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गणतंत्र दिवस पर कौशल शक्ति का भव्य प्रदर्शन, एमएसडीई की झांकी बनी आकर्षण का केंद्र

नई दिल्ली : गणतंत्र दिवस परेड 2026 में कर्तव्य पथ पर कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ने अपनी भव्य झांकी “कौशल से संचालित: एक आत्मनिर्भर, भविष्य के लिए तैयार भारत का निर्माण” के माध्यम से आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार भारत की सशक्त तस्वीर प्रस्तुत की। यह झांकी कौशल से सशक्त भारत, युवा शक्ति द्वारा संचालित राष्ट्र और नवाचार से सक्षम विकास की प्रभावशाली कहानी को दर्शाती है।झांकी के अग्रभाग में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के देशभर के टॉपर शामिल रहे, जिन्हें कौशल दीक्षांत समारोह-2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सम्मानित किया गया था। कौशल क्षेत्र में भारत की वैश्विक पहचान को और मजबूत करते हुए, मंत्रालय ने हाल ही में ताइपेई में आयोजित वर्ल्डस्किल्स एशिया प्रतियोगिता-2025 में पदक और मेडलियन ऑफ एक्सीलेंस भी जीते हैं, जो भारत की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का प्रतीक है।झांकी में समावेशी विकास को प्रमुखता से दर्शाया गया, जहां महिला और पुरुष प्रशिक्षु साथ-साथ प्रशिक्षण लेते नजर आए। पारंपरिक और प्रौद्योगिकी में महिलाओं की भागीदारी ने यह रेखांकित किया कि कौशल विकास किस प्रकार महिला-नेतृत्व वाली आर्थिक वृद्धि को गति दे रहा है और उभरते क्षेत्रों में उनकी भागीदारी बढ़ा रहा है।झांकी के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि कर्तव्य पथ अब केवल सैन्य शक्ति और राष्ट्रीय उपलब्धियों के प्रदर्शन का मार्ग नहीं, बल्कि युवा शक्ति का “कौशल पथ” बन चुका है, जहां से विकसित भारत की यात्रा आगे बढ़ रही है।कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवीकरणीय ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और सेमीकंडक्टर जैसे भविष्य उन्मुख क्षेत्रों को झांकी का केंद्र बनाया गया। मंत्रालय का एसओएआर (एआई तैयारी के लिए स्किलिंग) कार्यक्रम, जिसके तहत सभी के लिए निःशुल्क, सरकारी नेतृत्व में एआई पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए जा रहे हैं। एआई सक्षम भूमिकाओं के लिए युवाओं को तैयार करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, ताकि भारत एआई क्रांति में अग्रणी भूमिका निभा सके।झांकी में पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आधुनिक तकनीकी विशेषज्ञों के साथ सम्मानित किया गया, जो आत्मनिर्भर भारत की उस अवधारणा को दर्शाता है जहां विरासत कौशल और नई पीढ़ी की क्षमताएं साथ-साथ आगे बढ़ती हैं।झांकी के केंद्र में मानव मस्तिष्क की संरचना प्रदर्शित की गई, जिसके एक ओर रचनात्मकता और आलोचनात्मक सोच तथा दूसरी ओर अर्जित विश्लेषणात्मक कौशल को दर्शाया गया। इसके साथ जुड़े दो हाथ सरकार-उद्योग साझेदारी का प्रतीक बने, जिसे पीएम-सेतु -1000 सरकारी आईटीआई के आधुनिकीकरण की महत्वाकांक्षी योजना – के माध्यम से सुदृढ़ किया जा रहा है।आईटीआई संस्थान अग्निवीरों के प्रशिक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जिससे वे अनुशासित, तकनीकी रूप से सक्षम युवा बनकर राष्ट्र सेवा और भविष्य के करियर के लिए तैयार हो सकें।समग्र रूप से, यह झांकी उस एकीकृत दृष्टि को प्रस्तुत करती है जहां कौशल विकास राष्ट्र की प्रगति का आधार है, नवाचार अवसरों को जन्म देता है और युवा शक्ति विकसित भारत की यात्रा के केंद्र में खड़ी है।——————-