नई दिल्ली : केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड के तहत रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन फंड की पहली ओपन कॉल शुरू की। इसका उद्देश्य भारतीय तकनीकी को लैब से बाजार तक पहुंचाने में मदद करना है।इस योजना के तहत सरकार अब निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स को कम ब्याज पर लंबे समय के लिए फंडिंग देगी, ताकि वे नई तकनीकी को विकसित कर सकें और बाजार में उतार सकें।बुधवार को नेशनल मीडिया सेंटर में आयोजित पत्रकार वार्ता मेंडॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह योजना सरकार की पारंपरिक फंडिंग व्यवस्था से अलग है। अब तक सरकार ज्यादातर सीएसआर या दान के जरिए नवाचार को बढ़ावा देती थी, लेकिन अब निजी क्षेत्र को सीधे सरकारी समर्थन दिया जा रहा है।उन्होंने बताया कि इस फंड का कुल आकार 1 लाख करोड़ रुपये है। इसके तहत2 से 4 प्रतिशत ब्याज दर पर लोन मिलेगा जो 15 साल तक की अवधि के लिए होगा। इसके लिए किसी तरह की जमानत नहीं देनी होगी।सरकार इस योजना के जरिए एआई, ऊर्जा और डीप-टेक जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले स्टार्टअप्स और कंपनियों को प्रोत्साहित कर रही है। यह फंड उन तकनीक के लिए है जो कम से कम टीआरएल -4 स्तर तक पहुंच चुकी हैं।मंत्री ने बताया कि पहली कॉल में अब तक 191 प्रस्ताव मिले हैं, जिनमें से ज्यादातर निजी क्षेत्र से आए हैं। इससे यह साफ होता है कि उद्योग जगत को सरकार की इस पहल पर भरोसा है।इस कार्यक्रम में टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।सरकार ने नवाचार करने वालों, उद्योग जगत और मीडिया से अपील की है कि वे इस योजना की जानकारी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं, ताकि देशभर की योग्य कंपनियां इसका लाभ उठा सकें।उल्लेखनीय है कि आरडीआई फंड को जुलाई 2025 में कैबिनेट की मंजूरी मिली थी और नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इसकी शुरुआत की गई थी। यह फंड स्वदेशी तकनीक क्षमताओं को बढ़ाने और भारत की नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की लंबी अवधि की योजना का हिस्सा है।—————
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