लखनऊ (शम्भू शरण वर्मा/टेलीस्कोप टुडे)। रेल यात्रियों को बेहतर सुरक्षा मुहैया कराने व ट्रेनों में होने वाले वारदातों पर अंकुश लगाने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (RPF) अहम जिम्मेदारी निभा रहा है। जिसके लिए रेलवे स्टेशनों के साथ ही ट्रेन के कोचों में भी सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। रविवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में डीजी, आरपीएफ मनोज यादव ने आरपीएफ द्वारा यात्रियों की सुरक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे सुरक्षा उपायों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 1957 के आरपीएफ अधिनियम के तहत स्थापित, रेलवे सुरक्षा बल 2004 से रेलवे संपति की सुरक्षा व यात्रियों और उनके सामानों को सुरक्षा प्रदान करने में सहायक रहा है। बल ने अपनी मुख्य भूमिका रेलवे संपति की सुरक्षा से अतिरिक्त, खुद को विकसित कर यात्री सुरक्षा एवं यात्री सुविधा को सुदृढ़ करने में भी अपना अहम योगदान दिया है। रेलवे सुरक्षा बल को राष्ट्र की जीवन रेखा, भारतीय रेलवे को सुरक्षा प्रदान करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। उल्लेखनीय है कि आरपीएफ में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 9% है जो भारत के सभी सशस्त्र बलों में सबसे अधिक है।

उन्होंने बताया कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा राशि निर्धारित की गई है, जो निर्भया योजना के तहत सीसीटीवी कैमरों की स्थापना के लिए है। इसके तहत अधिकांश प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर सीसीटीवी के माध्यम से निगरानी रखी जा रही है। जबकि अन्य स्टेशनों पर भी जल्द ही सीसीटीवी कैमरे लग जाएंगे। इसके अलावा ट्रेन के प्रत्येक कोच में भी 6 सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे है और अब तक करीब 8 हजार कोच में कैमरे लगाए जा चुके है। वहीं ट्रेनों में बड़ी आपराधिक वारदातों को रोकने के लिए यात्रियों के सामान की स्कैनिंग भी की जाती है।
उन्होंने कहा कि ट्रेनों की सुरक्षा प्रदान करने का एक श्रेष्ठ तरीका नहीं हो सकता है क्योंकि बड़ी संख्या में ट्रेनों के साथ-साथ आरपीएफ और जीआरपी दोनों में मानव संख्या की कमी है। इसलिए, आरपीएफ और जीआरपी के दोनों बलों को समन्वयित किया गया है और अपराध प्रवृत्ति अनुसार स्पेशल ट्रेनों जैसे वंदे भारत, राजधानी, दुरंतो आदि में सुरक्षा प्रदान की जाती है।
“मेरी सहेली” नामक पहल ने अकेले यात्रा करने वाली महिलाओं की सुरक्षा के लिए ख्याति प्राप्त की है। इन महिला यात्रियों को भारत के सभी प्रमुख स्टेशनों पर महिला आरपीएफ कर्मियों द्वारा सहायता प्रदान की जाती है। इस अभियान के तहत 230 टीमें 419 ट्रेनों को कवर कर रही हैं।
“नन्हे फ़रिश्ते” नामक पहल में आरपीएफ कर्मियों द्वारा एनजीओ के साथ, रेलवे परिसर में पाये जाने वाले बच्चों को उनके परिवारों से पुनः जोड़ने में मदद की जाती है। इस पहल के तहत वर्ष 2022 में, 17,000 बच्चे बरामद हुए और 2023 में, 11,000 बच्चे बरामद हुए।
“ऑपरेशन आहट” जिसे आरपीएफ द्वारा बचपन बचाओ आंदोलन की सहायता से संचालित किया जा रहा है, एवं इसके तहत मानव तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। जिसके अंतर्गत वर्ष 2023 में, आरपीएफ ने 1048 व्यक्तियों को बचाया गया है।
नशीले पदार्थ जो इस देश के युवाओं को नष्ट कर रहे हैं और रेलवे के माध्यम से परिवहन किए जा रहे हैं, उस पर काबू पाने के लिए आरपीएफ द्वारा नारकोस ऑपरेशन चलाया जा रहा है और 40 करोड़ की नारकोटिक्स की बरामदी की गई है।
डीजी ने बताया कि आरपीएफ कर्मियों में मानसिक स्वास्थ्य की समस्या को संबोधित करने के लिए, बल योजनाओं को पुनः मूल्यांकन करने और पर्यवेक्षकीय अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण संगठित करने की योजना है। साथ ही, आरपीएफ ने रेलवे बोर्ड से मानसिक स्वास्थ्य मूल्यांकन को मेडिकल जाँचों में शामिल करने की अपील की है। पेशेवर व्याख्यानों का भी आयोजन किया जाएगा ताकि आरपीएफ कर्मियों के बीच जागरूकता बढ़ाई जा सके।
पत्रकार वार्ता में मुनव्वर खुर्शीद, (पीसीएससी/एसईसीआर), बीवी राव (आईजी-कम-निदेशक, जेआरआरपीएफ अकादमी), डॉ. एएन झा (डीआईजी-प्रशिक्षण, जेआरआरपीएफए) और सारिका मोहन (डीआईजी-स्थापना, आरपीएफ) के अलावा दिलीप शुक्ला (संयुक्त निदेशक, पीआईबी) भी मौजूद थे।
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