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दुनिया का सशक्‍त उपकरण है भाषा : चिन्‍मय मिश्र


वर्धा (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। इंटेलेक्‍चुअल सोसाइटी ऑफ मीडिया प्रोमोटर्स की सकारात्‍मक, निरपेक्ष व स्‍वतंत्र अभिव्‍यक्ति में विरासत ही मार्गदर्शक पर आयोजित दो दिवसीय द्वितीय वर्धा एजीएम विरासत मीडिया प्रमोटर्स संगोष्‍ठी के उद्घाटन में मध्‍य प्रदेश सर्वोदय मंडल एवं ग्राम सेवा मंडल, वर्धा के अध्‍यक्ष चिन्मय मिश्र ने कहा कि भाषा दुनिया का सबसे सशक्‍त उपकरण है। संगोष्‍ठी का उद्घाटन राष्‍ट्रभाषा प्रचार समिति के सभागार में शनिवार को किया गया। कार्यक्रम की अध्‍यक्षता आईएसएमपी के चेयरमैन चंद्रशेखर ने की। 

इस अवसर पर विशिष्‍ट अतिथि के रूप में धरामित्र, वर्धा के अध्‍यक्ष डॉ. तारक काटे, राष्‍ट्रभाषा प्रचार समिति के प्रधानमंत्री डॉ. हेमचंद्र वैद्य, सामाजिक वनीकरण विभाग, वर्धा के उप-वनसंरक्षक सुहास बढेकर, आईएसएमपी प्रोविंशियल गवर्निंग बॉडी कार्यकारी परिषद महाराष्‍ट्र के चेयरमैन कौशल मिश्र उपस्थित थे। 

बतौर मुख्‍य अतिथि संबोधित करते हुए चिन्‍मय मिश्र ने कहा कि 13-15 वीं शताब्‍दी की अवधि में भाषा में तेजी से परिवर्तन हुआ, जिसमें तुलसीदास एवं क‍बीर ने भाषा की ताकत व पहचान बनायी। 1857-1950 का दौर भारत का दैदीप्‍यमान समय था। गांधीजी के समय काल का जिक्र करते हुए उन्‍होंने कहा कि गांधी ने शब्‍द की महत्ता को समझा और भारत की जनता से उन्‍हीं की भाषा में बात की। उन्‍होंने चरखे को हिंदी के साथ जोड़ा और देश भर में हिंदी का प्रचार-प्रसार भी किया।

उन्‍होंने कहा कि पिछले पच्चीस वर्ष के काल में भाषा को लेकर संकट पैदा हुआ है, जिससे गंभीर चिंतन को खत्‍म किया जा रहा है। भाषा और सभ्‍यता पर प्रहार हो रहा है। वर्धा का उल्‍लेख करते हुए उन्‍होंने कहा कि हम ऐसे महत्‍वपूर्ण स्‍थान पर बैठे है जहां राष्‍ट्रभाषा प्रचार समिति, सेवाग्राम आश्रम और महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय जैसी संस्‍थाएं हैं। गांधी की इस प्रयोग भूमि में नयी दुनिया को रोशणी दी है। 

अध्‍यक्षीय उद्बोधन में आईएसएमपी के चेयरमैन चंद्रशेखर ने कहा कि हमें विरासत में जो अच्‍छी चीजे मिली है उसका संरक्षण-संर्वधन करना जरूरी है। समाज में आदर्श स्‍थापित करने और नयी पिढी को मार्गदर्शन करने हमें अपनी विरासत को आगे बढ़ाना चाहिए। इस अवसर पर धरा मित्र के अध्‍यक्ष डॉ. तारक काटे और राष्‍ट्रभाषा प्रचार समिति के प्रधानमंत्री डॉ. हेमचंद्र वैद्य ने भी अपने विचार रखे।

इस अवसर पर विरासत शीर्षक की स्‍मारिका का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में उत्‍कृष्‍ट योगदान के लिए ग्राम सेवा मंडल की सदस्‍य मालती देशमुख, हिंदी विवि के जनसंचार विभाग की शोधार्थी आरती कुमारी, महात्‍मा गांधी आर्युवेद महाविद्यालय, अस्‍पताल एवं अनुसंधान केंद्र के डॉ. अक्षय पारगांवकर, उन्‍नत भारत अभियान के अंतर्गत जलसंधारण कार्य के लिए डॉ. आर. आर. चौधरी व वैशाली उगले आदि को सम्‍मान चिन्‍ह एवं स्‍मृति चिन्‍ह प्रदान कर सम्‍मानित किया गया। 

आईएसएमपी महाराष्‍ट्र के चेयरमैन कौशल मिश्र ने कार्यक्रम की भूमिका रखी तथा संस्‍थान का परिचय बी.एस. मिरगे ने दिया। कार्यक्रम का प्रारंभ दीपप्रज्‍ज्‍वलन एवं महात्‍मा गांधी के फोटो पर माल्‍यार्पण से किया गया। राष्‍ट्रभाषा विद्यालय की छात्राओं ने स्‍वागत गीत प्रस्‍तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. निलिमा मुणोत ने किया तथा आभार एड. ताम्रध्‍वज बोरकर ने जताया।

उद्घाटन समारोह में डॉ. शाहिद अली, रायपुर, सुनिल पांडेय, प्रयागराज, डॉ. ओ.पी. गुप्‍ता, सेवाग्राम, डॉ. अनिल दुबे, वर्धा, डॉ. मंगेश भोयर, डॉ. अनिर्वाण घोष, एन.एन. काजी, कोल्‍हापुर, राजेंद्र चौधरी, अभय तायडे, हेमलता, प्रदीप श्रीवास्‍तव, संपादक, प्रणाम पर्यटन, लखनऊ, शिवप्रसाद पाटील, अजगर अली तहसीलदार, रत्‍नागिरी, विजय देशपांडे, सातारा, मीनाताई इंगळे, प्रिया माली, अंजु, श्रेया जाधव, मोहन मसराम आदि सहित राष्‍ट्रभाषा विद्यालय के शिक्षक एवं विद्यार्थी बड़ी संख्‍या में उपस्थित थे।