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RGIPT-CHT की साझेदारी से खुलेंगे ऊर्जा क्षेत्र में शोध और उद्यमिता के नए रास्ते

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। राजीव गांधी पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी संस्थान (आरजीआईपीटी) और सेंटर फॉर हाई टेक्नोलॉजी (सीएचटी) ने पेट्रोलियम, पेट्रोकेमिकल और ऊर्जा क्षेत्रों में अनुसंधान, नवाचार तथा प्रौद्योगिकी विकास के लिए उद्योग–शिक्षा जगत के सहयोग को सुदृढ़ करने हेतु एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

गोवा में आयोजित एनर्जी टेक्नोलॉजी मीट (ईटीएम 2026) के दौरान सीएचटी के कार्यकारी निदेशक शंकर गुणशेखरन और आरजीआईपीटी के निदेशक प्रो. हरीश हिरानी के बीच समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान हुआ। इस अवसर पर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल तथा संयुक्त सचिव आलोक त्रिपाठी उपस्थित थे।

औद्योगिक चुनौतियों के समाधान के लिए संयुक्त पीएच.डी. फेलोशिप

आरजीआईपीटी के निदेशक प्रो. हरीश हिरानी ने बताया कि समझौते का एक प्रमुख घटक प्रस्तावित सीएचटी–आरजीआईपीटी संयुक्त पीएच.डी. अनुसंधान फेलोशिप कार्यक्रम है। जिसका उद्देश्य शोधार्थियों को पेट्रोलियम, पेट्रोकेमिकल और ऊर्जा उद्योगों की वास्तविक चुनौतियों पर शोध करने का अवसर प्रदान करना है।

कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिवर्ष अधिकतम तीन शोधार्थियों का नामांकन किया जा सकेगा, जिसे सहमत प्रावधानों के अधीन बढ़ाकर पाँच किया जा सकता है। किसी भी समय अधिकतम 10 फेलो को सहायता दी जाएगी। चयनित शोधार्थियों को प्रचलित सीएसआईआर/यूजीसी-नेट/गेट फेलोशिप दरों से 25 प्रतिशत अधिक फेलोशिप तथा अन्य अनुमन्य लाभ प्राप्त होंगे।

शोधार्थी आरजीआईपीटी के संकाय सदस्यों और सीएचटी अथवा उसके औद्योगिक भागीदारों द्वारा नामित विशेषज्ञों के संयुक्त मार्गदर्शन में उद्योग-संबंधित अनुसंधान समस्याओं पर कार्य करेंगे। शोध के प्रमुख क्षेत्रों में हरित हाइड्रोजन, ईंधन सेल, उन्नत बैटरियाँ, संक्षारण अभियांत्रिकी, कार्बन कैप्चर एवं उपयोग, कच्चे तेल से रसायन उत्पादन, उत्प्रेरक, जैव ईंधन, अपशिष्ट मूल्यवर्धन, डिजिटलीकरण और ऊर्जा दक्षता शामिल हैं।

डॉक्टोरल शोधार्थियों को औद्योगिक चुनौतियों से सीधे जोड़कर यह कार्यक्रम अनुसंधान की व्यावहारिक प्रासंगिकता बढ़ाने, स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास को प्रोत्साहित करने और वैज्ञानिक ज्ञान को औद्योगिक अनुप्रयोगों में तेजी से रूपांतरित करने का लक्ष्य रखता है।

अनुसंधान प्रयोगशालाओं से ऊर्जा स्टार्टअप तक

समझौता ज्ञापन में आशाजनक अनुसंधान परिणामों को प्रौद्योगिकियों, उत्पादों और उद्यमशील पहलों में बदलने की संभावनाएँ भी शामिल हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तत्वावधान में स्थापित भारत के ऊर्जा नवाचार मंच और एक्सेलरेटर, एमसी2 फाउंडेशन, के साथ सहभागिता के माध्यम से प्रायोजित अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास और अनुसंधान परिणामों के व्यावसायीकरण की संभावनाएँ तलाशी जाएँगी।

इस पहल के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण अवसर समझौता ज्ञापन में शामिल क्षेत्रों में पीएच.डी. शोधार्थियों द्वारा अनुसंधान-आधारित स्टार्टअप विकसित करना है। आशाजनक अनुसंधान प्रयोगशाला-स्तरीय परीक्षण से आगे बढ़कर अवधारणा-सत्यापन, प्रोटोटाइप विकास और जहाँ व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य हो, प्रौद्योगिकी-आधारित उद्यमों की स्थापना तक पहुँच सकता है।

उचित तकनीकी मार्गदर्शन, उद्योग सहभागिता, मेंटरशिप और इनक्यूबेशन सहायता से शोधार्थी ऊर्जा उत्पादन, प्रसंस्करण, दक्षता, स्थिरता और औद्योगिक सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के समाधान तलाश सकेंगे। ऐसे उद्यम स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास, रोजगार सृजन और भारत के ऊर्जा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में योगदान दे सकते हैं।

यह पहल आरजीआईपीटी की उस व्यापक प्रतिबद्धता को दर्शाती है जिसके अंतर्गत अनुसंधान को अकादमिक प्रकाशनों से आगे ले जाकर उपयोगी परिणामों में बदला जा सके और शोधार्थियों को अकादमिक, अनुसंधान तथा उद्योग में करियर के साथ उद्यमिता के विकल्पों पर भी विचार करने का अवसर मिले।

संयुक्त परीक्षण सुविधाएँ और उद्योगोन्मुख अनुसंधान

समझौते में पेट्रोलियम एवं ऊर्जा उद्योगों की तकनीकी चुनौतियों के समाधान के लिए आरजीआईपीटी परिसरों में संयुक्त परीक्षण सुविधाएँ स्थापित करने की परिकल्पना भी की गई है। इन सुविधाओं से प्रयोगात्मक क्षमताओं को मजबूती, प्रौद्योगिकी सत्यापन में सहायता और औद्योगिक भागीदारों के साथ सहयोगी अनुसंधान को समर्थन मिलने की अपेक्षा है।

दोनों संगठन रिफाइनरियों, पेट्रोकेमिकल प्रतिष्ठानों और उभरती ऊर्जा प्रणालियों में संभावित अनुप्रयोगों वाली दीर्घकालिक उद्योग-प्रायोजित अनुसंधान परियोजनाओं के अवसर तलाशेंगे। औद्योगिक भागीदारों के साथ सहयोग से अनुसंधान प्राथमिकताओं को परिचालन संबंधी आवश्यकताओं और उभरती तकनीकी जरूरतों के अनुरूप बनाने में भी मदद मिलेगी।

क्षमता निर्माण और उद्योग सहभागिता

तेजी से बदलते ऊर्जा परिदृश्य में विशिष्ट कौशलों के महत्व को ध्यान में रखते हुए आरजीआईपीटी और सीएचटी भारतीय रिफाइनरियों के सहयोग से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संयुक्त रूप से आयोजित करेंगे।

इन कार्यक्रमों में पेट्रोलियम रिफाइनिंग, पेट्रोकेमिकल्स, परिसंपत्ति अखंडता, प्रक्रिया सुरक्षा, हरित हाइड्रोजन, डिजिटल प्रौद्योगिकियाँ, ऊर्जा संक्रमण और सतत ऊर्जा प्रणालियाँ शामिल होंगी। इन पहलों से अकादमिक विशेषज्ञों और उद्योग पेशेवरों के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान होगा तथा ऊर्जा क्षेत्र के कार्यबल की तकनीकी क्षमताएँ मजबूत होंगी।

आरजीआईपीटी, सीएचटी की गतिविधि समिति की बैठकों में भी भाग लेगा, ताकि रिफाइनरियों की परिचालन चुनौतियों को प्रत्यक्ष रूप से समझा जा सके और अनुसंधान-आधारित समाधानों के अवसर पहचाने जा सकें। दोनों संगठन पेट्रोलियम और ऊर्जा क्षेत्रों में नीति निर्माण एवं रणनीतिक चिंतन को सहयोग देने के लिए एक ऊर्जा थिंक टैंक स्थापित करने की योजना भी बना रहे हैं।

भारत के ऊर्जा भविष्य को सुदृढ़ बनाना

आरजीआईपीटी पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है, जो पारंपरिक और उभरते ऊर्जा क्षेत्रों में शिक्षा, अनुसंधान तथा प्रौद्योगिकी विकास में सक्रिय है। सीएचटी मंत्रालय की समर्पित प्रौद्योगिकी इकाई के रूप में हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में तकनीकी उन्नति और उद्योग की बदलती जरूरतों के समाधान में सहयोग करता है।

पाँच वर्षीय यह समझौता दोनों संगठनों के बीच सतत सहयोग की रूपरेखा स्थापित करता है, जिसमें अकादमिक विशेषज्ञता, औद्योगिक अनुभव और उद्यमशील अवसरों का समन्वय होगा। डॉक्टोरल अनुसंधान, परीक्षण अवसंरचना, विशिष्ट प्रशिक्षण, उद्योग साझेदारी और स्टार्टअप विकास को जोड़कर यह सहयोग ज्ञान सृजन और उसके व्यावहारिक उपयोग के बीच संबंध मजबूत करने का प्रयास करता है।

यह साझेदारी भारत की ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी आत्मनिर्भरता और सतत ऊर्जा संक्रमण को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही, यह युवा शोधार्थियों के लिए नवप्रवर्तक, प्रौद्योगिकी विकासकर्ता और उद्यमी बनने के नए अवसर उत्पन्न करती है।