- प्रेमापुर के युवक को कुचलने के आरोपी के खिलाफ पुलिस ने नहीं दर्ज किया मुकदमा
- चंदौली के अरबपति ठेकेदार छत्रबली का भतीजा है आरोपी
(अनिल कुमार)
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के चंदौली जिले में स्थित गांव भभौरा के ठीक पड़ोस में पड़ता है प्रेमापुर गांव। यह रघुनाथपुर ग्राम सभा का एक हिस्सा है। यहां राजनाथ सिंह के खानदान की कुछ पट्टीदारियां भी हैं। क्षत्रिय बाहुल्य प्रेमा रघुनाथपुर ग्राम सभा अर्से से भाजपा का वोटर रहा है। यहां का अधिकांश वोट राजनाथ सिंह के नाम पर भाजपा को मिलता रहा है। भाजपा चंदौली के जिलाध्यक्ष काशीनाथ सिंह भी इसी प्रेमा रघुनाथपुर ग्राम सभा के निवासी हैं। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के प्रभाव क्षेत्र एवं जिलाध्यक्ष काशीनाथ सिंह के ग्रामसभा के प्रेमापुर गांव के डेढ़ सौ क्षत्रियों ने सैयदराजा के पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्ल्यू के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी की सदस्यता ले ली। सपा ने पहली बार भाजपा के उस गढ़ में बड़ी सेंध मारी है, जिसे आजतक कोई दल भेद नहीं पाया था। अपनी ही सरकार में अन्याय झेलने तथा ठेकेदार के पैसों के नीचे दबे सिस्टम एवं नेताओं से दुखी होकर इन लोगों ने यह कदम उठाया है।
दरअसल, प्रेमापुर निवासी गोरखनाथ सिंह के 26 वर्षीय पुत्र पीयूष सिंह 31 मार्च को साढ़े सात बजे अपने साथी दिग्विजय सिंह को अपनी बुलेट पर बैठाकर अपने गांव से चकिया की तरफ जा रहे थे। यह लोग अभी रघुनाथपुर गांव के पास पहुंचे ही थे कि पीछे से तेज रफ्तार में आ रही एक मिड एसयूवी गाड़ी ने बुलेट में पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर लगने से पीयूष बाइक समेत आगे गिर गये, जबकि दिग्विजय वहीं पास में ही गिरे। टक्कर मार कर गाड़ी भगाने के चक्कर में कार चालक ने दुबारा सड़क पर गिरे पीयूष सिंह के ऊपर से गाड़ी चढ़ाकर उन्हें कुछ दूर तक घसीटते हुए भाग गया। जिससे वह अत्यंत गंभीर रूप से घायल हो गये। दुर्घटना की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे परिजन तत्काल पीयूष को उठाकर डीसीएच चकिया लेकर गये। पीयूष की गंभीर हालत को देखते हुए डाक्टरों ने उसे बीएचयू ट्रामा सेंटर वाराणसी के लिये रेफर कर दिया। उसी दिन रात ग्यारह बजे पीयूष की इलाज के दौरान मौत हो गई।

इस हृदय विदारक घटना से पूरे गांव में मातम छा गया। आवश्यक कानूनी कार्रवाई के बाद एक अप्रैल को चकिया कोतवाली में अज्ञात कार चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस द्वारा कोई दिलचस्पी नहीं लिये जाने के बाद ग्रामीणों ने स्थानीय स्तर से कार चालक और गाड़ी के बारे में पता लगाने में जुट गये। जांच पड़ताल में गोरखनाथ सिंह को पता चला कि पीयूष को टक्कर मारने वाली ब्रीजा गाड़ी संख्या यूपी 65 डीके 1245 इलिया थाना क्षेत्र के तियरी ग्राम सभा का विकास सिंह उर्फ विक्कू पुत्र शिवाजी सिंह चला रहा था। गोरखनाथ सिंह ने पुन: आरोपी चालक का नाम लिखते हुए मुकदमा दर्ज करने का आवेदन 3 अप्रैल 26 को दिया, लेकिन चकिया पुलिस ने उक्त आरोपी चालक के खिलाफ ना तो मुकदमा दर्ज किया और ना ही टक्कर मारने वाली गाड़ी के बारे में पता लगाने का प्रयास किया। तमाम कोशिश एवं प्रयास के बाद भी चकिया कोतवाल ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। ग्रामीणों द्वारा एड़ी चोटी की कोशिश किये जाने के बाद भी गोरखनाथ को न्याय नहीं मिला।
लगातार भागदौड़, सिफारिश के बाद भी चकिया कोतवाली पुलिस ने आरोपी विकास सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने से इनकार कर दिया। बताया जा रहा है कि तियरी का रहने वाला आरोपी विकास सिंह चंदौली के धनबली भाजपा नेता एवं ठेकेदार छत्रबली सिंह का भतीजा है। आरोप है कि पूरा चकिया तहसील क्षेत्र के थाने, नेता यहां तक की स्थानीय विधायक भी छत्रबली सिंह के इशारे पर ही काम करते हैं, क्योंकि इन लोगों का वित्त पोषण छत्रबली सिंह के द्वारा ही किया जाता है। इसका परिणाम यह हुआ कि चकिया कोतवाली में आवेदन देने के बावजूद आरोपी विकास सिंह के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। भाजपा जिलाध्यक्ष काशीनाथ सिंह एवं विधायक कैलाश आचार्य ने भी कोई मदद नहीं की, क्योंकि छत्रबली विधायक का प्रतिनिधि भी है। इसी वजह से ना तो स्थानीय विधायक ने कोई मदद की और ना ही भाजपा जिलाध्यक्ष काशीनाथ सिंह ही अपने ग्राम पंचायत के लोगों को न्याय दिलवा सके।
आरोपी विकास सिंह के चाचा छत्रबली सिंह ठेकेदार होने के साथ चंदौली के जिला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वर्ष 2010 में छत्रबली बसपा के टिकट पर लड़कर जिला पंचायत अध्यक्ष बने। प्रदेश में सत्ता बदली तो उन्होंने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ले ली तथा वर्ष 2016 में महिला सीट होने पर अपनी पत्नी सरिता सिंह को सपा से लड़ाकर जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाया। इसके धनबल के आगे सुशील सिंह की पत्नी तथा भाजपा प्रत्याशी किरन सिंह को हार का सामना करना पड़ा। प्रदेश में जब सत्ता बदली से छत्रबली ने सपा से किनारा कर भाजपा का दामन थाम लिया। जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट ओबीसी के लिये आरक्षित हुई तो अपने चालक रहे दीनानाथ शर्मा को भाजपा से लड़ाकर अध्यक्ष बनवा दिया। फिर चकिया विधायक का प्रतिनिधि बनकर पूरा जिला पंचायत से लेकर विधायकी तक का सारा सिस्टम खुद ही देखता है। सत्ताधारी दल के साथ चलने वाले छत्रबली की तूती पूरे चंदौली में बोलती है।
कथित तौर पर अपनी सरकार होने के बावजूद भी जिला एवं स्थानीय स्तर से एक पीडि़त पिता को अपने नौजवान पुत्र को खोने के बावजूद न्याय नहीं मिलने तथा सत्ता मद के अंहकार में डूबे भाजपा नेताओं द्वारा कोई मदद नहीं किया जाने से नाराज होकर प्रेमापुर गांव क्षत्रियों ने समाजवादी पार्टी का साथ देने का निर्णय ले लिया। इसी क्रम में समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्ल्यू को बुलाकर इन लोगों ने सार्वजनिक रूप से सपा की सदस्यता ले ली। राजनाथ सिंह के गढ़ में इतना बड़ा घटनाक्रम हो जाने के बाद भी चंदौली एवं उत्तर प्रदेश के भाजपा नेताओं के माथे पर कोई शिकन नहीं है। पर वक्त गवाह है कि ऐसे ही छोटे छोटे अन्याय से उपजा आक्रोश बड़े से बड़ा साम्राज्य को भी तहस नहस कर देता है। इस घटना के बाद से प्रेमापुर ही नहीं, आसपास के दर्जनों गांवों के भाजपाइयों का एक ही दर्द है कि इस पार्टी में बाहर से आने वाले छत्रबली सिंह टाइप के लोगों का ही बोलबाला हो गया है, अपने पुराने लोगों के लिये अब ना तो इस पार्टी में जगह बची है, और ना ही न्याय की उम्मीद।
इस संदर्भ में पुलिस का पक्ष जानने के लिये चकिया कोतवाल के सीयूजी नंबर 9454403182 पर कॉल किया गया, लेकिन उनके द्वारा कॉल रिसीव नहीं किया गया।
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