- एसएलएमजी बेवरेजेज ने ₹8,000 करोड़ का आंकड़ा पार किया, 2026 में ₹10,000 करोड़ का लक्ष्य
- त्रिशुंडी प्लांट से होता है कंपनी के कुल उत्पादन का 25% योगदान
- 4600 बोतल प्रति मिनट क्षमता, पीक सीज़न में 3 लाख केस प्रतिदिन उत्पादन
लखनऊ (शम्भू शरण वर्मा/टेलीस्कोप टुडे)। देश में कोका-कोला के सबसे बड़े स्वतंत्र बॉटलर्स में से एक, एसएलएमजी बेवरेजेज ने अपने अत्याधुनिक और विशाल बॉटलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रस्तुतीकरण किया। लखनऊ के समीप त्रिशुंडी (अमेठी) में स्थित यह बॉटलिंग प्लांट दक्षिण-पश्चिम एशिया का सबसे बड़ा कोका-कोला बॉटलिंग संयंत्र है, जो एसएलएमजी बेवरेजेज की मजबूत उत्पादन क्षमता और उन्नत तकनीकी दक्षता को दर्शाता है।
करीब एक वर्ष पूर्व शुरू हुआ यह अत्याधुनिक प्लांट लगभग 35 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है, जहां कोक, थम्स अप और स्प्राइट जैसे प्रमुख ब्रांड्स के उत्पादन के लिए कुल आठ अत्याधुनिक उत्पादन लाइनें स्थापित की गई हैं।

उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में स्थित त्रिशुंडी बॉटलिंग प्लांट आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित है। जहां कोका-कोला कंपनी के लोकप्रिय कार्बोनेटेड एवं नॉन-कार्बोनेटेड पेय पदार्थों का निर्माण किया जाता है। इस प्लांट में कोका-कोला, थम्स अप, स्प्राइट, फैंटा, लिम्का, माज़ा, मिनट मेड और किन्ले जैसे प्रमुख ब्रांड्स का उत्पादन कर क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति की जाती है।
मीडिया विज़िट के दौरान एसएलएमजी बेवरेजेज ने अपने अत्याधुनिक बॉटलिंग और उत्पादन केंद्र की क्षमताओं, तकनीक और संचालन शक्ति की विस्तृत जानकारी साझा की। पेशेवर सोच, मजबूत नेतृत्व और लोगों को प्राथमिकता देने वाली कार्य संस्कृति के साथ आगे बढ़ रही कंपनी ने वर्ष 2025 में ₹8,000 करोड़ की सकल बिक्री का आंकड़ा पार किया है। वर्ष 2026 में ₹10,000 करोड़ से अधिक की बिक्री हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
यह अत्याधुनिक उत्पादन केंद्र एक ही परिसर में सभी प्रमुख उत्पाद लाइनों जैसे पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर, कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक्स (CSD), जूस, कैन और हॉट-फिल उत्पादों का निर्माण करता है और एसएलएमजी बेवरेजेज के कुल उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत योगदान देता है।

इस संयंत्र की कुल उत्पादन क्षमता लगभग 4,600 बोतल प्रति मिनट है। औसतन यहां प्रतिदिन 2.5 लाख केस का उत्पादन होता है, जो पीक सीज़न में 3 लाख केस प्रतिदिन तक पहुंच जाता है। अधिक मांग के दौरान प्रतिदिन करीब 300 ट्रक उत्पादों की आपूर्ति होती है।
प्लांट में पांच उच्च गति वाली जर्मन तकनीक की ऑटोमेटेड लाइनें और तीन लागत कुशल चीनी लाइनें हैं। यहां ASSP (एडवांस PET बोतल) तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिससे उत्पादों की शेल्फ लाइफ 2 महीने से बढ़कर 8 महीने तक हो जाती है। यह तकनीक कोका-कोला और एक जर्मन कंपनी द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई है। प्लांट में 400 स्थायी और लगभग 600 कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी कार्यरत हैं। सुरक्षा और अनुपालन के लिए परिसर में करीब 190 AI आधारित कैमरे लगाए गए हैं।
एसएलएमजी बेवरेजेज के विज़न पर प्रकाश डालते हुए पारितोष लधानी (मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एसएलएमजी बेवरेजेज प्रा. लि.) ने कहा, “पिछले कई वर्षों से हमारा निरंतर प्रयास ऐसे बड़े, सुनियोजित और भविष्य-उन्मुख प्रोजेक्ट्स विकसित करने का रहा है, जो दीर्घकालिक दृष्टि के साथ तैयार किए जाएँ। वर्तमान में हम लगभग 70 एकड़ में फैले एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर कार्य कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य इसे क्षेत्र का एक आधुनिक और सुविकसित केंद्र बनाना है। हमारा लक्ष्य ऐसा प्रोजेक्ट विकसित करना है, जो न केवल आकार में भव्य हो, बल्कि सौंदर्य, उपयोगिता और दीर्घकालिक प्रासंगिकता के मानकों पर भी एक नई मिसाल स्थापित करे।

उन्होंने बताया कि फरवरी का महीना हमारे लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस दौरान औपचारिक कार्यक्रम एवं लॉन्च से संबंधित गतिविधियों की योजना बनाई जा रही है। बक्सर में एसएलएमजी का देश के प्रमुख और सबसे बड़े प्लांट्स में से एक विकसित किया जाएगा, जिसकी औपचारिक घोषणा हम शीघ्र ही आप सभी के साथ साझा करेंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में मंत्रियों सहित कई वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों और प्रमुख हितधारकों की उपस्थिति की संभावना है, जो इसके व्यापक महत्व को रेखांकित करती है।”
उन्होंने कहा, “आज के वैश्विक दौर में भारत को उन्नत इंजीनियरिंग, तकनीकी शिक्षा और नवाचार पर और अधिक ध्यान देने की जरूरत है। चीन, जर्मनी, ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों ने तकनीकी शिक्षा और रिसर्च में लगातार निवेश किया है। चीन की वैश्विक ताकत सस्ती मजदूरी नहीं, बल्कि मजबूत शिक्षा प्रणाली, रिसर्च इकोसिस्टम और प्रतिभाशाली लोगों को मिलने वाले सरकारी समर्थन से आती है। जहां टेस्ला जैसी कंपनियां R&D में सालाना करीब 5 अरब डॉलर खर्च करती हैं। वहीं चीन की अग्रणी कंपनियों को 15 अरब डॉलर तक का समर्थन मिलता है। यही सोच ब्रिटेन और यूरोप की शीर्ष यूनिवर्सिटियों में भी दिखती है, जहां एडवांस इंजीनियरिंग और बायोटेक्नोलॉजी में चीनी छात्रों की बड़ी संख्या है।”

अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए श्री लधानी ने कहा, “कक्षा 12वीं में शहर में प्रथम स्थान प्राप्त करने के बाद मैंने बी.कॉम (ऑनर्स) किया और फिर स्कॉटलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ स्टर्लिंग से एमबीए, जहां मैं अपने बैच के सबसे कम उम्र के छात्रों में शामिल था। मैं खुद को एक सेल्स-ड्रिवन प्रोफेशनल मानता हूं, लेकिन हमारा संगठन पूरी तरह पेशेवर प्रबंधन प्रणाली पर चलता है, जहां विशेषज्ञता, कार्यकुशलता और दीर्घकालिक मूल्य निर्माण को प्राथमिकता दी जाती है। विकास और मार्केटिंग के मामले में हमारा फोकस अल्पकालिक अभियानों की बजाय लंबे समय तक ब्रांड निर्माण, उपभोक्ताओं से निरंतर जुड़ाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार रुझानों के अनुरूप रणनीति पर रहता है। हमारा विज़न स्पष्ट है बड़ा पैमाना, उच्च गुणवत्ता, पेशेवर प्रशासन, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा, जिसे अनुशासित क्रियान्वयन और दीर्घकालिक सोच का समर्थन प्राप्त हो।”
एसएलएमजी बेवरेजेज ने अपने अत्याधुनिक, बड़े पैमाने और तकनीक-सक्षम बॉटलिंग प्लांट के माध्यम से यह स्पष्ट कर दिया है कि कंपनी न केवल वर्तमान मांग को पूरा करने के लिए तैयार है। बल्कि भविष्य की तेज़ी से बढ़ती उपभोक्ता जरूरतों को भी ध्यान में रखकर निवेश और विस्तार कर रही है। पेशेवर प्रबंधन, उच्च गुणवत्ता मानकों, उन्नत तकनीक और मजबूत लॉजिस्टिक्स के संयोजन के साथ एसएलएमजी बेवरेजेज भारत के बेवरेज सेक्टर में नई मिसाल कायम कर रही है। कोका-कोला के वैश्विक मानकों के अनुरूप संचालन, नवाचार पर निरंतर फोकस और दीर्घकालिक सोच के साथ कंपनी देश के पेय उद्योग में अपनी नेतृत्वकारी भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
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