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धरती की उर्वरता बचाना जरूरी, प्राकृतिक खेती अपनाएं किसान : केंद्रीय कृषि मंत्री

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भाकृअनुप-भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (ICAR-IISR) में आयोजित  ‘खेत बचाओ अभियान’ कार्यक्रम  के अंतर्गत किसान चौपाल को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने किसानों के साथ सीधा संवाद किया और खेती की चुनौतियों, मिट्टी की उर्वरता तथा कृषि को टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि देश में खाद्यान्न का पर्याप्त उत्पादन हो रहा है और अन्न के भंडार भरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत चावल उत्पादन में चीन को पीछे छोड़कर विश्व में पहले स्थान पर पहुंच गया है। श्री चौहान ने कहा कि दुनिया को चलाने के लिए भोजन आवश्यक है और हमारे किसान देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब आवश्यकता है कि उत्पादन के साथ-साथ धरती की सेहत को भी सुरक्षित रखा जाए।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों के लिए सड़कें भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं, जितनी खेती के लिए अन्य सुविधाएं। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़क संपर्क से किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में सुविधा मिलती है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत उत्तर प्रदेश की 374 ग्रामीण सड़कों के निर्माण को मंजूरी प्रदान की है। इसके लिए 544 करोड़ 62 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश में तिल और मूंगफली की खरीद को भी स्वीकृति प्रदान की है, जिससे इन फसलों के किसानों को लाभ मिलेगा।

श्री चौहान ने किसानों से अपील की कि वे रासायनिक उर्वरकों का उपयोग आवश्यकता से अधिक न करें। उन्होंने कहा कि धरती की सेहत लगातार बिगड़ रही है। श्री चौहान ने कहा कि किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड (सॉइल हेल्थ कार्ड) के माध्यम से अपनी मिट्टी की जांच अवश्य करानी चाहिए और मिट्टी की वास्तविक जरूरत के अनुसार ही खाद का उपयोग करना चाहिए। जरूरत से ज्यादा उर्वरकों का इस्तेमाल मिट्टी की सेहत के लिए नुकसानदेह है।

उन्होंने कहा कि कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से खेती में फसलों के लिए उपयोगी अनेक जीव भी समाप्त हो रहे हैं। इसलिए संतुलित उर्वरक प्रबंधन और कीटनाशकों का विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है। खेतों की मिट्टी को स्वस्थ रखना भविष्य की कृषि और आने वाली पीढ़ियों की खाद्य सुरक्षा के लिए जरूरी है।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने किसानों से प्राकृतिक खेती को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि जिन किसानों के पास पांच बीघा जमीन है, वे कम से कम एक बीघा भूमि पर प्राकृतिक खेती करके इसका प्रयोग अवश्य करें। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है।

उन्होंने किसानों से फसल विविधीकरण और एकीकृत कृषि प्रणाली (Integrated Farming) अपनाने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि किसान केवल एक ही फसल पर निर्भर न रहें, बल्कि अपनी जमीन और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार फल, सब्जियां, दालें तथा अन्य फसलें उगाएं। फसल चक्र में बदलाव और विविधीकरण से खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाया जा सकता है।

श्री चौहान ने कहा कि भारत सरकार ‘खेत बचाओ अभियान’ के माध्यम से किसानों को मिट्टी की सेहत, संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक कर रही है। इसका उद्देश्य खेतों की उर्वरता को बनाए रखना और कृषि को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना है।

कार्यक्रम की शुरुआत पौधरोपण अभियान के साथ हुई। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने संस्थान परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर भाकृअनुप-भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के निदेशक, कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिकगण तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।