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डिग्री नहीं, स्किल और इनोवेशन तय करेंगे भविष्य की सफलता : दीपक बागला


नई दिल्ली (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन के मिशन डायरेक्टर, दीपक बागला ने कहा है कि भारत में एंटरप्रेन्योरशिप को लेकर लोगों की सोच और मानसिकता में बहुत बड़ा बदलाव आ रहा है। उन्होंने कहा कि ‘स्टार्टअप इंडिया’ मिशन की शानदार सफलता इस बदलते भारत का सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष प्रमाण है।

यहाँ आयोजित ‘एनडीटीवी लर्ननेक्स्ट कॉन्क्लेव 2026’ (NDTV LearnNXT Conclave 2026) में बोलते हुए दीपक बागला ने कहा कि एंटरप्रेन्योरशिप अब सिर्फ एक वैकल्पिक करियर विकल्प नहीं रह गया है, बल्कि युवाओं की पहली पसंद बन रहा है। उन्होंने कहा, “मैं देश में इस बदलाव को साफ तौर पर होते देख रहा हूँ। प्रधानमंत्री जी ने भी कहा था कि यह पूरी लड़ाई मानसिकता को बदलने की है, और आज उद्यमिता देश के विकास के केंद्र बिंदु में आ चुकी है।”

दीपक बागला ने बताया कि अटल इनोवेशन मिशन, अटल टिंकरिंग लैब्स और स्टार्टअप इंडिया जैसे प्रमुख कार्यक्रमों की शुरुआत देश में एक ऐसे प्रगतिशील समाज की नींव रखने के लिए की गई थी, जो पूरी तरह से नए विचारों (इनोवेशन) और उद्यमिता पर आधारित हो।

स्टार्टअप की दुनिया में भारत का डंका स्टार्टअप इंडिया की उपलब्धियों को साझा करते हुए उन्होंने कहा, “यह मिशन एक ऐतिहासिक सफलता रहा है। आज भारत यूनिकॉर्न्स की संख्या के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर है, कुल स्टार्टअप्स के मामले में दूसरे नंबर पर है, और हर दिन जुड़ने वाले नए स्टार्टअप्स की संख्या के मामले में हम पूरी दुनिया में पहले स्थान पर हैं। यह न केवल हमारी सरकारी नीतियों की सफलता को दिखाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि देश के लोगों ने इसे अपनाकर अगले स्तर पर पहुँचा दिया है।”

उन्होंने आगे जानकारी दी कि वर्तमान में सरकार के पास लगभग 2,00,000 (दो लाख) स्टार्टअप्स पंजीकृत (रजिस्टर्ड) हैं। इसके अलावा, जब से अटल इनोवेशन मिशन की शुरुआत हुई है, तब से अब तक 1.1 करोड़ से अधिक युवा उद्यमी अकेले ‘अटल टिंकरिंग लैब्स’ के माध्यम से सीखकर आगे बढ़ चुके हैं।

भारतीय शिक्षा प्रणाली की मजबूती की तारीफ करते हुए बागला ने कहा कि यही वजह है कि आज दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में भारतीय मूल के सीईओ बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं। भारतीयों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे बिना किसी बंधी-बंधाई गाइडबुक के, बिल्कुल अनजान और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी रास्ता निकालकर काम को सफलतापूर्वक पूरा करना जानते हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से समाज और नौकरियों पर पड़ने वाले असर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से एक ऐसे अभूतपूर्व दौर में प्रवेश कर रही है, जहाँ हर दिन नई संभावनाएँ जन्म ले रही हैं। बागला ने कहा, “मानव इतिहास में यह पहली बार हो रहा है जब हम कुछ ऐसा विकसित कर रहे हैं जो इंसानी दिमाग से भी ज्यादा समझदार साबित हो सकता है। हम समाज, अर्थव्यवस्था और इंसानी जीवन के एक बिल्कुल नए युग की दहलीज पर हैं, जहाँ सोचने और काम करने के तौर-तरीके पूरी तरह बदल जाएँगे।”

बागला ने इस बात पर भी ध्यान आकर्षित किया कि एआई ने ज्ञान और जानकारी को हर किसी के लिए आसानी से सुलभ (लोकतांत्रिक) तो बना दिया है, लेकिन यह तकनीकी बदलाव एक ऐसे समय में आ रहा है जब आज की युवा पीढ़ी गहरी चिंता और मानसिक तनाव से गुजर रही है। उन्होंने कहा, “आज की पीढ़ी को ‘एंग्जायटी जनरेशन’ कहा जा रहा है। हमारे सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि हम इस डिजिटल बाढ़ के बीच उनका सही मार्गदर्शन कैसे करें। आज जानकारी का प्रवाह बहुत तेज है, इसलिए हमारा प्रयास युवाओं को इस तरह तैयार करना है कि वे भविष्य के अनजान रास्तों पर भी अपना रास्ता खुद बना सकें और हर नई परिस्थिति के अनुसार खुद को ढाल सकें।”

उन्होंने पूरा भरोसा जताया कि बदलती तकनीक और काम के नए माहौल को अपनाने में भारतीय युवा सबसे आगे रहेंगे। भारतीय युवाओं में खुद को समय के अनुसार बदलने (Reinvent करने) का एक स्वाभाविक और अनोखा हुनर है। देश की युवा पीढ़ी का यही उद्यमशीलता का जज्बा उन्हें पूरी दुनिया में सबसे अलग और अजेय बनाता है।

भविष्य की शिक्षा पर अपना स्पष्ट दृष्टिकोण रखते हुए दीपक बागला ने अंत में कहा कि आने वाले समय में केवल कागजी डिग्रियां सफलता की गारंटी या आधार नहीं होंगी। भविष्य के भारत में केवल वही आगे बढ़ेंगे जिनके पास कौशल, नई सोच, नवाचार इनोवेशन और दूसरों के लिए रोजगार पैदा करने की क्षमता होगी।