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भारतीय नववर्ष के स्वागत संग गूंजा “चैती घर-घर बाजत बधईया हो रामा…”

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। लोक संस्कृति शोध संस्थान द्वारा आयोजित सात दिवसीय ऑनलाइन भजन कार्यशाला का समापन बुधवार को नव संवत्सर के पावन अवसर पर श्रीराम भजनों की मधुर स्वर-लहरी के बीच अत्यंत गरिमापूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। दिल्ली विश्वविद्यालय संगीत संकाय की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. स्मृति त्रिपाठी के कुशल निर्देशन में आयोजित इस कार्यशाला में 42 प्रतिभागियों ने सात दिनों तक भोजपुरी, मैथिली एवं बुंदेली लोक भाषाओं की पारम्परिक धुनों पर आधारित भजनों का सघन प्रशिक्षण प्राप्त किया। साथ ही संत रविदास, कबीर, गुरु नानक एवं मीराबाई की रचनाओं के माध्यम से रामभक्ति की विविध धाराओं से परिचित हुए।

संस्थान की सचिव डॉ. सुधा द्विवेदी ने जानकारी देते हुए बताया कि समापन सत्र में प्रतिभागियों ने सीखे गए भजनों की सराहनीय प्रस्तुतियां दीं। प्रस्तुतियों में चैती घर-घर बाजत बधईया हो रामा, अवधपुरी बाजे आज बधैया, भोजपुरी विवाह गीत सुख नाहीं कहीं जैसन ससुररिया में, मैथिली भजन भजु रघुबर श्याम युगल चरना, संत रैदास का अब कैसे छूटै राम नाम रट लागी, मीराबाई का मेरो मन रामहि राम रटै, अब तुम दया करो श्रीराम जी, जनकपुर का विवाह गीत मंगल आजु जनकपुर अति मनभावन हे, गुरु नानक का अपने राम का गुन गाऊं, कबीर का मन राम सुमिर पछताएगा, गुरु कृपा जन पायो मेरे भाई तथा बुंदेली भजन मोरे जनक राज के धाम विशेष रूप से उल्लेखनीय रहे।

कार्यशाला के प्रतिभागी कलाकारों में अर्चना गुप्ता, देवेश्वरी पंवार, प्रतिमा मिश्रा, वीना सक्सेना, अलका चतुर्वेदी, निधि निगम, अपर्णा सिंह, कुमकुम मिश्रा, प्रीति श्रीवास्तव, भारती श्रीवास्तव, मधु श्रीवास्तव, कुमुद श्रीवास्तव, आभा दीक्षित, सुषमा प्रकाश, रीता पाण्डेय, अनुज श्रीवास्तव, नीलिमा सिंह, रत्ना शुक्ला, सीमा अग्रवाल, रमा अग्निहोत्री, बबिता साहू, प्रतिमा वर्मा, प्रीति चतुर्वेदी, ज्योति श्रीवास्तव, माधुरी सिंह, नीरा मिश्रा, सोनी घिल्डियाल, रोशनी केशरी, आभा मिश्रा, संगीता दुबे, मीना मिश्रा, पूर्णिमा धर्मेश कानूनगो, अनीता कुमारी, रंजना शंकर, सरिता अग्रवाल, रंजना दुबे, मधु माथुर, प्रतिमा अग्रवाल, तृप्ति सेन, गोपाली चन्द्रा, शिखा श्रीवास्तव एवं राशि श्रीवास्तव सम्मिलित रहे।