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तीर्थ विकास से पर्यटन को गति, कामाख्या मंदिर पहुंचा यूपी का मीडिया दल

गुवाहाटी (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करने और देश की समृद्ध आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से मीडिया प्रतिनिधियों को परिचित कराने के उद्देश्य से पत्र सूचना कार्यालय (PIB), लखनऊ के नेतृत्व में असम के मीडिया दौरे पर आए उत्तर प्रदेश के मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने नीलाचल पहाड़ी पर प्रसिद्ध माँ कामाख्या देवी मंदिर के दर्शन किए।

मंदिर के पुजारी प्रांजीत शर्मा ने मीडिया प्रतिनिधिमंडल को माँ कामाख्या मंदिर के धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि माँ कामाख्या देवी मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है और शक्ति उपासना की महत्वपूर्ण परंपरा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने मंदिर की पूजा-पद्धति, धार्मिक परंपराओं और यहां आयोजित होने वाले प्रमुख अनुष्ठानों के बारे में भी मीडिया प्रतिनिधियों को जानकारी दी।

प्रांजीत शर्मा ने कहा कि माँ कामाख्या देवी मंदिर केवल असम ही नहीं, बल्कि पूरे देश की आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु यहां आकर माँ कामाख्या का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मीडिया दौरे देश के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को भारत की विविध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मीडिया प्रतिनिधिमंडल को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा वर्ष 2014-15 में शुरू की गई PRASAD (Pilgrimage Rejuvenation and Spiritual Augmentation Drive) योजना के बारे में भी जानकारी दी गई। अक्टूबर 2017 में इस योजना का नाम बदलकर “National Mission on Pilgrimage Rejuvenation, Spiritual and Heritage Augmentation Drive (PRASHAD)” किया गया।

PRASHAD योजना के माध्यम से देश के प्रमुख तीर्थ एवं आध्यात्मिक स्थलों पर पर्यटन से जुड़ी सुविधाओं के विकास, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। योजना का उद्देश्य तीर्थ स्थलों को योजनाबद्ध तरीके से विकसित कर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना है।

माँ कामाख्या देवी मंदिर नीलाचल पहाड़ी पर स्थित है और असम की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। यह मंदिर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आस्था का केंद्र है।

प्रांजीत सरमा ने बताया कि मंदिर की धार्मिक परंपराओं और असम की संस्कृति को जानने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले लोगों की रुचि बनी हुई है। उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन से क्षेत्र की स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलती है तथा स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं आजीविका के अवसर भी सृजित होते हैं।

मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने मंदिर परिसर में दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर मंदिर की धार्मिक परंपराओं, ऐतिहासिक महत्व तथा क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाओं की जानकारी प्राप्त की। प्रतिनिधिमंडल ने असम की आध्यात्मिक विरासत को करीब से जानने और इसे देश के अन्य हिस्सों के लोगों तक पहुंचाने के अनुभव को महत्वपूर्ण बताया।

PRASHAD योजना के तहत तीर्थ स्थलों के विकास से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार, आजीविका और आर्थिक गतिविधियों के अवसर भी बढ़ रहे हैं। इससे देश की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए पर्यटन विकास को गति देने में मदद मिल रही है।

उत्तर प्रदेश के मीडिया प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना के अनुरूप विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और पर्यटन विरासत को एक-दूसरे से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।