- आईसीसी-एनारॉक रिपोर्ट: 3बीएचके और उससे बड़े घरों की मांग कुल खरीदारों का लगभग 50%, बड़े घरों की ओर बढ़ा रुझान
- आईसीसी रियल एस्टेट समिट 2026 में मूल्य आधारित विकास, नीतियों का तालमेल और भारत के अगले शहरी विकास पर ध्यान
नई दिल्ली (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) द्वारा आयोजित ‘आईसीसी रियल एस्टेट समिट 2026’ में इंडस्ट्री के प्रमुख लोगों ने एक महत्वपूर्ण बात कही। उनका कहना था कि भारत का रियल एस्टेट सेक्टर अब एक समझदार और भरोसेमंद दौर में पहुँच गया है, जहाँ केवल दिखावे पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता और मूल्य पर जोर है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव सरकारी सुधारों, बड़े निवेशकों के बढ़ते भरोसे और घर खरीदने वालों की बदलती पसंद की वजह से आया है। आज आयोजित इस समिट का विषय था “पावरिंग इंडियाज $5 ट्रिलियन ड्रीम”, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि भारतीय प्रॉपर्टी बाजार अब पहले से कहीं अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बन चुका है।
इस समिट में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) के चेयरमैन श्री संजय आर. भूसरेड्डी (IAS) शामिल हुए। इस मौके पर आईसीसी-एनारॉक की एक अहम रिपोर्ट भी जारी की गई, जिसका शीर्षक है-“इंडियन रेजिडेंशियल रियल एस्टेट: अ रिव्यू एंड रोड अहेड”।
रिपोर्ट में बताया गया कि 2025 में देश के शीर्ष 7 शहरों में घरों की बिक्री में साल-दर-साल लगभग 14% की गिरावट आई और यह करीब 3.96 लाख यूनिट्स रही। हालांकि, कुल लेन-देन का मूल्य 6% बढ़कर 6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव इस बात का संकेत है कि भारतीय रियल एस्टेट अब केवल मात्रा (Volume) पर नहीं, बल्कि मूल्य (Value) पर आधारित विकास की दिशा में बढ़ रहा है।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) के चेयरमैन, संजय आर. भूसरेड्डी (IAS) ने रियल एस्टेट में नियामक स्थिरता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “आवास एक बुनियादी मानवीय आवश्यकता है और अगले दो दशकों में रियल एस्टेट भारत और उत्तर प्रदेश की आर्थिक वृद्धि के सबसे मजबूत इंजन में से एक बनेगा। उत्तर प्रदेश में यह सेक्टर राज्य की जीडीपी में लगभग 13–15% का योगदान दे रहा है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। नियमों की स्पष्टता, प्रोजेक्ट्स को तेज़ मंज़ूरी और डेवलपर्स के बढ़ते भरोसे के कारण यह सेक्टर लगातार आगे बढ़ रहा है। यूपी रेरा का मुख्य ध्यान प्रोजेक्ट्स की समय पर डिलीवरी, ग्राहकों का भरोसा और व्यवसाय करने में आसानी (‘Ease of Doing Business’) पर है। हमारा लक्ष्य है कि यह विकास स्थायी, पारदर्शी और समावेशी बने।”
उद्घाटन सत्र में बोलते हुए एनारॉक (ANAROCK) ग्रुप के चेयरमैन और संस्थापक, अनुज पुरी ने रियल एस्टेट में मांग के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “साल 2021 में 75 लाख रुपये से कम कीमत वाले घर कुल बिक्री का लगभग 60% हिस्सा थे, जो अब घटकर केवल करीब 32% रह गए हैं। इसके विपरीत, बढ़ती आय और बेहतर जीवनशैली की चाहत के कारण लक्जरी और अल्ट्रा-लक्जरी घरों का बाज़ार तेजी से बढ़ा है।”
पुरी ने आगे बताया, “4 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले लग्जरी घर अब शीर्ष 7 शहरों की कुल बिक्री का लगभग 18–20% हिस्सा बनाते हैं, जबकि महामारी से पहले यह केवल 1–2% था। अल्ट्रा-लक्जरी सेगमेंट, यानी 40 करोड़ रुपये और उससे अधिक कीमत वाले घर, की बिक्री में 2025 में करीब 66% का जोरदार उछाल देखा गया। इन बड़े सौदों में अकेले मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) की हिस्सेदारी 70% से अधिक रही।”
इंडस्ट्री की मुख्य बात रखते हुए सेंट्रल पार्क (Central Park) के प्रबंध निदेशक अमरजीत बख्शी ने कहा, “रियल एस्टेट सिर्फ एक उद्योग नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण की एक प्रक्रिया है और भारत की जीडीपी में सबसे बड़े योगदान देने वाले क्षेत्रों में से एक है। हर स्टेकहोल्डर, चाहे वह डेवलपर, फाइनेंसर, आर्किटेक्ट या नीति निर्माता हो की जिम्मेदारी केवल मुनाफा कमाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उससे कहीं अधिक है।”
उन्होंने आगे कहा, “गुणवत्ता, ईमानदारी और भरोसा ही वे तत्व हैं जो दीर्घकालिक मूल्य पैदा करते हैं, संस्थाओं को मजबूत बनाते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि रियल एस्टेट सेक्टर भारत की विकास गाथा में लगातार सार्थक योगदान देता रहे।”
इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) के महानिदेशक, डॉ. राजीव सिंह का कहना है कि “रियल एस्टेट की मांग में एक बड़ा ढांचागत बदलाव साफ देखा जा रहा है। बढ़ती आय और बदलती जीवनशैली के कारण अब किफायती आवास (Affordable Housing) की जगह लक्जरी सेगमेंट ले रहा है। टियर-I शहर इस बदलाव का नेतृत्व कर रहे हैं, वहीं टियर-II बाजार भी तेजी से अपनी पकड़ बना रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “आज घर खरीदारों की पसंद भी बदल गई है। अब लोग ऐसे बड़े घर चाहते हैं जो न केवल रहने के काम आएं, बल्कि स्वास्थ्य और आरामदायक सुविधाओं (Wellness & Amenities) से भी भरपूर हों। यही रुझान आज आवासीय संपत्तियों की नई परिभाषा तय कर रहा है।”
आईसीसी-एनारॉक रिपोर्ट ने खरीदारों की बदलती प्राथमिकताओं पर भी खास ध्यान दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, अब 3BHK और उससे बड़े घरों की मांग कुल मांग का लगभग 45–50% हो गई है, जबकि साल 2018 में यह केवल लगभग 30% थी।
साथ ही, लक्जरी हाउसिंग सेगमेंट में भी तेज़ी आई है। प्रमुख शहरों में 4 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले घर अब कुल बिक्री का लगभग 18–20% हिस्सा बनाते हैं। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि अब भारतीय रियल एस्टेट बाजार केवल किफायती घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े और लक्जरी घरों की तरफ भी खरीदारों की रुचि बढ़ रही है।
सप्लाई (आपूर्ति) के मामले में अब लिस्टेड और ग्रेड-A डेवलपर्स कुल आवासीय सप्लाई का लगभग 45% संभाल रहे हैं, जो इस सेक्टर के पेशेवर और संस्थागत स्वरूप की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। देश की मजबूत अर्थव्यवस्था, निजी खपत में तेजी, बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर बढ़ता निवेश और जीडीपी के मुकाबले होम लोन का कम अनुपात (लगभग 11%) इस सेक्टर के दीर्घकालिक विकास और मजबूती को लगातार समर्थन दे रहे हैं।
इस समिट में आवास नीति, कमर्शियल रियल एस्टेट, फाइनेंसिंग और डिजिटल बदलाव पर उच्च स्तरीय चर्चाओं के जरिए यह स्पष्ट किया गया कि भारतीय रियल एस्टेट अब केवल एक उतार-चढ़ाव वाला पारंपरिक सेक्टर नहीं रहा। यह अब आर्थिक विकास, शहरी परिवर्तन और पूंजी निर्माण का एक रणनीतिक स्तंभ बन चुका है।
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