नई दिल्ली : केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि भारत अब अपने समुद्रों की आर्थिक ताकत को पहचान रहा है और यह कदम देश की ब्लू इकॉनमी को नई दिशा देगा। उन्होंने अंडमान सागर में देश की पहली खुले समुद्र में समुद्री मछली पालन (ओपन-सी मरीन फिश फार्मिंग) परियोजना के शुभारंभ को समुद्री संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में बड़ा कदम बताया। देश ने समुद्र से आजीविका और आर्थिक विकास की दिशा में एक बड़ी पहल की है।केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने रविवार को अंडमान सागर के नॉर्थ बे क्षेत्र में देश की पहली खुले समुद्र में समुद्री मछली पालन परियोजना का शुभारंभ किया। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि आजादी के बाद करीब 70 वर्षों तक देश की समुद्री संपदा पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया, लेकिन वर्ष 2014 के बाद सरकार की सोच बदली है और समुद्र को भी हिमालय और मुख्य भूमि की तरह आर्थिक शक्ति के रूप में देखा जा रहा है। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि भविष्य में इस तरह की परियोजनाओं को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और ब्लू इकॉनमी को और मजबूती मिलेगी।यह परियोजना पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, उसकी तकनीकी इकाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी (एनआईओटी) और अंडमान-निकोबार प्रशासन के सहयोग से लागू की जा रही है। इसमें खुले समुद्र की प्राकृतिक परिस्थितियों में पिंजरा आधारित मछली पालन और सीवीड (समुद्री शैवाल) की खेती की जा रही है। मैदानी दौरे के दौरान मंत्री ने स्थानीय मछुआरा समुदायों को आजीविका से जुड़े दो अहम सहयोग भी दिए। एक ओर गहरे समुद्र में सीवीड की खेती के लिए बीज वितरित किए गए, वहीं दूसरी ओर मछली पालन के लिए एनआईओटी द्वारा विकसित विशेष ओपन-सी पिंजरे उपलब्ध कराए गए। अंडमान दौरे के दौरान उन्होंने ने महात्मा गांधी मरीन नेशनल पार्क का भी भ्रमण किया, जहां उन्होंने प्रवाल भित्तियों, मैंग्रोव और समृद्ध समुद्री जैव विविधता का अवलोकन किया।
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