अमेठी (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। राजीव गांधी पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी संस्थान (आरजीआईपीटी), जायस के सामाजिक-तकनीकी उत्सव ‘सौहार्द्य 2026’ का उद्घाटन सामाजिक उत्तरदायित्व, तकनीकी नवाचार, सतत विकास, उद्यमिता और सामुदायिक सहभागिता पर विशेष जोर के साथ किया गया। समारोह में प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, विशेषज्ञों, संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों ने भाग लिया तथा समकालीन सामाजिक चुनौतियों के समाधान में प्रौद्योगिकी और नवाचार की भूमिका पर विचार साझा किए।

सामाजिक परिषद के संयोजक डॉ. अरविंद सिंह ने उपस्थित जनसमूह का स्वागत किया। उन्होंने आधुनिक तकनीकी प्रगति को अपनाने के साथ-साथ पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का महत्व रेखांकित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीकी नवाचार को समाज की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ने का आह्वान किया।
आरजीआईपीटी के अधिष्ठाता (छात्र कल्याण) ने अपने संबोधन में कहा कि ‘सौहार्द्य’ सामाजिक जागरूकता, सामुदायिक सहभागिता और उत्तरदायी नवाचार को प्रोत्साहित करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति के साथ सामाजिक सौहार्द, संवेदनशीलता और समाज के कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता भी आवश्यक है। उनके अनुसार ऐसे आयोजनों की वास्तविक सफलता केवल पुरस्कारों और सम्मान से नहीं, बल्कि उनसे बनने वाली मित्रताओं, प्राप्त अनुभवों और सार्थक सीख के अवसरों से मापी जानी चाहिए।

रक्षा सामग्री एवं भंडार अनुसंधान से जुड़े डॉ. हरीश कुमार ने भारत की भौगोलिक विविधता का उल्लेख करते हुए विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों की आवश्यकताओं के अनुरूप सामाजिक रूप से टिकाऊ समाधान विकसित करने की जरूरत बताई। उन्होंने आत्मनिर्भरता, स्वदेशी नवाचार और राष्ट्र निर्माण में युवाओं के सार्थक योगदान पर बल दिया। विद्यार्थियों को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि गलतियाँ सीखने और नवाचार की प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा हैं।
पर्यावरण वैज्ञानिक एवं सलाहकार प्रो. बिनीषा ने सामाजिक चुनौतियों के समाधान में समावेशिता, रचनात्मकता और उद्यमिता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को समस्या-समाधान की सोच विकसित करने तथा छोटी दिखाई देने वाली सामाजिक समस्याओं के लिए भी नवाचारी समाधान खोजने को प्रेरित किया। उन्होंने शिक्षा में उद्यमिता को शामिल करने की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती प्रौद्योगिकियाँ नए अवसर उत्पन्न कर रही हैं; इसलिए विद्यार्थियों को केवल रोजगार पाने तक सीमित न रहकर नवाचार और उद्यम के माध्यम से रोजगार सृजन का लक्ष्य भी रखना चाहिए।

बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. महेश जी. ठक्कर ने विज्ञान और समाज के गहरे संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक जिज्ञासा विकसित करने, अपने आसपास के परिवेश का सूक्ष्म अवलोकन करने और अर्जित ज्ञान को वास्तविक सामाजिक समस्याओं के समाधान में लगाने के लिए प्रेरित किया। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नागरिक उत्तरदायित्व और सामाजिक सहभागिता के महत्व पर बल दिया। उन्होंने भारत की समृद्ध विरासत, प्राचीन शिक्षा परंपराओं तथा समाज की उन्नति के लिए नागरिक चेतना विकसित करने की आवश्यकता का भी उल्लेख किया।
आरजीआईपीटी के निदेशक प्रोफेसर हरीश हिरानी ने भारत की विकास यात्रा में नवाचार, स्टार्टअप और सामाजिक उद्यमिता के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। नवीकरणीय ऊर्जा, विशेषकर सौर ऊर्जा में उभरते अवसरों का उल्लेख करते हुए उन्होंने सेल्को इंडिया के सह-संस्थापक और भारतीय सामाजिक उद्यमी हरीश हांडे का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि किफायती और टिकाऊ तकनीकी समाधानों के माध्यम से सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने में सामाजिक उद्यमिता परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों को सतत विकास में योगदान देने वाली प्रौद्योगिकियों पर काम करने के लिए प्रेरित किया।

प्रोफेसर हरीश हिरानी ने सामाजिक उद्देश्य से प्रेरित सफल उद्यम के उदाहरण के रूप में अमूल का भी उल्लेख किया और उद्यमिता की परिवर्तनकारी क्षमता पर जोर दिया। उन्होंने युवा पीढ़ी से पारंपरिक रोजगार की आकांक्षा तक सीमित रहने के बजाय नवप्रवर्तक, उद्यमी और रोजगार सृजक बनने का आह्वान किया। उन्होंने आरजीआईपीटी के विद्यार्थियों द्वारा डिजाइन नवाचार और उत्पाद नवाचार (डीआईपी/डीआईसी) की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्हें नवाचार-केंद्रित गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी तथा वास्तविक सामाजिक आवश्यकताओं पर आधारित स्टार्टअप विचार विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया।
समारोह के विचार-विमर्श में ‘सौहार्द्य 2026’ का मूल संदेश स्पष्ट रूप से उभरा—प्रौद्योगिकी, सामाजिक चेतना, स्थिरता और उद्यमशील सोच को एक साथ लाकर समाज पर सार्थक एवं दीर्घकालिक सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न करना। कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों को अपनी शैक्षणिक और व्यावसायिक यात्रा में रचनात्मकता, समावेशिता, वैज्ञानिक जिज्ञासा, नागरिक जिम्मेदारी और नवाचार अपनाने के सामूहिक संदेश के साथ हुआ।

आरजीआईपीटी जायस में 30–31 अक्टूबर 2026 को आयोजित ‘सौहार्द्य 2026’ के प्रमुख कार्यक्रमों में ‘निर्माण’—राष्ट्रीय सामाजिक-तकनीकी सम्मेलन, ‘सोशियोथॉन’—सामाजिक नवाचार चुनौती, विज्ञान एवं सामाजिक प्रदर्शनी, ‘प्रतिबिम्ब’—लघु फिल्म प्रतियोगिता तथा सामाजिक विषयों पर आधारित रील निर्माण प्रतियोगिता शामिल हैं। यह उत्सव विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, नवप्रवर्तकों और व्यापक समुदाय के बीच संवाद को बढ़ावा देने के साथ वास्तविक सामाजिक चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान खोजने का प्रयास है।
‘सौहार्द्य 2026’ के माध्यम से आरजीआईपीटी तकनीकी रूप से दक्ष, सामाजिक रूप से उत्तरदायी और नवाचार के प्रति समर्पित भावी नेतृत्व विकसित करने की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट करता है।
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