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दिल्ली के मंच पर दिखेगा रूस और भारत की दोस्ती का ‘महा-संगम’

नई दिल्ली : रूस का ‘कोस्त्रोमा रशियन नेशनल बैले’ अपना अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट “ग्लोबल डांस ओवरचर” को दिल्ली में 2-3 मार्च को आयोजित करेगा। यह आयोजन सिर्फ एक डांस शो नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच कला और प्रेम के जरिए दिलों को जोड़ने की एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक पहल है।भारत में रूसी दूतावास के अनुसार यह दो दिवसीय कार्यक्रम दिल्ली के दो प्रमुख स्थानों पर आयोजित किया जाएगा। इनमें संगीत नाटक अकादमी (रवींद्र भवन) में 2 मार्च शाम 4-7 बजे तक रूसी और भारतीय कलाकार कार्यशाला आयोजित करेंगे। इसमें एक-दूसरे को अपनी नृत्य कला सिखाई जाएगी। वहीं 3 मार्च शाम 07:00 बजे कमानी सभागार में रूस का ‘वैश्विक नेशनल डांस शो’ शुरू होगा।साझे सांस्कृतिक और मानवीय मूल्यों पर आधारित इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य दुनिया भर के लोगों को एक करना, सांस्कृतिक लेन-देन को बढ़ावा देना और सांस्कृतिक रिश्तों को बढ़ावा देना है।यह प्रोजेक्ट खास तौर पर ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका (ब्रिक्स) देशों के बीच सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए बनाया गया है। शो में रूस के अलग-अलग इलाकों जैसे बर्फीले साइबेरिया और सुंदर काकेशस की लोक परंपराओं को शानदार रंगों और संगीत के साथ दिखाया जाएगा।शो का सबसे बड़ा आकर्षण “जयति जया मामा भारतम” होगा। इसमें भारतीय कलाकार रूस के बैले डांसरों के साथ मिलकर मंच साझा करेंगे। यह पहली बार होगा जब रूसी और भारतीय लोक नृत्यों का ऐसा अद्भुत तालमेल दर्शकों को देखने को मिलेगा।इस प्रोजेक्ट का एक हिस्सा ‘एजुकेशनल एक्सचेंज’ है। रूस का मशहूर ‘गवर्नरेट बैले स्कूल’ और भारत की ‘संगीत नाटक अकादमी’ मिलकर काम कर रहे हैं। इस दौरान भारतीय कलाकारों को रूसी डांस की बारीकियां सिखाई जाएंगी। वहीं रूसी कलाकारों को भारतीय कोरियोग्राफर सुभाष नकाशे भारतीय नृत्य के तत्वों से रूबरू कराएंगे। भविष्य में, चुनिंदा भारतीय कलाकारों को रूस के प्राचीन शहर कोस्त्रोमा में जाकर प्रशिक्षण लेने का मौका भी मिलेगा।यह प्रोजेक्ट अब तक दुनिया के कई देशों जैसे संयुक्त अरब अमीरात मिस्र और चीन में आयोजित हो चुका है। 2026 में भारत के बाद, यह ब्राजील, इथियोपिया और दक्षिण अफ्रीका का रुख करेगा।इस आयोजन को रूस और भारत के संस्कृति मंत्रालयों के साथ-साथ रूसी दूतावास का पूरा समर्थन प्राप्त है। इसका मकसद ‘नृत्य’ जैसी सार्वभौमिक भाषा के जरिए दुनिया में शांति और सद्भाव का संदेश फैलाना है।