ्य बीमा का दायरा बढ़ रहा है, विशेषज्ञों का मानना है कि पॉलिसी की शर्तों के प्रति जागरूकता बढ़ने से विवाद कम होंगे। इससे सिस्टम का वास्तविक उद्देश्य वास्तविक चिकित्सा आवश्यकता के समय वित्तीय सुरक्षा और अधिक मजबूत होगा।