लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। भारत में वित्तीय दबाव, स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं, सुरक्षा जोखिमों और सामाजिक-आर्थिक अस्थिरताओं के चलते अनिश्चितता का स्तर लगातार ऊंचा बना हुआ है। राष्ट्रीय अ-निश्चित इंडेक्स 79 दर्ज किया गया है, जहां आम लोगों की प्रमुख चिंताएं आय की पर्याप्तता, वित्तीय तैयारी, बढ़ती स्वास्थ्य लागत और बड़े स्तर पर होने वाले व्यवधानों से जुड़ी हैं। इस पृष्ठभूमि में लखनऊ का अ-निश्चित इंडेक्स 71 रहा, जो राष्ट्रीय औसत से कम है। हालांकि, शहर के नागरिकों में नीति-आधारित बाहरी कारकों को लेकर चिंता अधिक देखने को मिली।
सबसे बड़ी चिंता सरकार द्वारा टैरिफ और नीतियों में बदलाव को लेकर है, जैसे पेट्रोल-इथेनॉल ब्लेंडिंग अनिवार्यता, जिससे जीवन-यापन की लागत बढ़ने की आशंका है। दूसरे स्थान पर अचानक आने वाली मेडिकल इमरजेंसी से निपटने की चिंता रही, जबकि तीसरे स्थान पर प्राकृतिक आपदाओं से दैनिक जीवन के प्रभावित होने का डर दर्ज किया गया।
अन्य प्रमुख चिंताओं में यह आशंका शामिल है कि बुजुर्गावस्था में बच्चों से पर्याप्त सहयोग न मिल पाए, बढ़ता अपराध, नए सरकारी नियमों का घरेलू बजट पर असर, जीवनशैली से जुड़ा बढ़ता खर्च, भू-राजनीतिक अस्थिरता, तथा पारिवारिक जिम्मेदारियों और कार्य-जीवन संतुलन को संभालने की चुनौती। लखनऊ के निवासियों की कई प्रमुख चिंताएं ऐसे कारकों से जुड़ी हैं जिन्हें वे अपने नियंत्रण से बाहर मानते हैं, जैसे नीति परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाएं, अपराध और वैश्विक आर्थिक जोखिम। वहीं कुछ ऐसे पहलू भी हैं जिन्हें बेहतर योजना से नियंत्रित किया जा सकता है, जैसे आपातकालीन तैयारी, जीवनशैली से जुड़े खर्च और पारिवारिक जिम्मेदारियों के लिए वित्तीय प्रबंधन। ये सभी तत्व रोजमर्रा की मानसिक बेचैनी को बढ़ाते हैं।
शहर-स्तरीय व्यवहारिक आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि वित्तीय साधनों की संख्या और मानसिक निश्चिंतता के बीच गहरा संबंध है। केवल एक निवेश साधन रखने वालों में अनिश्चितता का स्तर सबसे अधिक 94 दर्ज किया गया, जबकि चार या उससे अधिक निवेश साधन रखने वालों में यह घटकर 69 रह गया। बीमा कवरेज के मामले में भी यही रुझान देखा गया। एक बीमा पॉलिसी रखने वालों में अनिश्चितता 75 रही, जबकि चार या उससे अधिक पॉलिसी रखने वालों में यह घटकर 63 तक आ गई।
सामाजिक-आर्थिक वर्गों (एसईसी) के अनुसार, एसईसी-सी वर्ग में अनिश्चितता सबसे अधिक (73) दर्ज की गई, इसके बाद एसईसी-बी (71) और एसईसी-ए (70) का स्थान रहा। लिंग आधारित विश्लेषण में महिलाओं में अनिश्चितता का स्तर (73) पुरुषों (70) से थोड़ा अधिक पाया गया। आयु वर्ग के अनुसार, जेनरेशन-एक्स (74) और जेनरेशन-ज़ेड (73) सबसे अधिक चिंतित समूह रहे, जबकि मिलेनियल्स और बेबी बूमर्स में यह स्तर अपेक्षाकृत कम (69-69) दर्ज किया गया। व्यवसाय करने वालों में अनिश्चितता का स्तर (74) वेतनभोगी कर्मचारियों (70) की तुलना में अधिक रहा। जीवन-चरण के आधार पर अंतर बहुत कम देखने को मिला, जहां अविवाहित, विवाहित और विवाहित अभिभावकों के बीच स्कोर 70 से 72 के दायरे में रहा।
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