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कृभको का किसान हित पर जोर, यूपी में 80 हजार क्विंटल प्रमाणित गेहूं बीज की आपूर्ति

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। कृषक भारती कोऑपरेटिव लिमिटेड (कृभको) उत्तर प्रदेश के किसानों को हर साल रबी फसलों की बुवाई से पहले करीब 80 हजार क्विंटल प्रमाणित गेहूं बीज की आपूर्ति करता है। इसके साथ ही, अपने बीज उगाने वाले किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के ऊपर लगभग 200 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त प्रोत्साहन (इंसेंटिव) भी देता है। किसानों की प्रमुख सहकारी संस्था ‘कृभको’ के उत्तर प्रदेश राज्य प्रबंधक ऋषिपाल सिंह राठौर ने मंगलवार को लखनऊ में आयोजित एक कार्यशाला में यह जानकारी दी।

फोरम फॉर इंडियन जर्नलिस्ट्स ऑन एजुकेशन, एनवायरनमेंट, हेल्थ एंड एग्रीकल्चर’ द्वारा ‘एलायंस फॉर चेंज, ट्रांसफॉर्मेशन एंड इनोवेशन’ के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में ऋषिपाल सिंह राठौर ने बताया कि बीज कृभको के गोरखपुर, औराई, शाहजहांपुर और गजरोला स्थित संयंत्रों में तैयार (प्रोसेस) किया जाता है। इसके बाद प्रमाणित और टैग लगे 40 किलोग्राम के बैगों में यह किसानों तक पहुँचता है। यह सहकारी संस्था चना और मसूर के बीजों की भी आपूर्ति करती है।

श्री राठौर ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक बाजारों में बनी अनिश्चितता के बावजूद, भारत सरकार के मजबूत संकल्प के बल पर उत्तर प्रदेश में उर्वरकों (खाद) की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य और सुचारू बनी हुई है। कृभको उत्तर प्रदेश में हर साल 10 से 12 लाख मीट्रिक टन यूरिया और लगभग 3 लाख मीट्रिक टन डीएपी की आपूर्ति करता है। इसके साथ ही एसएसपी, जिंक सल्फेट, सूक्ष्म पोषक तत्व (माइक्रोन्यूट्रीएंट्स), जैविक खाद और जैव उर्वरक (बायो-फर्टिलाइजर) भी उपलब्ध कराए जाते हैं।

कृभको के राज्य प्रबंधक ने कहा, किसानों के साथ हमारा रिश्ता सिर्फ उत्पाद बेचने तक सीमित नहीं है। हमारा उद्देश्य मिट्टी और पानी को सुरक्षित रखते हुए हर किसान को सक्षम, जागरूक, आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाना है, ताकि वे कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल कर सकें। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में कृभको करीब 8,000 सहकारी समितियों, 10,000 निजी विक्रेताओं और 42 कृभको कृषक सेवा केंद्रों के माध्यम से किसानों तक कृषि सामग्री पहुंचा रहा है। संस्था का प्रयास है कि उर्वरक, बीज और अन्य कृषि एवं प्राकृतिक उत्पाद किसानों को सही समय पर, उचित मूल्य पर और उनके नजदीक उपलब्ध हों।

ऋषिपाल सिंह राठौर ने कहा कि कृभको की भूमिका केवल उर्वरक उत्पादन और वितरण तक सीमित नहीं है। संस्था का मुख्य उद्देश्य किसान की खेती की लागत कम करने, उत्पादन बढ़ाने, मिट्टी का स्वास्थ्य बनाए रखने और उसकी आय में वृद्धि करने में सहयोग देना है। उन्होंने कहा कि किसान केवल संस्था का ग्राहक नहीं, बल्कि पूरी कार्यप्रणाली के केंद्र में है।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश कृषि प्रधान प्रदेश है और किसान की खुशहाली का सीधा असर प्रदेश और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। किसान समृद्ध होगा तो प्रदेश और देश भी समृद्ध होगा। इसलिए किसानों को सही कृषि सामग्री उपलब्ध कराने के साथ उन्हें उसके उचित उपयोग की जानकारी और तकनीकी मार्गदर्शन देना भी जरूरी है।

राठौर ने कहा कि खेती में केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। यदि उत्पादन की लागत अधिक है और किसान को उपज का उचित मूल्य नहीं मिलता, तो उसकी वास्तविक आय नहीं बढ़ सकती। इसलिए कृभको संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य, आधुनिक कृषि तकनीक, जैव उर्वरक और कम लागत में अधिक आय जैसे विषयों पर किसानों को जागरूक कर रहा है।

राज्य प्रबंधक ने कहा कि केवल कृषि उत्पाद किसान तक पहुंचा देना पर्याप्त नहीं है। उसे यह भी जानकारी होनी चाहिए कि किस फसल और किस प्रकार की मिट्टी में कौन सा कृषि निवेश कितनी मात्रा में और किस समय किया जाना चाहिए। सही सामग्री, सही समय और सही सलाह बेहतर खेती की पहली शर्त है। इसी उद्देश्य से कृभको की ओर से किसानों, सहकारी अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, किसान गोष्ठियां और किसान हितैषी गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को नई कृषि तकनीकों, विभिन्न फसलों में उर्वरकों के संतुलित प्रयोग और खेती की बेहतर पद्धतियों की जानकारी दी जाती है।

शाहजहांपुर में हाईटेक आलू प्रसंस्करण इकाई स्थापित करेगा कृभको

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में कृभको की शत-प्रतिशत स्वामित्व वाली सहायक कंपनी ‘कृभको फर्टिलाइजर्स लिमिटेड’ का शाहजहांपुर में संयंत्र है। इस संयंत्र ने वर्ष 2025-26 में अपनी स्थापित क्षमता से अधिक उत्पादन करते हुए 11.02 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 6.68 लाख मीट्रिक टन अमोनिया का उत्पादन किया है। कृभको ने इस संयंत्र के पास एक हाई-टेक आलू प्रसंस्करण (पोटैटो प्रोसेसिंग) इकाई स्थापित करने के लिए डच कंपनी ‘फार्म फ्राइट्स’ के साथ एक संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) भी किया है।

देश में कृभको के तीन जैव-उर्वरक संयंत्रों में से एक इसके वाराणसी संयंत्र में स्थित है, जहाँ राइजोबियम और एज़ोटोबैक्टर सहित विभिन्न प्रकार के बायो-फर्टिलाइजर तैयार किए जाते हैं।फिजीहा के प्रेसिडेंट डॉ. नवनीत आनंद ने कहा, ‘उत्तर प्रदेश हर साल रबी सीजन में देश की खाद्य सुरक्षा का एक बड़ा दायित्व निभाता है। हजारों ग्रामीण सहकारिताओं के माध्यम से कृभको का कार्य यह दर्शाता है कि ‘सहकार से समृद्धि’ की भारत सरकार की सोच धरातल पर कैसे साकार होती है, जहाँ किसानों की अपनी संस्था के जरिए उन तक बीज, पोषक तत्व और आधुनिक कृषि तकनीक पहुंच रही है।’

कार्यशाला में डॉ. बी.आर. आंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के समाजशास्त्र विभाग के प्रोफेसर मनीष वर्मा ने कहा, ‘उत्तर प्रदेश में गांव की प्राथमिक कृषि ऋण समिति (PACS) या सहकारी समिति अक्सर औपचारिक कृषि व्यवस्था के साथ किसान की पहली कड़ी होती है। जब कृभको जैसी संस्था पैक्स (PACS) के माध्यम से काम करती है, तो यह केवल कृषि इनपुट की आपूर्ति ही नहीं बढ़ाती, बल्कि गांव के सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करती है। इससे छोटे और सीमांत किसान परिवारों में विश्वास और आर्थिक सुरक्षा की भावना पैदा होती है।’

उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र को मजबूत किया जाएगा। देश की बड़ी आबादी आज भी गांवों में रहती है और उसकी आजीविका कृषि पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि हरित क्रांति ने देश को खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। ऐसे में विकास के साथ पर्यावरण और स्वास्थ्य का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कृभको के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था पर्यावरण अनुकूल उर्वरक और कृषि उत्पादों के साथ किसानों को सशक्त बनाने तथा ग्रामीण परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।

फिजीहा के प्रेसिडेंट डॉ. नवनीत आनंद ने कहा, ‘उत्तर प्रदेश हर साल रबी सीजन में देश की खाद्य सुरक्षा का एक बड़ा दायित्व निभाता है। हजारों ग्रामीण सहकारिताओं के माध्यम से कृभको का कार्य यह दर्शाता है कि ‘सहकार से समृद्धि’ की भारत सरकार की सोच धरातल पर कैसे साकार होती है, जहाँ किसानों की अपनी संस्था के जरिए उन तक बीज, पोषक तत्व और आधुनिक कृषि तकनीक पहुंच रही है।’