लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। कन्सल्टिंग फर्म प्रैक्सिस ग्लोबल अलायंस की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का जनरल इंश्योरेंस उद्योग ग्राहकों से सीधा रिश्ता बनाने और अंडरराइटिंग अनुशासन के मुकाबले अपने बिज़नेस को बढ़ाने को अधिक प्राथमिकता दे रहा है। मध्यस्थों पर बढ़ती निर्भरता के कारण कंपनियों की लंबी अवधि की लाभप्रदता दबाव में आ रही है। यह रिपोर्ट तब आई है, जब कुछ ही दिन पहले IRDAI के चेयरमैन अजय सेठ ने बीमा क्षेत्र में बढ़ते खर्चों और एजेंटों व मध्यस्थों पर बहुत ज़्यादा निर्भर रहने की आदत पर चिंता ज़ाहिर की थी।
प्रैक्सिस के अनुसार,भारत में लगभग 80 प्रतिशत बीमा व्यवसाय अभी भी एजेंटों, ब्रोकरों, बैंक एश्योरेंस साझेदारियों और ओईएम चैनलों जैसे मध्यस्थों के माध्यम से संचालित होता है। इसने वितरकों का ध्यान आकर्षित करने के लिए बीमा कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा को तेज़ कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप आक्रामक रूप से कमीशन का भुगतान किया जा रहा है और ग्राहकों के साथ सीधे संबंध कमज़ोर हो रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बीमा कंपनियां ग्राहकों के साथ लंबा रिश्ता बनाने के बजाय वितरकों तक पहुंच हासिल करने के लिए आपस में प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। इसके परिणामस्वरूप, ग्राहक अक्सर बीमा कंपनियों के बजाय मध्यस्थों के प्रति वफादार रहते हैं। ग्राहक जोड़ने, रिन्यूअल और जुड़ाव पर पूरी तरह से एजेंटों और वितरकों का नियंत्रण होता है।
प्रैक्सिस ने इसे “रीएक्विजिशन-लेड ग्रोथ” कहा है, जहाँ बीमा कंपनियां रिन्यूअल्स के समय भी बार-बार नए ग्राहक को जोड़ने (कस्टमर एक्विजिशन) जैसा ही खर्च करती हैं। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि पूरे क्षेत्र में अंडरराइटिंग प्रॉफिटेबिलिटी संरचनात्मक रूप से कमज़ोर बनी हुई है। कंबाइंड रेशो लगातार 100प्रतिशत से ऊपर बना हुआ है, जो अंडरराइटिंग नुकसान को दर्शाता है।
प्रैक्सिस के अनुमान के मुताबिक, इंश्योरेंस कंपनियों का अंडरराइटिंग नुकसान उनके नेट रिटेन प्रीमियम (NWP) का करीब 13% है, जबकि इन्वेस्टमेंट से होने वाली कमाई NWP का लगभग 21% है। इससे साफ है कि कंपनियां अपना मुनाफा बनाए रखने के लिए ट्रेजरी इनकम और इन्वेस्टमेंट से होने वाले फायदों पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं।
प्रैक्सिस ग्लोबल अलायंस के मैनेजिंग पार्टनर मधुर सिंघल ने कहा, “भारतीय जनरल इंश्योरेंस इंडस्ट्री ने बिज़नेस का आकार तो बड़ा कर लिया है, लेकिन मुनाफे के मामले में यह अभी भी ग्लोबल स्टैंडर्ड्स से काफी पीछे है। आगे की ग्रोथ और वैल्यू बढ़ाने के लिए कंपनियों को सख्त अंडरराइटिंग नियम अपनाने होंगे,ग्राहकों से सीधा रिश्ता बनाना होगा और नए ग्राहकों के बजाय पुराने ग्राहकों को रोके रखने पर ध्यान देना होगा।”
रिपोर्ट में यह सुझाव भी दिया गया है कि ग्राहकों से सीधे जुड़ने वाले (D2C) मॉडल को मज़बूत करके इंश्योरेंस कंपनियां अपना मुनाफा बढ़ा सकती हैं। एजेंटों के कमीशन पर अपनी निर्भरता कम कर सकती हैं और लंबे समय के लिए ग्राहकों को अपने साथ जोड़े रख सकती हैं। रिपोर्ट में दिए गए कस्टमर सर्वे दिखाते हैं कि ग्राहक सीधे इंश्योरेंस कंपनियों से पॉलिसी खरीदने के लिए तैयार हैं। बशर्ते कंपनियां उन्हें पारदर्शी कीमतें,आसान प्रोडक्ट्स, क्लेम का जल्दी निपटारा और बेहतर डिजिटल सुविधाएं दें।
प्रैक्सिस ग्लोबल अलायंस के प्रैक्टिस लीडर (इंश्योरेंस) विशाल भावे का कहना है कि, “कमीशन में पारदर्शिता, बीमा सुगम, नए अकाउंटिंग स्टैंडर्ड (IndAS 117) और रिस्क-बेस्ड कैपिटल फ्रेमवर्क जैसे सरकारी नियमों के आने से इस सेक्टर में ग्राहकों पर होने वाला खर्च सुधरेगा और कंपनियों का मुनाफा लंबे समय के लिए स्थिर हो सकेगा। जो इंश्योरेंस कंपनियां ग्राहकों से सीधा संपर्क और रिश्ता बनाने पर काम कर रही हैं, वे भविष्य में बिज़नेस की वैल्यू बढ़ाने के मामले में सबसे आगे रहेंगी।“
Telescope Today | टेलीस्कोप टुडे Latest News & Information Portal