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भारतीय संस्कृति में ही विश्व की अशांति का समाधानः शिवराज सिंह चौहान

नई दिल्ली : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को कहा कि विश्व की अशांति का समाधान भारतीय संस्कृति में है। आज विश्व के अनेक हिस्सों में अशांति, संघर्ष और भय का वातावरण है। उन्होंने कहा कि सौ साल पहले स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि सुदीर्घ रजनी समाप्त हुई जान पड़ती है, महान निशा का अंत निकट है। भारत माता एक बार फिर अंगड़ाई लेकर खड़ी हो रही हैं और विश्व गुरु के पद पर अधिष्ठित हो रही है। यह परिवर्तन केवल कल्पना नहीं बल्कि धरातल पर दिखाई दे रहा है।हरिद्वार में अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा आयोजित परम वंदनीय माता भगवती देवी शर्मा जी की जन्म शताब्दी एवं अखंड दीप शताब्दी वर्ष पर आयोजित मातृ-समर्पण यात्रा और समापन समारोह को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह ने कहा कि गायत्री परिवार कोई सामान्य संस्था नहीं, बल्कि संस्कारों का सागर और अध्यात्म की अखंड ज्योति है, जो सम्पूर्ण विश्व को आलोकित कर रही है। शिवराज ने कहा कि यदि गुरुदेव साधना थे, तो माताजी साधना की सिद्धि थीं। करुणा, ममता और वात्सल्य की जीवंत प्रतिमूर्ति माताजी ने साधकों को भक्ति के साथ-साथ सेवा और कर्तव्य का मार्ग भी दिखाया। उन्होंने माताजी की तुलना मीरा, शबरी, यशोदा, सीता और मां पार्वती से करते हुए कहा कि उनके जीवन और शिक्षाओं ने असंख्य लोगों को दिशा दी।शिवराज सिंह ने कहा कि भारत ने आत्मवत् सर्वभूतेषु का भाव दिया, जिसमें सभी प्राणियों में एक ही चेतना का दर्शन होता है।उन्होंने कहा कि वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना उदार हृदय वाले लोगों की है, जो पूरी दुनिया को एक परिवार मानते हैं। भारत की धरती आज भी उद्घोष कर रही है, धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो और विश्व का कल्याण हो। उन्होंने कहा कि भारत विश्व कल्याण की कामना करने वाला देश है और पूज्य गुरुदेव, वंदनीय माताजी और मां गायत्री की कृपा से इस लक्ष्य को पूरा करना हम सबका दायित्व है।—————