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अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता पर पूजा तिवारी की शोधपरक पुस्तक का लोकार्पण

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के क्षेत्र में भारत की नीतियों, कानूनों और संस्थागत विकास को समझने के उद्देश्य से लिखी गई शोधपरक पुस्तक “Policy and Regulation of International Arbitration: An Indian Perspective” का लोकार्पण किया गया। यह पुस्तक लेखिका पूजा तिवारी द्वारा लिखी गई है, जिसमें भारत में मध्यस्थता कानून के विकास, नीतिगत बदलावों और वैश्विक संदर्भों का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

यह पुस्तक वर्ष 1996 के Arbitration and Conciliation Act से लेकर वर्ष 2025 तक हुए सुधारों और बहसों की गहन पड़ताल करती है। इसमें एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया गया है कि क्या भारत में मध्यस्थता व्यवस्था वास्तव में न्यायालय आधारित विवाद समाधान का विश्वसनीय विकल्प बन पाई है या अभी भी यह एक संभावनाशील व्यवस्था के रूप में विकसित हो रही है।

छह भागों में विभाजित यह पुस्तक भारत में मध्यस्थता के ऐतिहासिक विकास, विधायी और न्यायिक सुधारों, तथा संस्थागत ढांचे के परिवर्तन का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करती है। इसमें BALCO तथा Amazon बनाम Future जैसे महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णयों का विश्लेषण भी शामिल है, जिन्होंने भारत में मध्यस्थता के स्वरूप और व्याख्या को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया।

पुस्तक में सिंगापुर और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों की मध्यस्थता प्रणालियों का तुलनात्मक अध्ययन भी किया गया है, जिससे यह समझने में मदद मिलती है कि वैश्विक स्तर पर प्रभावी संस्थागत ढांचे किस प्रकार कार्य करते हैं और भारत किन नीतिगत विकल्पों पर आगे बढ़ सकता है।

लेखिका ने विशेष रूप से Arbitration Council of India (ACI) की स्थापना, सार्वजनिक नीति की व्याख्या में आए बदलाव, और संस्थागत मध्यस्थता को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों का विश्लेषण किया है। साथ ही, 2017 से 2026 के बीच कानूनी विशेषज्ञों के सर्वेक्षण पर आधारित डेटा भी पुस्तक में शामिल किया गया है, जो मध्यस्थता के प्रति बदलते दृष्टिकोण को दर्शाता है।

यह पुस्तक शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं, विधि विशेषज्ञों और संस्थागत संगठनों के लिए उपयोगी साबित होगी। साथ ही, यह Ease of Doing Business और निवेशकों के विश्वास को मजबूत करने में मध्यस्थता की भूमिका पर भी महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।