लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। स्वच्छ पर्यावरण आंदोलन सेना के संयोजक एवं मनकामेश्वर वार्ड के पार्षद रणजीत सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित एक पत्र में गोमती नदी की सफाई, राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) तथा संबंधित सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नदियों के संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए जिम्मेदार संस्थाएं धरातल पर अपेक्षित प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रही हैं।
रणजीत सिंह ने कहा कि वह पिछले नौ वर्षों से प्रत्येक रविवार को स्वयंसेवकों के साथ गोमती नदी के विभिन्न घाटों पर दो से तीन घंटे तक नियमित सफाई अभियान चलाते आ रहे हैं। उनका दावा है कि इस दौरान उन्होंने एनजीटी के किसी अधिकारी या कर्मचारी को मौके पर निरीक्षण करते नहीं देखा।
उन्होंने कहा कि केवल पानी के नमूनों की जांच कर रिपोर्ट तैयार करना पर्याप्त नहीं है। नदी प्रदूषण की वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित एजेंसियों को मौके पर पहुंचकर यह पता लगाना चाहिए कि प्रदूषण के स्रोत क्या हैं और किन कारणों से नदी लगातार दूषित हो रही है। उनके अनुसार, जब तक प्रदूषण के मूल कारणों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक नदी को स्वच्छ और निर्मल बनाना संभव नहीं है।
पत्र में उन्होंने यह भी कहा कि आज भी बड़ी संख्या में लोग नदियों के किनारे खुले में शौच करने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि नदी तटों पर पर्याप्त सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण किया जाना चाहिए, जिससे प्रदूषण को रोका जा सके।
रणजीत सिंह ने भारत की सांस्कृतिक विरासत और नदियों के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की नदियां हमारी सभ्यता की पहचान हैं, लेकिन सरकारी तंत्र की उदासीनता के कारण उनका प्राकृतिक स्वरूप लगातार प्रभावित हो रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री से नदी संरक्षण के लिए जिम्मेदार संस्थाओं की कार्यप्रणाली की समीक्षा कराने तथा प्रभावी और जवाबदेह व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।
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