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PHDCCI का IBC पल्स सम्मेलन : NCLT को मज़बूत कर तेज़ इनसॉल्वेंसी समाधान पर ज़ोर

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। PHD चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) ने IBC पल्स पर सम्मेलन का आयोजन किया। सम्मेलन में इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC), 2016 के तहत उभरते रुझानों, चुनौतियों और सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया गया। जिसमें तेज़ और अधिक प्रभावी इनसॉल्वेंसी समाधान सुनिश्चित करने के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) फ्रेमवर्क को मज़बूत करने पर ज़ोर दिया गया।

उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने लोन डिफॉल्ट के पीछे के मुख्य कारणों पर प्रकाश डाला और स्थायी औद्योगिक विकास को सक्षम बनाने के लिए भारत की क्रेडिट संस्कृति और बैंकिंग सुधारों को मज़बूत करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) की रिकवरी में IBC की महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर दिया और उत्तर प्रदेश राज्य में महत्वपूर्ण विकास और बेहतर होती क्रेडिट संस्कृति को रेखांकित किया।

DRAT इलाहाबाद के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राजेश दयाल खरे ने कहा कि IBC ने संकटग्रस्त संपत्तियों को हल करने और अवरुद्ध पूंजी को वापस वित्तीय प्रणाली में एकीकृत करने में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है।

अपने स्वागत भाषण में, PHDCCI की NCLT और IBC समिति के अध्यक्ष जी.पी. मदान ने कहा कि इनसॉल्वेंसी समाधान और IBC भारत के कॉर्पोरेट इकोसिस्टम के पूरक स्तंभ बन गए हैं। कोड की प्रभावशीलता पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने कहा कि सकल NPA ऐतिहासिक रूप से घटकर लगभग 2.2% और शुद्ध NPA 0.5% हो गए हैं। IBC का सबसे अच्छा उपयोग इसका उपयोग न करना है। श्री मदान ने यह भी घोषणा की कि PHDCCI NCLT और IBC फ्रेमवर्क के बारे में जागरूकता और समझ बढ़ाने के लिए इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा।

चर्चा के दौरान, वरिष्ठ अधिवक्ता और NCLT बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. यू.के. चौधरी ने लंबित मामलों और औद्योगिक विवादों को कम करने के लिए NCLT बेंचों और सदस्यों की संख्या बढ़ाने और बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

NCLT के सदस्य (J) प्रवीण गुप्ता ने IBC प्रक्रिया में प्रगतिशील विकास पर प्रकाश डाला। जिसमें देनदार-के-कब्ज़े से लेनदार-के-नियंत्रण तंत्र में बदलाव और सीमा पार इनसॉल्वेंसी की बढ़ती प्रासंगिकता शामिल है।

डॉ. राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) अमर पाल सिंह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि बैंकिंग सुधार, विकसित हो रहे IBC सिस्टम का एक ज़रूरी हिस्सा हैं। उन्होंने ईज़-ऑफ-डूइंग-बिज़नेस उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और MSMEs की बेहतर भूमिका और बढ़ते एंटरप्रेन्योरियल इकोसिस्टम पर प्रकाश डाला।

टेक्निकल सेशन की अध्यक्षता पूर्व NCLT सदस्यों एल.एन. गुप्ता, राजशेखर वी.के. और डॉ. दीप्ति मुकेश ने की। जबकि संचालन PHDCCI NCLT और IBC कमेटी के को-चेयरपर्सन रंजना गवई, अभिषेक आनंद, रचित मित्तल और हरीश तनेजा ने किया।

टेक्निकल सेशन, न्यायिक विकास और उभरते रुझान पर्सनल गारंटर की दिवालियापन समाधान प्रक्रिया का विकसित होता ढांचा, IBC के तहत लिक्विडेशन: प्रथाएं और उभरते विकास विषय पर केंद्रित थे।

टेक्निकल सेशन के पैनलिस्ट में डॉ. श्रवण कुमार विश्नोई, संदीप गोयल (मैनेजिंग पार्टनर, स्टालवर्ट रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल LLP), जालेश ग्रोवर (चेयरमैन, डक्टुरस रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल्स), संजीव पांडे (CEO, AIPE), पंकज अग्रवाल (मैनेजिंग पार्टनर, पंकज अग्रवाल एंड एसोसिएट्स), विक्रम तुली (डायरेक्टर, NRG इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड), मुकेश गुप्ता और बबीता जैन, प्रो. (डॉ.) अभिषेक कुमार तिवारी (फैकल्टी ऑफ लॉ, लखनऊ विश्वविद्यालय), बालकृष्ण एन. रंजन, मनमीत सिंह सूरी (विशेष सचिव और अतिरिक्त LR, न्याय विभाग, लखनऊ), अभिंद्र माहेश्वरी, एडवोकेट, प्रो. (डॉ.) आलोक कुमार यादव (फैकल्टी ऑफ लॉ, लखनऊ विश्वविद्यालय) और एडवोकेट एकता चौधरी (मैनेजिंग अटॉर्नी, स्ट्रेटेगिया लीगल) शामिल थे।

सम्मेलन में देश भर से 150 से ज़्यादा प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जो भारत के दिवालियापन समाधान ढांचे को मज़बूत करने में राष्ट्रीय स्तर पर गहरी दिलचस्पी को दर्शाता है।