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आईआईसीए ने ‘जिम्मेदार व्यावसायिक आचरण और ईएसजी’ पर पांचवीं अंतर-मंत्रालयी बैठक का किया आयोजन

नई दिल्ली : कॉर्पोरेट मामलों के संस्थान (आईआईसीए) ने हाल ही में नई दिल्ली में जिम्मेदार व्यावसायिक आचरण (आरबीसी) और पर्यावरण, सामाजिक एवं शासन (ईएसजी) के सामाजिक आयाम पर पांचवीं अंतर-मंत्रालयी परामर्श बैठक का सफल आयोजन किया।इस महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन आईआईसीए के स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट की ओर से अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के सहयोग से किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में सतत विकास शासन और नीतिगत समन्वय को मजबूत करना था।कार्यशाला का शुभारंभ आईआईसीए के महानिदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ज्ञानेश्वर कुमार सिंह की अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि आज के दौर में जिम्मेदार व्यावसायिक प्रथाएं केवल कागजी रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं हैं बल्कि ये वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, आर्थिक प्रतिस्पर्धा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार एकीकरण का अभिन्न हिस्सा बन चुकी हैं।कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार शांतनु मित्रा ने कहा कि कंपनी अधिनियम 2013 के प्रावधानों में ‘जिम्मेदार व्यवसाय’ की नींव पहले से ही मौजूद है और सरकार इस ढांचे को आधुनिक व्यवसायों के अनुकूल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।आईएलओ की कंट्री डायरेक्टर मिचिको मियामोतो ने भारत की प्रगति की सराहना करते हुए समावेशी विकास और श्रम मानकों पर जोर दिया।सेबी के मुख्य महाप्रबंधक राजेश डांगेती ने कहा कि बीआरएसआर कोर के माध्यम से स्थिरता को अब अनुपालन के बोझ के बजाय पूंजी प्राप्त करने के एक प्रभावी उपकरण के रूप में देखा जाना चाहिए।एफएसएसएआई के सीईओ रंजीत पुन्हानी ने पोषण लेबलिंग और अनुपालन के बीच संतुलन बनाने की चुनौतियों को साझा किया।विचार-विमर्श के दौरान भाग लेने वाले प्रतिनिधियों ने अपने-अपने मंत्रालयों और सरकारी निकायों की प्रमुख पहलों पर प्रकाश डाला।एफएसएसएआई के सीईओ रंजीत पुन्हानी ने खाद्य क्षेत्र द्वारा जिम्मेदार उत्पाद मानकों और अनुपालन के बोझ के बीच संतुलन बनाने में आने वाली समानांतर चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया।एसईबीआई के मुख्य महाप्रबंधक राजेश डांगेती ने कहा कि बीआरएसआर कोर ने सबसे आवश्यक सामाजिक, पर्यावरणीय और शासन संकेतकों के लिए खुलासे को युक्तिसंगत बनाया है।इसके अलावा आईबीबीआई के मुख्य महाप्रबंधक शिव अनंत शंकर ने आईबीसी की उस अनूठी विशेषता पर प्रकाश डाला।श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के संयुक्त निदेशक प्रशांत बैजल ने चार श्रम संहिताओं के माध्यम से किए जा रहे महत्वपूर्ण संरचनात्मक परिवर्तनों पर प्रकाश डाला।भारी उद्योग मंत्रालय की आर्थिक सलाहकार डॉ. रेणुका मिश्रा ने बताया कि पीएलआई योजना के तहत क्षेत्र-विशिष्ट दिशानिर्देश ऑटो और उन्नत विनिर्माण क्षेत्र में उत्तरदायित्वपूर्ण व्यावसायिक मानकों को धीरे-धीरे स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।क्षमता निर्माण आयोग के सचिव जयदीप गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं से निजी क्षेत्र की आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए प्रदर्शन प्रभाव पैदा हो सकते हैं।