लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। पुराने लखनऊ में अकबरी गेट के पास चाईनीज मांझे की चपेट में आये बाईक सवार युवक की आंख बच गयी। वहीं पत्नी और नाबालिग पुत्र मांझे की चपेट में आने से बाल-बाल बच गये। प्राप्त जानकारी के मुताबिक स्वतंत्रता दिवस के दिन सायं साढ़े चार बजे चौपटिया में अपने रिश्तेदार से मिलकर अमीनाबाद क्षेत्र के नाला फतेहगंज स्थित अपने आवास की ओर बाईक से परिवार के साथ लौटते वक्त संदीप त्रिपाठी के साथ यह हादसा अकबरी गेट पर हुआ।
इस हादसे में चाईनीज मांझे की चपेट में आने के बाद संदीप की एकाएक आंखों के ऊपर की पलक के पास खाल कट गयी। खून निकलता देख आसपास के लोग इकट्ठा हो गये और संदीप को निजी नर्सिंग होम ले गए। जहां डाॅक्टरों के अभाव में इलाज नहीं हो सका, तब तत्काल बलरामपुर हास्पिटल के इमरजेन्सी में पहुंचे जहां उनका इलाज हुआ और आंखों के ऊपर टांके लगाकर घर भेज दिया।
चाईनीज मांझे से हुये इस हादसे ने न सिर्फ चपेट में युवक व उसके परिवार को झकझोर कर रख दिया। बल्कि प्रशासन पर सवाल उठा दिये है कि बिक्री पर रोक होने के बावजूद चाईनीज मांझा बाजार में खुलेआम कैसे बिक रहा है। मालूम हो कि इस साल फरवरी माह में लखनऊ में 12 दिन के अंदर चाइनीज मांझे से 10 लोगों की गर्दन कटने के मामले सामने आये थे। जिसमें से एक की तड़प-तड़पकर मौत भी हो गयी थी।
फरवरी में यह पहली घटना 5 फरवरी को हुई। उसके बाद सीएम योगी ने अफसरों को सख्त निर्देश दिए थे कि अगर किसी की जान पतंग के मांझे से गई तो इसे न रोक पाने के जिम्मेदारों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाएगा। सीएम के इस कड़े रूख के बाद लखनऊ में चाईनीज मांझे के खिलाफ बाजारों में अभियान भी चलाया गया था जिसके चलते कई जगह चाईनीज मांझों को जब्त किया गया था और दुकानदारों को इसे न बेंचने की भी चेतावनी भी दी थी। लेकिन इसके बावजूद स्वतंत्रता दिवस के दिन हुयी इस घटना ने एक बार फिर बता दिया है कि चाईनीज मांझा बेंचने वालों पर सरकार की कड़ाई का कोई असर नहीं रह गया है।
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