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अल नीनो का महासंकट: भारत के 300 जिलों पर सूखे का खतरा, संयुक्त राष्ट्र की बड़ी चेतावनी…इंसानों के साथ बेजुबान भी परेशान

दुनिया भर में पड़ रही रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने जन-जीवन को बुरी तरह तहस-नहस कर दिया है। फ्रांस में आसमान से बरसती आग के कारण 1000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि जर्मनी, स्पेन और ब्रिटेन सहित कई यूरोपीय देशों में पारा इस कदर बढ़ गया है कि सड़कें तक पिघलने लगी हैं। भारत का हाल भी जुदा नहीं है; राजधानी दिल्ली, यूपी, बिहार, पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों में अब तक ढंग से मानसून नहीं पहुंचा है। इस भीषण तबाही के पीछे सबसे बड़ा विलेन ‘अल नीनो’ (El Nino) को बताया जा रहा है। अब अल नीनो को लेकर जो नया अपडेट आया है, उसने सरकार से लेकर आम जनता तक की चिंता को सौ गुना बढ़ा दिया है।संयुक्त राष्ट्र की बड़ी चेतावनी: मौसम चक्र में लगेगा विनाश का पलीताबात अगर वैश्विक असर की करें तो संयुक्त राष्ट्र संघ के सेक्रेटरी जनरल एंटोनियो गुटेरेस की चेतावनी बेहद डराने वाली है। उन्होंने साफ कहा है कि आने वाले महीनों में 90 फीसदी संभावना है कि अल नीनो हमारे दरवाजे पर दस्तक देगा। दुनिया को इसे जलवायु से जुड़ी एक गंभीर चेतावनी के तौर पर लेना चाहिए, क्योंकि अल नीनो इस गर्म होती दुनिया में आग में घी का काम करेगा। इसके असर बेहद खतरनाक, दूरगामी और सीमाओं को लांघने वाले होंगे।यह चेतावनी वर्ल्ड मेटियोरोलॉजिकल ऑर्गनाइज़ेशन (WMO) की ताजा रिपोर्ट के आधार पर आई है, जिसमें कहा गया है कि ट्रॉपिकल पैसिफिक (उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर) में समुद्र का पानी असामान्य रूप से गर्म होने की वजह से ‘अल नीनो’ की स्थिति बेहद मजबूत हो रही है। अनुमान के मुताबिक, जून से नवंबर के बीच इसके बने रहने की संभावना 90 प्रतिशत से भी अधिक है।भारत के 12 राज्यों के 300 से अधिक जिले सीधे निशाने परक्लाइमेट वार्मिंग के इस गहराते संकट के बीच पहले यह अनुमान था कि देश के केवल 111 जिलों पर ही अल नीनो का असर दिखेगा। लेकिन ताजा वैज्ञानिक आंकड़ों ने होश उड़ा दिए हैं। अब देश के 12 राज्यों के 300 से ज्यादा जिलों पर सूखे और भारी गर्मी का संकट मंडरा रहा है।इंडियन काउंसिल फॉर एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) और कृषि मंत्रालय ने वैज्ञानिक डेटा के आधार पर 315 ऐसे जिलों का आकलन किया है, जहां कम बारिश और सिंचाई की भारी कमी के कारण सूखा पड़ने की आशंका है। इनमें से 111 जिले तो ऐसे हैं जहां सिंचाई व्यवस्था 25 फीसदी से भी कम है। प्रभावित होने वाले इन राज्यों में मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा शामिल हैं।जून महीने में ही 43 फीसदी कम बरसे बदरा, खरीफ फसलों पर संकटभारतीय मौसम विभाग (IMD) की रिपोर्ट बेहद चौंकाने वाली है। इस साल 1 से 27 जून के बीच देश में औसत से 43% कम बारिश दर्ज की गई है। आमतौर पर इस अवधि में देश में 141.8 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस बार महज 80.4 मिलीमीटर पानी ही गिरा है।क्षेत्रवार बात करें तो सेंट्रल इंडिया (मध्य भारत) में मानसून की कमी सबसे ज्यादा यानी 57% रही है। पूर्वी और उत्तरपूर्वी भारत में 44%, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में 30% और उत्तर-पश्चिम भारत में औसत से 27% कम बारिश दर्ज हुई है। मानसून की इस कछुआ चाल के कारण खरीफ की फसलों (धान, मक्का, बाजरा) के उत्पादन पर बहुत बुरा असर पड़ने की पूरी आशंका है।संकट से निपटने के लिए सरकार का मेगा प्लान: रोजगार और पानी पर फोकसइस महासंकट से निपटने के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास और कृषि मंत्रालय ने युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सरकार पूरी तरह अलर्ट है। संवेदनशील राज्यों के कृषि मंत्रियों और जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए जा चुके हैं कि प्रभावित इलाकों में रोजगार की कमी न होने पाए। इसके लिए 1 जुलाई से लागू होने वाले “जी राम जी” कानून के तहत सभी जरूरतमंदों को अनिवार्य रूप से रोजगार देने के लिए फंड्स आवंटित कर दिए गए हैं।इसके साथ ही, पीने के पानी की किल्लत को दूर करने के लिए पुरानी वॉटर बॉडीज (तालाब, जलाशय, नाले, चेक डैम) को दुरुस्त किया जा रहा है और नए जलाशय बनाए जा रहे हैं। सरकार की योजना है कि पानी की अधिकता वाले क्षेत्रों से सरप्लस पानी को संकटग्रस्त जिलों में सप्लाई किया जाए।इंसानों के साथ बेजुबान भी परेशान, चारे के संकट की घेरेबंदीकमजोर मानसून का सीधा असर सिर्फ इंसानों या फसलों पर ही नहीं, बल्कि मवेशियों पर भी पड़ने वाला है। हरी घास और चारे की कमी की आशंका को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने अभी से चारे की स्टॉकिंग और सप्लाई चेन का खाका तैयार कर लिया है। जिन राज्यों में चारा सरप्लस (अतिरिक्त) है, वहां से इसे कमी वाले जिलों में भेजा जाएगा ताकि विपरीत परिस्थितियों में पशुपालकों को अपने मवेशियों को बचाने में कोई दिक्कत न आए।